सीता परित्याग पर दोहे
सुशील कुमार शर्मा | बुधवार,मार्च 11,2026
सन्नाटे में थी सभा, सम्मुख खड़ा समाज। कठिन घड़ी थी राम को, चुनना धर्म-जहाज॥ धोबी तो बस नाम था, संशय था चहुं ओर। मर्यादा ...
सामयिक व्यंग्य: होली के शूरवीर
सुशील कुमार शर्मा | शनिवार,मार्च 7,2026
होली साल का वो इकलौता दिन है जब इंसान स्वेच्छा से बंदर बनने के लिए तैयार होता है। सुबह-सुबह आप नहा-धोकर, क्रीम लगाकर ...
विश्व नारी दिवस पर कविता: नारी, सृष्टि की अजस्र धारा
सुशील कुमार शर्मा | शनिवार,मार्च 7,2026
जब सृष्टि की प्रथम भोर अभी पूर्णत: खुली भी नहीं थी जब पृथ्वी की निस्तब्ध मिट्टी में जीवन की हल्की हलचल भर उठी थी तभी ...
बहुआयामी कविताएं
सुशील कुमार शर्मा | सोमवार,फ़रवरी 23,2026
कविताएं केवल शब्दों का अनुशासन नहीं होतीं वे चेतना की वह खुली खिड़की होती हैं जहां से समय, समाज और आत्मा एक साथ झांकते ...
होली पर लघुकथा: स्मृति के रंग
सुशील कुमार शर्मा | शनिवार,फ़रवरी 21,2026
होली की सुबह थी। आंगन में धूप ऐसे उतर आई थी मानो आकाश ने स्वयं गुलाल ओढ़ लिया हो। गली के बच्चे रंग और पिचकारियों के साथ ...
नवगीत: सुलग रहा है मन के भीतर
सुशील कुमार शर्मा | शुक्रवार,फ़रवरी 20,2026
सुलग रहा है मन के भीतर घाव पुराना किसे दिखाएं। होंठों पर आकर बैठी है गुमसुम तन्हाई। विस्मित सा मन रिश्ते सूखे। लुक्का ...
प्रेम, आत्म-विलय से वैश्विक चेतना तक का महाप्रस्थान
सुशील कुमार शर्मा | बुधवार,फ़रवरी 11,2026
वेलेंटाइन डे पर विशेष आलेख: अक्सर हम प्रेम को अपेक्षा का पर्याय मान लेते हैं। हम अपेक्षा करते हैं कि प्रिय हमारे अनुरूप ...
कहानी: प्रेम सम्मान
सुशील कुमार शर्मा | शुक्रवार,फ़रवरी 6,2026
वैदेही, जिनके नाम में ही विदेह की गरिमा और जानकी की पीड़ा समाहित थी। वे केवल एक अध्यापिका नहीं थीं, वे इस धूल भरे कस्बे ...
प्रेरक कविता: तुम कमजोर नहीं हो
सुशील कुमार शर्मा | बुधवार,फ़रवरी 4,2026
मैं जानता हूं सोने की देहलीज के भीतर कितनी काली रातें बसती हैं जहां धन की चकाचौंध में मानवता सबसे पहले मरती है तुम्हारा ...
लघुकथा: वो पांच मिनट
सुशील कुमार शर्मा | मंगलवार,फ़रवरी 3,2026
आज समर सिंह के छोटे भाई का तिलक था। पूरा घर मेहमानों से खचाखच भरा था। आंगन में हलवाई कढ़ाई चढ़ाए बैठा था और भीतर के ...

