गुरुवार, 2 फ़रवरी 2023
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भारत में लोकतंत्र, उद्देश्य एवं उपलब्धियां...

'लोकतंत्र का अर्थ है, एक ऐसी जीवन पद्धति जिसमें स्वतंत्रता, समता और बंधुता समाज-जीवन के मूल सिद्धांत होते हैं।' -बाबा साहब अम्बेडकर 
 
'लोकतंत्र, अपनी महंगी और समय बर्बाद करने वाली खूबियों के साथ सिर्फ भ्रमित करने का एक तरीका भर है जिससे जनता को विश्वास दिलाया जाता है कि वह ही शासक है जबकि वास्तविक सत्ता कुछ गिने-चुने लोगों के हाथ में ही होती है।' -जॉर्ज बर्नार्ड शॉ
 
उपरोक्त दोनों कथन एक-दूसरे के विरुद्ध होने के बाद भी लोकतंत्र की व्यापकता को इंगित करने के लिए पर्याप्त हैं। 'लोकतंत्र' शब्द राजनीतिक शब्दावली के सर्वाधिक इस्तेमाल किए जाने वाले शब्दों में से एक है। यह महत्वपूर्ण अवधारणा है, जो अपनी बहुआयामी अर्थों के कारण समाज और मनुष्य के जीवन के बहुत से सिद्धांतों को प्रभावित करता है।
 
'लोकतंत्र' शब्द का अंग्रेजी पर्याय 'डेमोक्रेसी' (Democracy) है जिसकी उत्पत्ति ग्रीक मूल शब्द 'डेमोस' से हुई है। डेमोस का अर्थ होता है- 'जन साधारण' और इस शब्द में 'क्रेसी' शब्द जोड़ा गया है जिसका अर्थ 'शासन' होता है। 
 
सरटोरी ने अपनी पुस्तक 'डेमोक्रेटिक थ्योरी' में लिखा है कि राजनीतिक लोकतंत्र एक तरीका या प्रक्रिया है जिसके द्वारा प्रतियोगी संघर्ष से सत्ता प्राप्ति की जाती है और कुछ लोग इस सत्ता को नेतृत्व प्रदान करते हैं। सरटोरी के अनुसार लोकतंत्र काफी कठिन शासन है, इतना कठिन कि केवल विशेषज्ञ लोग ही इसे भीड़तंत्र से बचा सकते हैं अत: इसकी प्रक्रिया को मजबूत बनाना आवश्यक है। (सरटोरी : 1985 : 3-10)।
 
हंटिगटन के अनुसार लोकतंत्र को 3 आधारों पर समझा जा सकता है- (i) शासकीय सत्ता का एक साधन, (ii) सरकार के उद्देश्य, (iii) सरकार को चुनने की प्रक्रिया के रूप में। हंटिगटन के अनुसार लोकतंत्र की इस प्रक्रिया के अंतर्गत स्वतंत्र, निष्पक्ष तथा आवधिक चुनाव के द्वारा 'सबसे शक्तिशाली सामूहिक निर्णय-निर्माता' चुने जाते हैं और सभी वयस्क लोगों को सहभागिता प्राप्त होती है। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए नागरिकों को स्वतंत्रताएं तथा कुछ अधिकार भी प्रदान किए जाते हैं। 
 
 

भारत में लोकतंत्र का प्राचीन इतिहास
 
विश्व के विभिन्न राज्यों में राजतंत्र, श्रेणी तंत्र, अधिनायक तंत्र व लोकतंत्र आदि शासन प्रणालियां प्रचलित रही हैं। ऐतिहासिक दृष्टि से अवलोकन करें तो भारत में लोकतंत्रात्मक शासन प्रणाली का आरंभ पूर्व वैदिक काल से ही हो गया था। प्राचीनकाल में भारत में सुदृढ़ लोकतांत्रिक व्यवस्था विद्यमान थी। इसके साक्ष्य हमें प्राचीन साहित्य, सिक्कों और अभिलेखों से प्राप्त होते हैं। विदेशी यात्रियों एवं विद्वानों के वर्णन में भी इस बात के प्रमाण हैं।

वर्तमान संसद की तरह ही प्राचीन समय में परिषदों का निर्माण किया गया था, जो वर्तमान संसदीय प्रणाली से मिलती-जुलती थी। गणराज्य या संघ की नीतियों का संचालन इन्हीं परिषदों द्वारा होता था। इसके सदस्यों की संख्या विशाल थी। उस समय के सबसे प्रसिद्ध गणराज्य लिच्छवि की केंद्रीय परिषद में 7,707 सदस्य थे वहीं यौधेय की केंद्रीय परिषद के 5,000 सदस्य थे। वर्तमान संसदीय सत्र की तरह ही परिषदों के अधिवेशन नियमित रूप से होते थे।
 
प्राचीन गणतांत्रिक व्यवस्था में आजकल की तरह ही शासक एवं शासन के अन्य पदाधिकारियों के लिए निर्वाचन प्रणाली थी। योग्यता एवं गुणों के आधार पर इनके चुनाव की प्रक्रिया आज के दौर से थोड़ी भिन्न जरूर थी। सभी नागरिकों को वोट देने का अधिकार नहीं था। ऋग्वेद तथा कौटिल्य साहित्य ने चुनाव पद्धति की पुष्टि की है, परंतु उन्होंने वोट देने के अधिकार पर रोशनी नहीं डाली है। 
 
लोकतंत्र के उद्देश्य
 
(i) राज्य की संस्थाएं और संरचनाएं, राजनीतिक प्रतियोगिता को बढ़ावा देना, राजनीतिक शक्ति का आधार खुली प्रतियोगिता हो, व्यक्तियों के राजनीतिक अधिकारों को संरक्षण मिले। 
(ii) व्यक्तियों तथा विविध समूहों की व्यवस्था में अर्थपूर्ण भागीदारी। 
(iii) राजनीतिक व्यवस्था के अंतर्गत कानून का शासन, नागरिक स्वतंत्रताएं, नागरिक अधिकार आदि की गारंटी उपलब्ध कराई जाए। 
(iv) नीति-निर्माण संस्थाओं में खुली भर्ती की प्रक्रिया को अपनाना। 
(v) राजनीतिक सहभागिता के लिए नियमन किया जाए। 
(vi) राजनीतिक सत्ता के लिए प्रतियोगिता को बढ़ावा दिया जाए। 
 
भारतीय लोकतंत्र के उद्देश्य
 
भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। भारत में लोकतंत्र तब आया, जब 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ। यह संविधान विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है। संविधान में लोकतंत्र की संपूर्ण व्याख्या की गई है। लोकतंत्र के कुछ मौलिक उद्देश्य एवं विशेषताएं निम्न हैं। 
 
(1) जनता की संपूर्ण और सर्वोच्च भागीदारी, (2) उत्तरदायी सरकार, (3) जनता के अधिकारों एवं स्वतंत्रता की हिफाजत सरकार का कर्तव्य होना, (4) सीमित तथा सांविधानिक सरकार, (5) भारत को एक लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने, सभी नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता और न्याय का वादा, (6) निष्पक्ष तथा आवधिक चुनाव, (7) वयस्क मताधिकार, (8) सरकार के निर्णयों में सलाह, दबाव तथा जनमत द्वारा जनता का हिस्सा, (9) जनता के द्वारा चुनी हुई प्रतिनिधि सरकार, (10) निष्पक्ष न्यायालय, (11) कानून का शासन, (12) विभिन्न राजनीतिक दलों तथा दबाव समूहों की उपस्थिति, (13) सरकार के हाथ में राजनीतिक शक्ति जनता की अमानत के रूप में।
 
 

भारतीय लोकतंत्र की उपलब्धियां
 
भारत विश्‍व की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है जिसमें बहुरंगी विविधता और समृद्ध सांस्‍कृतिक विरासत है। इसके साथ ही यह अपने आपको बदलते समय के साथ ढालती भी आई है। आजादी पाने के बाद पिछले 69 वर्षों में भारत ने बहुआयामी सामाजिक और आर्थिक प्रगति की है।

भारत कृषि में आत्‍मनिर्भर बन चुका है और अब दुनिया के सबसे औद्योगीकृत देशों की श्रेणी में भी इसकी गिनती की जाती है। इन 69 सालों में भारत ने विश्व समुदाय के बीच एक आत्मनिर्भर, सक्षम और स्वाभिमानी देश के रूप में अपनी जगह बनाई है। सभी समस्याओं के बावजूद अपने लोकतंत्र के कारण वह तीसरी दुनिया के अन्य देशों के लिए एक मिसाल बना रहा है। उसकी आर्थिक प्रगति और विकास दर भी अन्य विकासशील देशों के लिए प्रेरक तत्व बने हुए हैं। 
 
हम दुनिया में एकमात्र राष्ट्र हैं जिसने हर वयस्क नागरिक को स्वतंत्रता पहले दिन से ही मतदान का अधिकार दिया है। अमेरिका जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़े लोकतंत्र है, ने स्वतंत्रता के 150 से अधिक वर्षों बाद इस अधिकार को अपने नागरिकों को दिया। 560 छोटे रियासतों का भारत संघ में (विलय) हुआ। किसी भी एक देश में बोली जाने वाली भाषाओं की सबसे अधिक संख्या भारत में है। करीब 29 भाषाएं पूरे भारत में बोली जाती हैं। करीब 1,650 बोलियां भारत के लोग बोलते हैं। एक दलित द्वारा तैयार संविधान भारत में है। जातीय समूहों की सबसे अधिक संख्या भारत में है। 
 
दुनिया में सबसे ज्यादा निर्वाचित व्यक्तियों (1 लाख) की संख्या भारत में है। धन्यवाद पंचायती राज। निर्वाचित महिलाओं (पंचायतों आदि) की संख्या सबसे अधिक। स्वदेशी परमाणु तकनीक विकसित की व दुनिया का बहिष्कार झेला। सबसे कम लागत की परमाणु ऊर्जा ($: 1,700 किलोवॉट प्रति) उत्पन्न करने वाला देश भारत है। थोरियम आधारित परमाणु ऊर्जा विकसित करने वाला एकमात्र देश भारत है।
 
अंतरिक्ष में वाणिज्यिक उपग्रह सबसे कम कीमत में लांच करने वाला देश भारत है। परमाणु पनडुब्बी लांच करने वाले 5 देशों में से 1 भारत है। चांद और मंगल पर मानवरहित मिशन भेजने वाले 5 देशों में से एक भारत है। एल्युमीनियम, सीमेंट, उर्वरक एवं इस्पात का सबसे कम लागत निर्माता भारत है। सबसे बड़ा तांबा स्मेल्टर। वायरलैस टेलीफोनी का सबसे कम लागत वितरण भारत में है। सबसे तेजी से बढ़ते दूरसंचार बाजार। दुनिया के सबसे कम लागत का सुपर कम्प्यूटर। 
 
निम्नतम लागत वाली कार (नैनो)। दुनिया के दोपहिया वाहनों का सबसे बड़ा उत्पादक। सबसे कम लागत व उच्च गुणवत्ता वाली नेत्र शल्य चिकित्सा। दैनिक मोतियाबिंद ऑपरेशन की रिकॉर्ड संख्या, ब्रिटेन के 1 प्रतिशत कीमत पर। सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी की क्षमता लगभग 70m टन। सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश (100 मीटरिक टन)। मक्खन का सबसे बड़ा उत्पादक। विश्व की सबसे बड़ी दुग्ध सहकारी संस्था (2.6 लाख सदस्य) भारत में। दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता। चीनी का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक। तीसरा कपास का सबसे बड़ा उत्पादक। सोने का सबसे बड़ा आयातक (700 टन)। सोने का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। संसाधित सभी हीरे का 43.90 प्रतिशत भारत उत्पादक है। तीसरा (लेन-देन की संख्या से) के सबसे बड़ा शेयर बाजार।
 
डाकघरों की सबसे बड़ी संख्या (1.5 लाख)। ​​बैंक खाताधारकों की संख्या सबसे अधिक। कृषि भूखंडधारकों (100 करोड़) की संख्या सबसे अधिक। गैर निवासियों (52 अरब $) से सबसे बड़ा आवक विप्रेषण रिसीवर। सबसे बड़ा अंतरदेश प्रेषण।
 
दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है। सबसे बड़ा एकल नियोक्ता भारतीय रेल (1.5 करोड़ डॉलर)। दैनिक रेलयात्रियों की संख्या सबसे ज्यादा। विश्व का दूसरा सबसे बड़ा हवाई अड्डा (दिल्ली)। भारत की मिड डे मील योजना दुनिया का सबसे बड़ा भोजन कार्यक्रम है। राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम दुनिया में सबसे बड़ा रोजगार देने वाला कार्यक्रम है।
 
भारत की सामरि‍क क्षमता में एक और शक्‍ति इस वर्ष जोड़ी गई जि‍सका नाम है- 'अरि‍हंत'। भारत इस परियोजना पर करीब 2 दशक से काम कर रहा है। भारतीय वैज्ञानि‍कों के अथक प्रयासों से भारत की नौसेना में इस अत्‍याधुनि‍क शस्‍त्र को शामि‍ल कि‍या गया जि‍सके जरि‍ए आज भारत हर तरह की सामरि‍क चुनौती का सामना करने में सक्षम है।
 
स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव एक अच्छे लोकतंत्र की स्थापना की कुंजी है। जैसा कि उच्चतम न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एमएन वेंकटाचलैया पुस्तक की प्रस्तावना में लिखते हैं, 'एक अदना सा व्यक्ति एक अदने से बूथ तक चलने और एक अदने से कागज के टुकड़े पर पेंसिल से एक अदना सा निशान बनाकर राजनीतिक क्रांति का अग्रदूत साबित हो सकता है। भारत अपनी चुनाव प्रणाली पर निश्चित रूप से गर्व कर सकता है जिसने इस क्षेत्र के कई अन्य देशों के विपरीत सत्ता के समयबद्ध और निर्बाध हस्तांतरण का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।'
 
आजादी के 70 साल बाद और भारत की 1 अरब से अधिक जनसंख्या होने के बाद भी यह दावा करना मुश्किल है कि भारत सचमुच एक लोकतांत्रिक देश है। यह सच है कि इसने हर क्षेत्र में कई उपलब्धियां हासिल की हैं, फिर भी जब भूख से बेहाल आंसुओं से लबालब चेहरे नव धनाढ्यों की ओर घूरते हैं तो हम सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि हम आज कहां खड़े हैं? जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा आज भी विकास की मुख्य धारा से बाहर है। 
 
रामचन्द्र गुहा अपनी पुस्तक इंडिया आफ्टर गांधी (पिकाडोर, 2007) में जवाब देते हैं- 'जवाब है फिप्टी-फिप्टी (50:50)।' जब चुनाव कराने और आंदोलन व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की अनुमति की बात आती है, तब यह बात लागू होती है। लेकिन जब राजनेताओं और राजनीतिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली की बात आती है तो ये लागू नहीं होती है। लोकतंत्र की खामियां, विशेष रूप से इसके संचालन में, 'अनिवार्य रूप से इसकी संरचना में नहीं पाई जाती हैं।' अक्सर ये खामियां इसको चलाने वाले लोगों के चरित्र और कार्यप्रणाली में होती हैं। 
 
इतनी उपलब्धियों के बाद भी स्वतंत्रता हासिल करने पर जिन उच्च आदर्शों की स्थापना हमें इस देश व समाज में करनी चाहिए थी, हम आज ठीक उनकी विपरीत दिशा में जा रहे हैं और भ्रष्टाचार, दहेज, मानवीय घृणा, हिंसा, अश्लीलता और कामुकता जैसे कि हमारी राष्ट्रीय विशेषताएं बनती जा रही हैं।
 
समाज में ग्रामों से नगरों की ओर पलायन की तथा एकल परिवारों की स्थापना की प्रवृत्ति पनप रही है। इसके कारण संयुक्त परिवारों का विघटन प्रारंभ हुआ। उसके कारण सामाजिक मूल्यों को भीषण क्षति पहुंच रही है। दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि संयुक्त परिवारों को तोड़कर हम सामाजिक अनुशासन से निरंतर उच्छृंखलता और उद्दंडता की ओर बढ़ते चले जा रहे हैं। इन 69 वर्षों में हमने सामान्य लोकतंत्रीय आचरण भी नहीं सीखा है। 
 
देश में बदलाव की बयार तो बह रही है। महसूस कौन कितना कर पा रहा है, यह दीगर बात है। सूचना प्रवाह के इस युग में हम समूची दुनिया से जुड़ चुके हैं। भारत देश में हर जगह, हर वर्ग एवं स्तर बदलाव की अनुभूति कर रहा है। लेकिन इस बदलाव की बहार के बीच यह बुनियादी सवाल उठाए जाने की जरूरत है कि हम जिस सम्प्रभु, समाजवादी जनवादी (लोकतांत्रिक) गणराज्य में जी रहे हैं वह सही दिशा में अग्रसर है। 
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