प्रेम, आत्म-विलय से वैश्विक चेतना तक का महाप्रस्थान
सुशील कुमार शर्मा | बुधवार,फ़रवरी 11,2026
वेलेंटाइन डे पर विशेष आलेख: अक्सर हम प्रेम को अपेक्षा का पर्याय मान लेते हैं। हम अपेक्षा करते हैं कि प्रिय हमारे अनुरूप ...
कहानी: प्रेम सम्मान
सुशील कुमार शर्मा | शुक्रवार,फ़रवरी 6,2026
वैदेही, जिनके नाम में ही विदेह की गरिमा और जानकी की पीड़ा समाहित थी। वे केवल एक अध्यापिका नहीं थीं, वे इस धूल भरे कस्बे ...
प्रेरक कविता: तुम कमजोर नहीं हो
सुशील कुमार शर्मा | बुधवार,फ़रवरी 4,2026
मैं जानता हूं सोने की देहलीज के भीतर कितनी काली रातें बसती हैं जहां धन की चकाचौंध में मानवता सबसे पहले मरती है तुम्हारा ...
लघुकथा: वो पांच मिनट
सुशील कुमार शर्मा | मंगलवार,फ़रवरी 3,2026
आज समर सिंह के छोटे भाई का तिलक था। पूरा घर मेहमानों से खचाखच भरा था। आंगन में हलवाई कढ़ाई चढ़ाए बैठा था और भीतर के ...
हिन्दी कविता: सवर्ण हैं हम
सुशील कुमार शर्मा | शुक्रवार,जनवरी 30,2026
सवर्ण हैं हम पर किसी सिंहासन पर बैठे हुए नहीं हम भी उसी मिट्टी से बने हैं जिससे पसीने की गंध आती है जिसमें इतिहास की ...
नर्मदा की अनंत धारा: एक विद्धत चेतना का आह्वान
सुशील कुमार शर्मा | शनिवार,जनवरी 24,2026
नर्मदा का प्रचलित पुराणिक रूप हमें यह बताता है कि उसके दर्शन मात्र से ही पापों के तिरोहित हो जाने का फल प्राप्त होता ...
वसंत पंचमी पर मां शारदे की आराधना के दोहे
सुशील कुमार शर्मा | गुरुवार,जनवरी 22,2026
वीणा के मधु नाद से, जागे अंतःलोक। मां शारद करुणा मयी, हर लो अज्ञान शोक। हंसवाहिनी मातु तुम, वाणी की आधार। अक्षर अक्षर ...
परीक्षा, तनाव और विद्यार्थी : दबाव के बीच संतुलन की राह
सुशील कुमार शर्मा | मंगलवार,जनवरी 20,2026
परीक्षा, तनाव और वितनाव कोई शत्रु नहीं है। थोड़ी मात्रा में तनाव हमें सजग बनाता है, पर जब वह डर में बदल जाए, तब समस्या ...
ठंड पर दोहे: आंगन में जलने लगा
सुशील कुमार शर्मा | शुक्रवार,जनवरी 16,2026
कुहरे की चादर तनी, सिमटी धूप उदास। तन मन सब ठंडा हुआ, थर थर कांपे श्वास। आंगन में जलने लगा, किस्सों भरा अलाव। ठंड सिखाए ...
हिन्दी कविता: साक्षी भाव
सुशील कुमार शर्मा | सोमवार,दिसंबर 22,2025
तुम्हारे प्रश्न, प्रश्न नहीं भीतर जलते दीप हैं, जो अंधेरे से नहीं अज्ञान से लड़ रहे हैं, भीड़ में खड़े होकर अकेले ...

