समय रैना समेत 5 कॉमेडियन्स को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, दिव्यांगों पर विवादित टिप्पणी का केस हुआ रद्द
कॉमेडियन समय रैना और चार अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांगों और दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित लोगों पर की गई विवादित टिप्पणियों के मामले में समय रैना समेत पांच कॉमेडियन्स के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही और एफआईआर को रद्द कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सिर्फ राहत देने के लिए नहीं, बल्कि कॉमेडियन्स द्वारा अपनी गलती में सुधार करने और दिव्यांग समुदाय के समर्थन में उठाए गए सकारात्मक कदमों को देखते हुए सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने जिन पांच प्रमुख हस्तियों के खिलाफ केस को बंद करने का आदेश दिया है, उनमें समय रैना, विपुल गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोनाली ठक्कर और निशांत जगदीश तंवर शामिल है।
क्या था पूरा मामला?
इन सभी कॉमेडियन्स पर अपने शोज और वीडियोज के दौरान दिव्यांगों का मजाक उड़ाने का आरोप था। स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी और अन्य दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे लोगों के हक में काम करने वाली संस्था 'M/s SMA क्योर फाउंडेशन' ने इन बयानों पर आपत्ति जताते हुए कानूनी शिकायत दर्ज कराई थी।
इसके बाद मामला देश की सर्वोच्च अदालत पहुंचा, जहां कानून के सख्त रवैये के साथ-साथ समाज में बदलाव की एक अनोखी पहल देखने को मिली। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सिर्फ दंडात्मक कार्रवाई करने के बजाय इन्फ्लुएंसर्स को समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने का मौका दिया। पीठ ने कॉमेडियन्स से कहा कि वे अपनी लोकप्रियता का इस्तेमाल दिव्यांगों के प्रति जागरुकता फैलाने और उनके सशक्तीकरण के लिए करें।
कोर्ट के इस सुझाव के बाद समय रैना और अन्य कॉमेडियन्स ने रचनात्मक कदम उठाए। कॉमेडियन्स ने विशेष रूप से सक्षम लोगों के लिए एक चेस टूर्नामेंट आयोजित किया। दिव्यांगजनों और दुर्लभ बीमारियों के लिए काम करने वाले संगठनों के बारे में लोगों के बीच जागरुकता बढ़ाई। सभी ने शिकायतकर्ता संस्था 'SMA क्योर फाउंडेशन' के साथ मिलकर सकारात्मक काम करने की कोशिश की।
मामले की सुनवाई कर रही चीफ जस्टिस सूर्याकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कॉमेडियन्स की इन कोशिशों को सराहा। पीठ ने कहा, जब वास्तविक और ईमानदार प्रयास किए जाते हैं, तो सकारात्मक परिणाम आने ही हैं। ये बहुत ही होनहार और उज्ज्वल युवा हैं। यदि उन्होंने सही और सकारात्मक दिशा में कदम बढ़ाए हैं, तो इसका समाज पर अच्छा प्रभाव पड़ेगा।
SMA क्योर फाउंडेशन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने भी कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद इन्फ्लुएंसर्स ने वाकई अपनी गलती सुधारी है और वे फाउंडेशन के साथ मिलकर रचनात्मक तरीके से जुड़ने का प्रयास कर रहे हैं।

