कोरोनाकाल में 'जीवनदायिनी' बनीं भारतीय रेलवे, 1 लाख कर्मचारी हुए कोरोना के शिकार, 2000 ने गंवाई जान

Last Updated: सोमवार, 10 मई 2021 (21:48 IST)
नई दिल्ली। कोविड-19 महामारी के बीच का रिकॉर्ड बनाने और चलाकर लाखों लोगों का जीवन बचाने वाली भारतीय रेलवे के करीब 1 लाख कर्मचारी कोरोना के संक्रमण का शिकार हो चुके हैं और इनमें से लगभग दो हजार लोगों ने अपनी जान गंवाई है।
रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सुनीत शर्मा ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में एक सवाल के जवाब में कहा कि कोविड-19 महामारी शुरू होने के बाद से अब तक रेलवे के 1952 कर्मचारियों ने जान गंवाई है। उन्होंने कहा कि रेलवे के अस्पतालों में करीब चार हजार कर्मचारी इस समय भर्ती हैं। उन्होंने कहा कि रेलवे किसी अन्य राज्य या क्षेत्र से अलग नहीं है और हम भी कोविड के मामले झेल रहे हैं। हम परिवहन का काम करते हैं और सामान व लोगों को लाते और ले जाते हैं। रोजाना करीब 1000 (कोविड) मामले सामने आ रहे हैं।
रेलवे की यूनियन द्वारा कोरोना से प्रभावित कर्मचारियों की संख्या एक लाख बताए जाने का उल्लेख करने पर शर्मा ने कहा कि मार्च 2020 के बाद से कोरोना से संक्रमित होने वालों की कुल संख्या इतनी ही है। उन्होंने यह भी माना कि करीब 65 हजार लोग ठीक हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि कोविड से ठीक होने वालों का अनुपात 98 प्रतिशत से अधिक है।

13 लाख कर्मचारी : रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष सुनीत शर्मा ने कहा कि रेलवे न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा नियोक्ता है, जिसमें 13 लाख कर्मचारी काम करते हैं।
हमारे अपने अस्पताल हैं…हमने बिस्तरों की संख्या बढ़ाई है, रेल अस्पातलों में ऑक्सीजन संयंत्र बनाए हैं। हम अपने कर्मियों का ध्यान रखते हैं। फिलहाल 4000 रेलवे कर्मी या उनके परिवार के सदस्य इन अस्पतालों में भर्ती हैं। हमारा प्रयास यह है कि वे जल्दी ठीक हों।

मुआवजे बढ़ाने के लिए पत्र : ऑल इंडिया रेलवेमेन्स फेडरेशन नाम के एक रेलकर्मियों के संघ ने कुछ दिनों पहले रेल मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर मांग की थी कि संकट के दौरान काम करते हुए जान गंवाने वाले रेलकर्मियों के परिजनों को अंग्रिम पंक्ति के कर्मियों की तरह ही मुआवजा दिया जाए। उन्होंने पत्र में कहा कि जैसा कि अग्रिम मोर्चे के कर्मियों के लिये घोषणा की गई है, ये कर्मी भी 50 लाख रुपए के मुआवजे के हकदार हैं, न कि 25 लाख रुपए के जो उन्हें अभी दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि रेलकर्मियों के परिश्रम के कारण भारतीय रेलवे ने माल ढुलाई में रिकॉर्ड कायम किया है। इस वित्त वर्ष के पहले माह अप्रैल में 111.53 टन माल की लदान की है जो एक रिकॉर्ड है। अप्रैल 2019 में रेलवे 101.04 टन माल की ढुलाई की थी। कोविड के बावजूद वित्त वर्ष 2020-21 में रेलवे ने लक्ष्य से अधिक 1232.64 टन मालवहन किया था।

उन्होंने बताया कि भारतीय रेलवे ने 24 अप्रैल के बाद से अब तक 75 ऑक्सीजन एक्सप्रेस के माध्यम से 295 टैंकरों में 4709 टन तरल मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) की आपूर्ति की है। सोमवार को रिकॉर्ड 831 टन एलएमओ की ढुलाई की गई है।
यात्री सेवाओं में कटौती : कोविड महामारी के दूसरी लहर के बीच भारतीय रेलवे ने यात्री सेवाओं में आधी से अधिक कटौती कर दी है। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनीत शर्मा ने कहा कि रेलवे लगातार यात्रियों की जरूरतों पर निगाह रखे हुए है और केवल उन ट्रेनों को अभी बंद किया गया है जिनमें यात्रियों की संख्या काफी कम है। उन्होंने बताया कि इस समय 279 मेल एक्सप्रेस गाड़ियां, 60 हॉलिडे स्पेशल और 263 पैसेंजर स्पेशल गाड़ियों का संचालन किया जा रहा है। इस प्रकार से कुल 602 अंतरनगरीय यात्री सेवाएं संचालित की जा रही है।
उल्लेखनीय है कि कोविड पूर्व की स्थिति में भारतीय रेलवे की कुल अनुमन्य यात्री सेवाओं की संख्या 2906 है जबकि प्रतिदिन औसतन 1768 गाड़ियों का परिचालन होता है। कोविड काल में अप्रैल मध्य तक भारतीय रेलवे कुल 1514 यात्री सेवाओं का परिचालन कर रही थी और प्रतिदिन औसत 1182 गाड़ियां चलाई जा रही थीं, लेकिन कोरोना का प्रकोप बढ़ने के बाद यात्रियों की संख्या में काफी कमी आई।

इसे देखते हुए विभिन्न जोनल रेलवे मुख्यालयों में कम बुकिंग वाली यात्री सेवाओं को बंद करने का निर्णय लिया गया। शर्मा ने कहा कि यह संख्या दिन-प्रतिदिन बदलने वाली संख्या है। यदि किसी मार्ग पर यात्रियों की संख्या अधिक है और प्रतीक्षा सूची लंबी है तो अतिरिक्त गाड़ी चला कर उन्हें गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था की गयी है। (वार्ता)



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