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गंगा दशहरा पर बन रहे हैं दुर्लभ योग संयोग, इस दिन करें ये 5 उपाय
इस बार गंगा दशहरा का महापर्व इस वर्ष 25 मई 2026, सोमवार को मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस बार का गंगा दशहरा अत्यंत दुर्लभ और मंगलकारी संयोगों के साथ आ रहा है। गंगा दशहरा के पावन पर्व पर इस बार कई दुर्लभ शुभ योगों का महासंयोग बन रहा है। इस विशेष दिन मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था, इसलिए इस दिन किए गए दान-पुण्य और उपायों से भक्तों के 10 प्रकार के पापों (कायिक, वाचिक और मानसिक) का नाश होता है। कुंडली के दोषों को दूर करने और जीवन में सुख-समृद्धि लाने के लिए इस दिन ये 5 अचूक उपाय जरूर करें।
1. गंगा स्नान और 10 की संख्या का नियम
अगर संभव हो तो पवित्र गंगा नदी में स्नान करें। यदि ऐसा न हो पाए, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इस दिन '10' की संख्या का विशेष महत्व है, इसलिए स्नान के समय मां गंगा के 10 नामों का स्मरण करें।
2. 10 दीपकों का दान (दीपदान)
गंगा दशहरा की शाम को किसी मंदिर, नदी के घाट या घर के मुख्य द्वार और तुलसी के पास मिट्टी के 10 दीपक जलाएं। मां गंगा और भगवान शिव के निमित्त किया गया यह दीपदान जीवन के अंधकार और कष्टों को दूर कर घर में सकारात्मक ऊर्जा लाता है।
3. सत्तू, मटका और मौसमी फलों का दान
जेठ के महीने में गर्मी अपने चरम पर होती है, इसलिए इस दिन शीतल चीजों का दान महापुण्य फल देता है। किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को पानी से भरा मिट्टी का घड़ा (मटका), सत्तू, खरबूजा, आम या पंखा दान करें। ध्यान रखें कि दान में दी जाने वाली चीजों की संख्या भी यदि 10 हो, तो बेहद शुभ माना जाता है।
4. कर्ज और दरिद्रता से मुक्ति के लिए उपाय
गंगा दशहरा के दिन एक तांबे के पात्र में शुद्ध जल या गंगाजल लें। उसमें थोड़े से काले तिल और एक चुटकी चंदन मिलाएं। इसके बाद उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके भगवान शिव के 'गंगाधर' स्वरूप का ध्यान करते हुए शिवलिंग पर यह जल अर्पित करें। इससे आर्थिक तंगी दूर होती है।
5. 'गंगा स्तोत्र' का पाठ
इस दिन पूज्य संत श्री आदि शंकराचार्य जी द्वारा रचित 'गंगा स्तोत्र' का पाठ अवश्य करें। यदि पूरा स्तोत्र पढ़ना संभव न हो, तो “ॐ नमो भगवति हिलि हिलि मिलि मिलि गंगे मां पावय पावय स्वाहा” मंत्र का 108 बार जाप करें। इससे मानसिक तनाव दूर होता है और सोची हुई योजनाएं सफल होती हैं।
खास बात: गंगा दशहरा पर किया गया दान न केवल आपके इस जन्म के कष्टों को काटता है, बल्कि पितरों की आत्मा को भी शांति और मोक्ष प्रदान करता है।
