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  4. What benefits are attained by observing the Yogini Ekadashi fast?

योगिनी एकादशी का व्रत करने से कौन-कौन से फल प्राप्त होते हैं?

A scene in the image depicting the worship of Shri Narayana on Yogini Ekadashi
Ashadha Krishna Ekadashi Benefits: पुराणों में वर्णित योगिनी एकादशी व्रत का केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आत्मसंयम, सात्विक जीवन और ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना को भी मजबूत करती है। इस दिन श्रद्धालु उपवास रखकर भगवान विष्णु का पूजन करते हैं, 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करते हैं और जरूरतमंदों को दान-पुण्य भी करते हैं। योगिनी एकादशी की कथा केवल एक राजा, माली और ऋषि की पौराणिक कहानी नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन, अध्यात्म और मनोविज्ञान से जुड़ा एक गहरा संदेश है।ALSO READ: Yogini Ekadashi 2026: योगिनी एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा?
 

योगिनी एकादशी का व्रत करने से मुख्य रूप से निम्नलिखित फलों की प्राप्ति होती है:

 

1. समस्त पापों का नाश (प्रायश्चित का फल)

जाने-अनजाने में इंसान से कई गलतियां या पाप हो जाते हैं। मान्यताओं के अनुसार, योगिनी एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन के सभी संचित (पुराने) पाप नष्ट हो जाते हैं और आत्मा शुद्ध होती है।

 

2. गंभीर बीमारियों और कोढ़ से मुक्ति

जैसा कि पौराणिक कथा में बताया गया है कि राजा कुबेर के शाप से कोढ़ी हुए हेम माली को इस व्रत से नया जीवन मिला था। इसलिए माना जाता है कि इस व्रत को करने से त्वचा संबंधी रोग (Skin Diseases), कोढ़ और अन्य असाध्य या गंभीर बीमारियों से मुक्ति मिलती है। यह व्रत अच्छी सेहत और आरोग्य प्रदान करता है।
 

3. अठासी हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर पुण्य

शास्त्रों में लिखा है कि जो फल 88,000 ब्राह्मणों को भरपेट भोजन कराने से मिलता है, वही विशाल पुण्य फल केवल एक योगिनी एकादशी का व्रत पूरी निष्ठा से रखने से प्राप्त हो जाता है।ALSO READ: देवशयनी एकादशी से चातुर्मास क्यों शुरू होता है? जानें धार्मिक मान्यता और आध्यात्मिक महत्व
 

4. जीवन में सुख-समृद्धि और पारिवारिक खुशहाली

इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन से दरिद्रता और आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं। भगवान विष्णु/ नारायण की कृपा से घर में धन-धान्य के भंडार भरते हैं और पारिवारिक जीवन में सुख-शांति का वास होता है।
 

5. अंत समय में मोक्ष की प्राप्ति

यह व्रत न केवल इस लोक में सुख देता है, बल्कि परलोक भी सुधारता है। जो भक्त इस दिन पूरी श्रद्धा से व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, उन्हें मृत्यु के बाद विष्णु लोक (स्वर्गलोक/ बैकुंठ धाम) या स्वर्गलोक में स्थान मिलता है। वे जीवन-मरण के चक्र से मुक्त हो जाते हैं।
 
संक्षेप में कहें तो: यदि कोई व्यक्ति अपने जीवन के कष्टों, बीमारियों और पापों से छुटकारा पाकर मानसिक शांति और सुख-समृद्धि चाहता है, तो उसके लिए योगिनी एकादशी का व्रत किसी वरदान से कम नहीं है।
 
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लेखक के बारे में
राजश्री कासलीवाल
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