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Kalashtami 2026: कालाष्टमी का क्या है महत्व?

The picture depicts the significance of worshipping Lord Kaal Bhairav ​​on the occasion of Kalashtami
Kalashtami Importance: सनातन धर्म में प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी के रूप में मनाया जाता है। यह दिन भगवान शिव के उग्र और रक्षक स्वरूप भगवान काल भैरव को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काल भैरव को काशी का कोतवाल और धर्म की रक्षा करने वाला देवता माना गया है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान काल भैरव की पूजा, व्रत और मंत्र-जप करने से भय, नकारात्मकता और जीवन की अनेक बाधाओं से मुक्ति मिलने का आशीर्वाद प्राप्त होता है।ALSO READ: Vastu Shastra: वास्तु के ये 10 नियम बदल सकते हैं घर का माहौल, बनी रहेगी सुख-समृद्धि
 

आइए कालाष्टमी के महत्व को सरल बिंदुओं में समझते हैं:

 

1. भय और संकटों से मुक्ति

'काल' का एक अर्थ 'मृत्यु' और 'समय' भी है। कालभैरव की पूजा करने से इंसान को अकाल मृत्यु के भय, भूत-प्रेत की बाधाओं और हर तरह के डर से मुक्ति मिलती है। इन्हें संकटमोचक भी माना जाता है जो अपने भक्तों के सभी दुखों को हर लेते हैं।
 

2. नकारात्मक शक्तियों और शत्रुओं का नाश

तंत्र-मंत्र और तंत्र साधना में कालभैरव की पूजा का विशेष महत्व है। माना जाता है कि कालाष्टमी का व्रत रखने और पूजा करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा यानी Negative Energy खत्म होती है और शत्रुओं तथा विरोधियों पर विजय प्राप्त होती है।
 

3. ग्रहों के दोष (विशेषकर शनि और राहु-केतु) से राहत

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, भगवान कालभैरव की पूजा करने से कुंडली के क्रूर ग्रहों का प्रभाव कम होता है। शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या से परेशान लोगों के लिए कालाष्टमी का व्रत और दर्शन बेहद फलदायी माना जाता है। राहु और केतु के दोषों को शांत करने के लिए भी इस दिन भैरव जी की उपासना की जाती है।
 

4. पापों का नाश और शुद्धि

'भैरव' शब्द का एक अर्थ 'भय को भगाने वाला' और 'भरण-पोषण करने वाला' भी है। इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा से व्यक्ति के अनजाने में किए गए पाप कट जाते हैं और मन में सकारात्मक विचारों का संचार होता है।
 

कालाष्टमी से जुड़ी कुछ विशेष बातें:

वाहन की पूजा: भगवान कालभैरव का वाहन काला कुत्ता है। इसलिए इस दिन काले कुत्ते को भोजन कराना-जैसे मीठी रोटी या बिस्कुट बेहद शुभ माना जाता है। माना जाता है कि इससे भैरव बाबा साक्षात प्रसन्न होते हैं।
 
तांत्रिक और गृहस्थ दोनों के लिए महत्व: जहां एक ओर तांत्रिक और अघोरी रात के समय कालभैरव की गुप्त साधना करते हैं, वहीं आम गृहस्थ लोग जीवन में सुख-शांति और सुरक्षा के लिए दिन में साधारण पूजा-अर्चना और व्रत करते हैं।
 
संक्षेप में कहें तो कालाष्टमी का महत्व जीवन से अंधकार, डर और बुराइयों को मिटाकर साहस, सुरक्षा और मानसिक शांति प्राप्त करने में है।
 
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लेखक के बारे में
राजश्री कासलीवाल
श्रीमती राजश्री कासलीवाल पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव। धर्म, व्रत-त्योहार, ज्योतिष, रेसिपी, साहित्य, लाइफ स्टाइल और अन्य विषयों पर लेखन का कार्य। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सीनियर सब-एडिटर (कंटेंट) के पद पर कार्यरत हैं।  .... और पढ़ें