पृथ्वी और पर्यावरण पर कविता: काश प्रकृति भी बोल पाती
सुशील कुमार शर्मा | सोमवार,जून 1,2026
Poem on Environment : काश पेड़ चीख पाते तो शायद कुल्हाड़ियों की धार इतनी निर्दयी न होती वे कहते यह धूप केवल तुम्हारी ...
लोकतंत्री कॉकरोच
सुशील कुमार शर्मा | गुरुवार,मई 28,2026
तीन दिन के भीतर 'कॉकरोच जनता पार्टी' नाम से एक फेसबुक पेज बन गया और देखते ही देखते उस पर बारह मिलियन लाइक आ गए। यह ...
बाल कविता: टप्पा टप्पा टुन टुन
सुशील कुमार शर्मा | शुक्रवार,मई 22,2026
टप्पा टप्पा टुन टुन। सुबह सुनहरी गुनगुन। चिड़िया दाना चुनचुन। मुन्नी हंसती खुनखुन। टप्पा टप्पा टुन टुन। सूरज निकला सुन ...
ध्यान पर दोहे: भटके पथ से लौटकर, मन पाए विश्राम
सुशील कुमार शर्मा | सोमवार,मई 4,2026
मन चंचल घोड़े सदिश, खींचे ध्यान लगाम। भटके पथ से लौटकर, मन पाए विश्राम।। शब्द भाव जब सब थमें, भीतर बहे प्रकाश। ध्यान ...
नवगीत: कांच हुए सब रिश्ते-नाते
सुशील कुमार शर्मा | गुरुवार,अप्रैल 23,2026
कांच हुए सब रिश्ते-नाते, मन भी टूट भरे। भीतर-भीतर सन्नाटे अब,
मन में खटक रहे। शहरों की इस भीड़ में रिश्ते, खूंटी लटक ...
हिन्दी कविता: पृथ्वी की पुकार
सुशील कुमार शर्मा | बुधवार,अप्रैल 22,2026
समय की अनंत धारा में पृथ्वी अब भी शांत नहीं है वह बोल रही है अपनी दरकती मिट्टी की लकीरों में सूखते जलस्रोतों की निस्पंद ...
परीक्षा, तनाव और विद्यार्थी : दबाव के बीच संतुलन की राह
सुशील कुमार शर्मा | सोमवार,अप्रैल 13,2026
परीक्षा, तनाव और वितनाव कोई शत्रु नहीं है। थोड़ी मात्रा में तनाव हमें सजग बनाता है, पर जब वह डर में बदल जाए, तब समस्या ...
एक सामयिक व्यंग्य: विश्वशांति का महायुद्ध
सुशील कुमार शर्मा | बुधवार,अप्रैल 8,2026
Iran and America War: ईरान और अमेरिका के बीच चल रही तनातनी को देखिए। दोनों ही पक्ष अत्यंत गंभीर, जिम्मेदार और ...
प्रेम कविता: जिनके लिए
सुशील कुमार शर्मा | सोमवार,अप्रैल 6,2026
जिनके लिए देर तक रुका रहा मैं अपने ही समय की देहरी पर अपनी धड़कनों को धीरे धीरे समझाता हुआ और वे समय की सटीकता ओढ़े ...
श्री हनुमंत स्तवन: अतुल्य शक्ति
सुशील कुमार शर्मा | गुरुवार,अप्रैल 2,2026
अतुल्य शक्ति पुंज रूप राज देव रंजनं, प्रचंड वेग वायु पुत्र शत्रु सैन्य भंजनं। सुवर्ण शैल काय दीप्ति भाल चंद्र सोहने, ...

