1. धर्म-संसार
  2. धर्म-दर्शन
  3. श्रावण मास विशेष
  4. shiva-mutthi-in-shravan-maas-significance-and-rituals

सावन के सोमवार में ज़रूर चढ़ाएं 'शिवा मुट्ठी': जानिए वो 1 चीज़ जो दूर करेगी पैसों की तंगी

shivling, trishul shiva mutthi
Shiva Mutthi 2026: सनातन धर्म में श्रावण (सावन) मास का प्रत्येक दिन और प्रत्येक सोमवार अत्यंत पवित्र माना जाता है। सावन के सोमवार को भगवान शिव का विशेष पूजन होता है, जिसमें जल, बेलपत्र और धतूरे के अलावा 'शिवा मुट्ठी' चढ़ाने की एक विशेष और प्राचीन परंपरा है।
 

क्या होती है शिवा मुट्ठी?

सावन के महीने में सोमवार के दिन शिवलिंग पर अपनी हथेली में भरकर (एक मुट्ठी) अनाज या अन्न अर्पित करने की धार्मिक विधि को ही 'शिवा मुट्ठी' कहा जाता है।
सावन के अलग-अलग सोमवार को अलग-अलग प्रकार का अनाज मुट्ठी भर कर भगवान शिव को समर्पित किया जाता है।
 

सावन के किस सोमवार को क्या चढ़ाएं?

सावन मास के दौरान आने वाले 4 या 5 सोमवारों में क्रम के अनुसार शिवा मुट्ठी चढ़ाने का नियम इस प्रकार है:
पहला सोमवार: एक मुट्ठी कच्चे चावल (अक्षत)(ध्यान रखें कि चावल टूटे हुए न हों)
दूसरा सोमवार: एक मुट्ठी सफेद तिल
तीसरा सोमवार: एक मुट्ठी खड़ी मूंग (हरी मूंग)
चौथा सोमवार: एक मुट्ठी जौ (Barley)
पांचवां सोमवार (यदि सावन में 5 सोमवार हों): एक मुट्ठी काले उड़द या सत्तू
 

शिवा मुट्ठी का महत्व और धार्मिक लाभ

अन्नपूर्णा माता और शिव जी की कृपा: शास्त्रों में अन्न को 'ब्रह्म' माना गया है। सावन में शिव जी को मुट्ठी भर अनाज चढ़ाने से घर में कभी धन और अन्न की कमी नहीं होती तथा माता अन्नपूर्णा का वास बना रहता है।

पापों और दोषों से मुक्ति:

चावल: मानसिक शांति और धन-समृद्धि प्रदान करता है।
सफेद तिल: पापों का नाश करता है और स्वास्थ्य में सुधार लाता है।
हरी मूंग: बुद्धिमत्ता, व्यवसाय में उन्नति और मनोकामना पूर्ति के लिए चढ़ाई जाती है।
जौ: सुख-समृद्धि और वंश वृद्धि का प्रतीक है।
काले उड़द: शनि दोष, राहू-केतु के प्रभाव और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करते हैं।
 

दान और निस्वार्थ भाव का प्रतीक:

शिवा मुट्ठी केवल अर्पित करने का प्रतीक नहीं है। शिवलिंग पर चढ़ाया गया यह अन्न बाद में किसी गरीब, जरूरतमंद या पक्षियों को दे दिया जाता है, जिससे अनजाने में ही दान का पुण्य प्राप्त होता है।
 

शिवा मुट्ठी चढ़ाने की सही विधि:

  • सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • तांबे या जलपात्र में जल लेकर सबसे पहले शिवलिंग पर जलाभिषेक करें।
  • इसके बाद चंदन, बेलपत्र, धतूरा और फूल अर्पित करें।
  • अब अपनी सीधी हथेली (दाएं हाथ) में संबंधित सोमवार का अनाज (एक मुट्ठी) लें और "ॐ नमः शिवाय" या "श्री शिवाय नमस्तुभ्यं" मंत्र का जाप करते हुए शिवलिंग पर अर्पित करें।
  • अंत में अपनी मनोकामना कहें और भगवान शिव से घर में सुख-शांति की प्रार्थना करें।
अगला लेख
श्रावण मास विशेष: आखिर क्यों सबसे अनोखा है भगवान शिव का परिवार? जानिए 10 खास बातें