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PFI पर 5 साल का बैन, जानिए आतंकी कनेक्शन से लेकर फंड जुटाने तक इस खतरनाक संगठन के बारे में सब कुछ
नई दिल्ली। मोदी सरकार ने आतंक के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता के कारण पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) और उससे संबद्ध कई अन्य संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया है। पिछले कई दिनों से NIA, ED समेत कई एजेसियां पीएफआई के ठिकानों पर छापेमारी कर रही थीं। संगठन से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस कुख्यात संगठन पीएफआई के बारे में जानिए सब कुछ...
क्या है PFI?: इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) का गैरराजनीतिक संगठन है। सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया यानी कि एसडीपीआई इसका राजनीतिक संगठन है।
हाल ही में चर्चा में आए एसडीपीआई के मूल संगठन पीएफआई पर विभिन्न असामाजिक और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में लिप्त होने का आरोप है। इतना ही नहीं, पीएफआई के खिलाफ आरोप ये भी हैं कि विभिन्न इस्लामी आतंकवादी समूहों के साथ उसके कथित संबंध हैं। इस संगठन का नाम लगातार हिंसा के मामलों में जुड़ता आया है। इसके साथ ही संगठन के महिलाओं के लिए नेशनल वीमेंस फ्रंट, स्टूडेंट के लिए कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया भी सक्रिय है।
मुस्लिमों के इर्द-गिर्द चलती है राजनीति : पीएफआई 2006 में उस वक़्त सुर्खियों में आया था जब दिल्ली के राम लीला मैदान में नेशनल पॉलिटिकल कांफ्रेंस का आयोजन किया गया था। तब लोगों की बड़ी संख्या में लोगों ने यहां उपस्थिति दर्ज कराई थी। यह माना जाता है कि इसकी पूरी राजनीति मुस्लिमों के इर्द-गिर्द ही चलती है।
एक जानकारी के मुताबिक पीएफआई तेजी से अपने पांव फैला रहा है। देश में 23 राज्य ऐसे हैं, जहां पीएफआई अपनी गतिविधियां चला रहा है। यह संगठन खुद को न्याय, स्वतंत्रता और सुरक्षा का पैरोकार बताता है। मुस्लिमों के अलावा देशभर के दलितों और आदिवासियों पर होने वाले अत्याचार के लिए आंदोलन करता है। शाहीन बाग मामले में भी पीएफआई पर आरोप हैं कि वह पैसे देकर आंदोलन को भड़काने का काम कर रहा था। शाहीन बाग इलाके में उसका मुख्यालय है। दिल्ली दंगे के बाद बेंगलुरु में हुए दंगे में भी पीएफआई का नाम सुर्खियों में आया था।
क्या है आतंकियों से PFI का कनेक्शन? : केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार पीएफआई के कुछ संस्थापक सदस्य स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के नेता हैं और पीएफआई के जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) से भी संबंध हैं। जेएमबी और सिमी दोनों ही प्रतिबंधित संगठन हैं। पीएफआई के आईएसआईएस जैसे आतंकवादी संगठनों के साथ संबंधों के भी कई मामले सामने आए हैं।
अधिसूचना में दावा किया गया कि पीएफआई और उसके सहयोगी या मोर्चे देश में असुरक्षा की भावना फैलाने के लिए एक समुदाय में कट्टरपंथ को बढ़ाने के लिए गुप्त रूप से काम कर रहे हैं जिसकी पुष्टि इस तथ्य से होती है कि पीएफआई के कुछ कार्यकर्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय आतंकवादी संगठनों में शामिल हुए हैं।
गजवा ए हिंद और कश्मीर से कनेक्शन : जुलाई 2022 में बिहार की राजधानी पटना के फुलवारी शरीफ इलाके से गिरफ्तार किए गए पीएफआई सदस्यों के बारे में ऐसी बातें सामने आई जिसने सभी को हैरान कर दिया। पुलिस ने 'भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल आतंकी मॉड्यूल' के भंडाफोड़ कर दावा किया था PFI का गजवा-ए-हिंद और कश्मीर से भी कनेक्शन था। पीएफआई के ये सदस्य राज्य की राजधानी में कश्मीर और जिहाद को लेकर बड़ी साजिश रच रहे थे।
आरोपियों के फोन नंबर की पूरी जांच करने के बाद पता चला कि वह देश विरोधी सामग्रियों को भेजते थे। एक आरोपी गजवा-ए-हिंद नाम के व्हाट्सऐप ग्रुप से जुड़ा हुआ था, जहां देश विरोधी बातें हुआ करती थीं और जानकारियां साझा की जाती थीं। व्हाट्सऐप ग्रुप पर आतंक का समर्थन करने वाली पोस्ट लिखकर लोगों को भड़काया जाता था। इसके टारगेट पर कश्मीर के युवा होते थे। ये 2023 में सीधा जिहाद करने की योजना बना रहे थे।
विदेशों से किस तरह आता था धन : प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पिछले दिनों पीएफआई पर बड़ा खुलासा करते हुए दावा किया था कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के विदेश में रहने वाले कुछ सदस्यों ने भारत में प्रवासी भारतीयों (NRI) खातों में कोष भेजा जिसे बाद में कट्टरपंथी इस्लामी संगठन को स्थानांतरित कर दिया गया। इसका मकसद विदेशी वित्तोषण से संबंधित कानून से बचना था। पीएफआई ने विदेश में कोष इकट्ठा किया और उसे हवाला/अन्य माध्यम से भारत भेजा। विदेश से हासिल कोष को सरकारी एजेंसियों से छुपाया गया और पीएफआई द्वारा ऐसे कोष और चंदा को जुटाने में नियमों का पालन नहीं किया गया।
पीएम मोदी भी थे निशाने पर : हाल ही में ED ने पीएफआई को लेकर एक और सनसनीखेज खुलासा किया था। जांच एजेंसी ने कहा कि इस साल जुलाई में पटना में पीएफआई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमले करने की खतरनाक योजना बनाई थी। इसके लिए संगठन ने पटना में ट्रेनिंग कैंप भी लगाया था और कई सदस्यों को ट्रेनिंग देने का काम किया। पीएम मोदी के हर गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी।
इन संगठनों पर भी लगा प्रतिबंध : आतंकवादरोधी कानून यूएपीए के तहत रिहैब इंडिया फाउंडेशन (RIF), कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CF), ऑल इंडिया इमाम काउंसिल (AICC), नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गेनाइजेशन (NCHRO), नेशनल विमेंस फ्रंट, जूनियर फ्रंट, एम्पावर इंडिया फाउंडेशन और रिहैब फाउंडेशन(केरल) को भी प्रतिबंधित किया गया है।
