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Last Updated : गुरुवार, 14 मई 2026 (16:55 IST)

गंगा दशहरा पर बन रहा है इस बार दुर्लभ योग संयोग, इस मुहूर्त में करें स्नान और पूजा

The image depicts the River Ganges, Mother Ganga, and a devotee performing worship, with the Sun and a temple in the background.
Ganga dussehra 2026: ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा जयंती मनाई जाती है जिसे गंगा दशहरा भी कहते हैं। इस बार गंगा दशहरा का महापर्व इस वर्ष 25 मई 2026, सोमवार को मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस बार का गंगा दशहरा अत्यंत दुर्लभ और मंगलकारी संयोगों के साथ आ रहा है, जो इसे आध्यात्मिक और भौतिक उन्नति के लिए विशेष बना रहा है।

गंगा दशहरा 2026: तिथि और मुहूर्त

दशमी तिथि आरंभ: 25 मई, 2026 को सुबह 04:30 बजे से।
दशमी तिथि समाप्त: 26 मई, 2026 को सुबह 05:10 बजे तक।
 

गंगा दशहरा 2026: शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त (स्नान के लिए): सुबह 04:04 बजे से 04:45 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त (पूजा के लिए): दिन में 11:51 बजे से 12:46 बजे तक।
 

पूजा का विशेष महत्व और योग

गंगा दशहरा: इस वर्ष गंगा दशहरा पर कई शुभ संयोग बन रहे हैं, जो इस दिन की महत्ता को और बढ़ा देते हैं। इस दिन शुभ मुहूर्त में गंगा नदी में स्नान करने के बाद भगवान शिव की पूजा और दान करने का खास महत्व है।
 

गंगा दशहरा दुर्लभ योग संयोग:

1. हस्त नक्षत्र और ज्येष्ठ शुक्ल दशमी का संयोग

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जिस दिन माँ गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था, उस दिन ज्येष्ठ मास, शुक्ल पक्ष, दशमी तिथि और हस्त नक्षत्र था।
विशेषता: 25 मई 2026 को ये सभी स्थितियाँ एक साथ बन रही हैं। हस्त नक्षत्र के स्वामी 'चंद्रमा' हैं और गंगा जी का संबंध भी शीतलता से है, इसलिए इस दिन गंगा स्नान का फल कई गुना बढ़ जाएगा।
 

2. कई शुभ योगों का संयोग:

इस दिन आकाश मंडल में दो अत्यंत शुभ योग बन रहे हैं:
हर्ष योग: यह योग नाम के अनुरूप ही जीवन में प्रसन्नता और विजय लेकर आता है। इस योग में किए गए कार्यों से मान-सम्मान में वृद्धि होती है।
सिद्धि योग: 25 मई को दोपहर के समय सिद्धि योग रहेगा। इस योग में मंत्र दीक्षा लेना या नया व्यापार शुरू करना अत्यंत सफल माना जाता है।
 
अन्य योग: सर्वाथ सिद्धि योग, अमृत योग, रवियोग, आयुष्यमान योग, शोभन और सौभग्य योग का संयोग भी है। इनमें से तीन योग सर्वार्थसिद्धि, आयुष्मान और शोभन की शुरुआत सुबह के पांच बजकर 23 मिनट से होगी। तीनों योग पूर्वाह्न 11 बजकर 32 मिनट तक रहेंगे। सौभाग्य और अमृत योग क्रमशः मध्याह्न 12 बजकर 43 मिनट और 12:51 मिनट से आरंभ होंगे। इनका समापन क्रमशः सायं 05 बजकर 22 मिनट एवं 06 बजकर 14 मिनट पर होगा। रवि योग पूरे दिन रहेगा।
 

3. 'वरेय्यान' योग का प्रभाव

दिन के शुरुआती भाग में वरेय्यान योग रहेगा। यह योग मांगलिक कार्यों और सुख-सुविधाओं के विस्तार के लिए श्रेष्ठ माना गया है। यदि आप घर में कोई धार्मिक अनुष्ठान या भूमि-पूजन करना चाहते हैं, तो यह योग सर्वश्रेष्ठ है।
 

4. वृषभ राशि में ग्रहों की विशेष स्थिति

25 मई 2026 को ग्रहों की स्थिति भी बहुत दिलचस्प है:
बुध और सूर्य का बुधादित्य योग: वृषभ राशि में बुध और सूर्य की युति से 'बुधादित्य राजयोग' का निर्माण हो रहा है।
शुक्र की उपस्थिति: वृषभ राशि का स्वामी शुक्र भी वहीं मौजूद रहेगा, जिससे 'मालव्य योग' जैसा शुभ प्रभाव देखने को मिलेगा। यह योग धन, वैभव और ऐश्वर्य देने वाला माना गया है।
 

5. गंगा दशहरा 2026: क्या करें विशेष?

दशविध स्नान: इस दिन गंगा जी में 10 डुबकी लगाने का विधान है। यदि गंगा जी जाना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
संख्या 10 का महत्व: गंगा दशहरा पर 10 प्रकार के पापों (3 कायिक, 4 वाचिक और 3 मानसिक) की मुक्ति के लिए 10 दीप दान, 10 प्रकार के फल और 10 ब्राह्मणों को दान देने की परंपरा है।
मिट्टी के घड़े का दान: ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी के कारण इस दिन पानी से भरे मिट्टी के घड़े (कलश) का दान करना सबसे बड़ा पुण्य माना गया है।
 
 
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वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम
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