ईरान का ‘काला खजाना’ खर्ग द्वीप क्यों नहीं बना अमेरिका-इजराइल का निशाना? 90% तेल निर्यात यहीं से
इजराइल-अमेरिका और ईरान ने बीच पिछले 11 दिनों से भीषण युद्ध चल रहा है। अमेरिका और इजराइल ने ईरान के लगभग सभी महत्वपूर्ण स्थानों पर हमला कर उसे भारी नुकसान पहुंचाया। ईरान ने भी इजराइल के साथ ही खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर जमकर पलटवार किया। भीषण युद्ध के बीच भी अमेरिका ने ईरान के खर्ग द्वीप को अपना निशाना नहीं बनाया है। इसे ईरान का काला खजाना कहा जाता है। यह इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के लिए भी राजस्व का प्रमुख स्रोत बना हुआ है।
कहां है खर्ग द्वीप
खर्ग द्वीप एक छोटा प्रवाल द्वीप है, जो ईरान के कच्चे तेल उद्योग का सबसे बड़ा टर्मिनल है। देश के करीब 90% कच्चे तेल का निर्यात यहीं से होता है। इसे ईरान की तेल की जीवनरेखा भी कहा जाता है। उत्तरी फारस की खाड़ी में स्थित यह द्वीप ईरान से करीब 25 किलोमीटर दूर और और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के 483 किमी (300 मील) उत्तर-पश्चिम में स्थित है। इसकी लंबाई 6 किलोमीटर है।
ईरान इराक युद्ध में हुआ था भारी नुकसान
1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान इराकी सेना द्वारा हमले में द्वीप के तेल टर्मिनल को भारी नुकसान पहुंचा था, लेकिन ईरान ने तुरंत मरम्मत कर परिचालन बहाल कर दिया।
क्या हो सकता है इस द्वीप पर हमला
मीडिया खबरों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस अहम द्वीप को अमेरिकी कब्जे में लेने की कोशिश कर सकते हैं। वह इसके लिए ईरान की धरती पर सेना भेजने पर भी विचार कर रहे हैं। हालांकि इस हमले से युद्ध और भयावह हो सकता है।
ईरान के तेल निर्यात में किसी भी तरह की रुकावट वैश्विक ऊर्जा बाजारों को और अस्थिर कर सकती है। कई ऊर्जा विश्लेषकों का कहना है कि खार्ग द्वीप पर हमला करने से वैश्विक तेल की कीमतों में भी भारी उछाल आ सकता है।
क्या है द्वीप का चीन से कनेक्शन
खर्ग द्वीप से निर्यात होने वाले तेल का सबसे बड़ा खरीदार चीन है। इस तेल निर्यात से ईरान को न केवल भारी राजस्व मिलता है, बल्कि एक महाशक्ति के रूप में चीन का रणनीतिक साथ भी मिलता है। अगर अमेरिका इस द्वीप पर हमला करता है तो इससे चीन भी नाराज हो सकता है।
edited by : Nrapendra Gupta