साल 2026 की अक्षय तृतीया (20 अप्रैल) इसलिए बेहद खास है क्योंकि इस दिन ग्रहों की जो स्थिति बन रही है, वैसी स्थिति लगभग 100 साल के अंतराल के बाद देखने को मिल रही है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस दिन 5 महायोगों का एक साथ मिलन हो रहा है, जो इसे निवेश और शुभ कार्यों के लिए "अमोघ" (न विफल होने वाला) बना रहा है। यहाँ उन दुर्लभ योगों का विवरण दिया गया है।
1. गजबदन योग (Gajbadan Yoga)
इस दिन चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में होंगे और उन पर गुरु (बृहस्पति) की शुभ दृष्टि रहेगी। ज्योतिष में इसे सुख-समृद्धि और ज्ञान के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
2. शश महापुरुष राजयोग (Shasha Rajyoga)
शनि देव अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में विराजमान रहेंगे। 100 साल के चक्र में ऐसा बहुत कम होता है कि अक्षय तृतीया के दिन शनि अपनी इतनी मजबूत स्थिति में हों। यह योग स्थिरता और लंबे समय तक चलने वाली संपत्ति (जैसे जमीन या घर) खरीदने के लिए बहुत शुभ है।
3. त्रिपुष्कर योग (Tripushkar Yoga)
इस दिन तिथि, वार और नक्षत्र के संयोग से त्रिपुष्कर योग बन रहा है। मान्यता है कि इस योग में किए गए किसी भी शुभ कार्य या निवेश का फल तीन गुना होकर वापस मिलता है।
4. रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग
रवि योग: यह सूर्य की ऊर्जा से भरपूर होता है जो मार्ग की बाधाओं को दूर करता है।
सर्वार्थ सिद्धि योग: जैसा कि नाम से स्पष्ट है, इस योग में शुरू किया गया कोई भी काम 'सिद्ध' (सफल) होता है।
5. ग्रहों का विशेष गोचर
सूर्य का उच्च होना: सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में होंगे, जो आत्मविश्वास और सरकारी कार्यों में सफलता दिलाते हैं।
शुक्र की स्थिति: धन के कारक शुक्र भी अनुकूल स्थिति में रहेंगे, जो खरीदारी के लिए शुभ फलदायी हैं।
20 अप्रैल पूजा और खारीदी का शुभ मुहूर्त:
शुभ मुहूर्त: सुबह 09:06 से 10:43 तक।
अभिजीत मुहूर्त: दिन में 11:54 से दोपहर 12:46 तक।
राहुकाल: सुबह 07:28 से 09:05 के बीच। इस बीच सभी कार्य वर्जित रहेंगे।
इन योगों का आपके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
इन 100 साल बाद बनने वाले दुर्लभ संयोगों के कारण:
आर्थिक मजबूती: यदि आप लंबे समय से कर्ज या तंगी से जूझ रहे हैं, तो इस दिन किया गया दान या निवेश धन के नए मार्ग खोलेगा।
रुके हुए काम: यदि कोई प्रॉपर्टी या कानूनी मामला वर्षों से अटका है, तो इस दिन उस दिशा में कदम उठाना लाभकारी होगा।
खरीदारी: इस दिन सोना, चांदी, वाहन या घर खरीदना न केवल शुभ होगा, बल्कि वह संपत्ति आपके पास "अक्षय" (स्थायी) रहेगी।
विशेष: ज्योतिषियों का मानना है कि 1920 के दशक के बाद अब जाकर ग्रहों की ऐसी "पावरफुल" जुगलबंदी अक्षय तृतीया पर देखने को मिल रही है।