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ओवर स्पीडिंग ने भारत में बढ़ाया सड़क पर मौतों का ग्राफ, 120 किलोमीटर प्रति घंटा दौड़ी थी सायरस की कार
रविवार को चर्चित उद्योगपति सायरस मिस्त्री की एक सड़क हादसे में मौत हो गई। प्राथमिक जांच में सामने आया कि उनकी कार की स्पीड तेज थी और उन्होंने सीट बेल्ट भी नहीं लगाया था, जिसकी वजह से उनकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि स्पीड की वजह से उनके शरीर के अंदरूनी अंगों में गंभीर चोटें आई थीं।
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि सायरस मिस्त्री की मर्सिडीज कार की स्पीड 120 KMPH थी। यानी सिर्फ 9 मिनट में ही तय कर रही थी 20 किमी की दूरी। ऐसे में अगर कार डिवाइडर से टकराती है तो बचने के चांस बेहद कम होते हैं। सायरस मिस्त्री और उनके साथ बैठे लोगों के साथ यही हुआ। इस घटना के बाद देश में सड़क हादसों को लेकर एक बार फिर से चर्चा है। एनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट में सड़क हादसों के जो आकड़ें सामने आ रहे हैं वे डराने वाले हैं। आइए जानते हैं क्या कहती है रिपोर्ट।
हादसे घटे, लेकिन मौतें बढ़ी
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा एकत्र किए गए आंकड़ों के मुताबिक देश की सड़कों पर प्रतिवर्ष करीब 1.5 लाख मौतें होती हैं। इनमें से एक तिहाई राष्ट्रीय राजमार्गों पर हुए हादसों के कारण होती है। आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच सालों में जहां सड़क दुर्घटनाएं साल 2017 की तुलना में 4,45,730 से घटकर 2021 में 4,03,116 हो गईं, वहीं इसी अवधि में इन हादसों में हुई मौतों की संख्या 1,50,093 से बढ़कर 1,55,622 हो गई।
क्या कहती है ताजा रिपोर्ट?
एनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट बताती है कि करीब 42 हजार मौतों के पीछे खतरनाक और लापरवाह ड्राइविंग जिम्मेदार है। वहीं, तेज गति से 87 हजार मौतें हुईं। दोपहिया वाहनों में सबसे अधिक मौतें (44.5 फीसदी) दर्ज हुईं, जबकि 2021 में दुर्घटनाओं में बसों की वजह से 3 फीसदी मौतें दर्ज की गईं।
ये राज्य सड़क हादसों में सबसे आगे
सड़क हादसों में राज्यवार बात करें तो साल 2020 से 2021 तक यातायात दुर्घटना के मामलों में सबसे अधिक वृद्धि तमिलनाडु (46,443 से 57,090 तक) में दर्ज की गई। इसके बाद मध्यप्रदेश (43,360 से 49,493), उत्तर प्रदेश (30,593 से 36,509), केरल (27,998 से 33,051 तक) और महाराष्ट्र (24,908 से 30,086) है।
भारत में सड़कों का हाल
लंदन यूनिवर्सिटी की एक रिपोर्ट बताती है कि भारत में सड़कों की गुणवत्ता सबसे खराब है। भारत की सिर्फ 3% सड़कें ही नेशनल हाइवे हैं, जबकि 75% हाईवे सिर्फ दो लेन ही हैं। भारत की सड़कें बहुत संकरी हैं। वहीं रिपोर्ट कहती है कि करीब 30% से ज्यादा गांवों में अभी सड़क नहीं पहुंची है।
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि सायरस मिस्त्री की मर्सिडीज कार की स्पीड 120 KMPH थी। यानी सिर्फ 9 मिनट में ही तय कर रही थी 20 किमी की दूरी। ऐसे में अगर कार डिवाइडर से टकराती है तो बचने के चांस बेहद कम होते हैं। सायरस मिस्त्री और उनके साथ बैठे लोगों के साथ यही हुआ। इस घटना के बाद देश में सड़क हादसों को लेकर एक बार फिर से चर्चा है। एनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट में सड़क हादसों के जो आकड़ें सामने आ रहे हैं वे डराने वाले हैं। आइए जानते हैं क्या कहती है रिपोर्ट।
हादसे घटे, लेकिन मौतें बढ़ी
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा एकत्र किए गए आंकड़ों के मुताबिक देश की सड़कों पर प्रतिवर्ष करीब 1.5 लाख मौतें होती हैं। इनमें से एक तिहाई राष्ट्रीय राजमार्गों पर हुए हादसों के कारण होती है। आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच सालों में जहां सड़क दुर्घटनाएं साल 2017 की तुलना में 4,45,730 से घटकर 2021 में 4,03,116 हो गईं, वहीं इसी अवधि में इन हादसों में हुई मौतों की संख्या 1,50,093 से बढ़कर 1,55,622 हो गई।
क्या कहती है ताजा रिपोर्ट?
एनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट बताती है कि करीब 42 हजार मौतों के पीछे खतरनाक और लापरवाह ड्राइविंग जिम्मेदार है। वहीं, तेज गति से 87 हजार मौतें हुईं। दोपहिया वाहनों में सबसे अधिक मौतें (44.5 फीसदी) दर्ज हुईं, जबकि 2021 में दुर्घटनाओं में बसों की वजह से 3 फीसदी मौतें दर्ज की गईं।
सड़क हादसों में राज्यवार बात करें तो साल 2020 से 2021 तक यातायात दुर्घटना के मामलों में सबसे अधिक वृद्धि तमिलनाडु (46,443 से 57,090 तक) में दर्ज की गई। इसके बाद मध्यप्रदेश (43,360 से 49,493), उत्तर प्रदेश (30,593 से 36,509), केरल (27,998 से 33,051 तक) और महाराष्ट्र (24,908 से 30,086) है।
भारत में सड़कों का हाल
लंदन यूनिवर्सिटी की एक रिपोर्ट बताती है कि भारत में सड़कों की गुणवत्ता सबसे खराब है। भारत की सिर्फ 3% सड़कें ही नेशनल हाइवे हैं, जबकि 75% हाईवे सिर्फ दो लेन ही हैं। भारत की सड़कें बहुत संकरी हैं। वहीं रिपोर्ट कहती है कि करीब 30% से ज्यादा गांवों में अभी सड़क नहीं पहुंची है।
