आर्सेनल की इस ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाते हुए रणवीर सिंह ने जो हालिया नोट लिखा है, उसमें एक बेहद गहरी और छिपी हुई बात नजर आती है। ऊपर-ऊपर से देखने पर तो यह किसी फुटबॉल फैन के दिल की वो सच्ची और जज्बाती आवाज लगती है, जो दशकों के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार अपनी टीम को जीतते हुए देख रहा है।
लेकिन फुटबॉल के इन रेफरेन्सेज और पुरानी यादों के पीछे कुछ बेहद पर्सनल छुपा है, यह उस माइंडसेट की एक अनोखी झलक दिखाता है जिसने खुद रणवीर सिंह के इस असाधारण सफर को गढ़ा है, जहां वो आज देश के सबसे बड़े स्टार बनकर खड़े हैं।
अपनी स्टोरी पर रणवीर सिंह ने लिखा, आर्सेनल कोई ऐसा परिवार नहीं है जिसमें मैं पैदा हुआ हूं। यह एक ऐसा परिवार है जिसे मैंने खुद चुना है। साल 2001 में, जब मैं 16 साल का था, तब आर्सेन वेंगर की 'इंविनसिबल्स' टीम को इस खूबसूरत खेल को अपने सबसे बेहतरीन और शानदार अंदाज में खेलते हुए देखकर मैं उनका ऐसा दीवाना हुआ कि जिंदगी भर के लिए आर्सेनल का फैन बन गया।
उन्होंने लिखा, और मेरा वो फैसला बिल्कुल सही था। क्या स्टाइल था, क्या स्वैग था, क्या कमाल का क्लब था! फिर वक्त बदला। किस्मत का पहिया ऐसा घूमा कि एक बहुत ही मुश्किल और बेरहम दौर की शुरुआत हुई। लेकिन आज, 22 साल के लंबे और कड़े संघर्ष, नफरत, मजाक और मायूसी के बाद, आर्सेनल फुटबॉल क्लब ने अपना गौरव और सम्मान वापस पा लिया है। यह सदियों तक याद रखे जाने वाली एक ऐसी जीत है जहाँ टीम ने खुद को साबित कर दिखाया है।
रणवीर ने आगे लिखा, यह सिर्फ फुटबॉल से कहीं बढ़कर है, यह जिंदगी का एक बड़ा सबक है। अपने रास्ते पर डटे रहो, खुद पर भरोसा रखो, प्रोसेस पर विश्वास रखो, अपनी नीयत साफ रखो और उसे बिना थके कड़ी मेहनत से सींचते रहो, कामयाबी का फल ज़रूर मिलेगा। मुश्किल वक्त में आपकी वफादारी और डटे रहने की काबिलियत ही सबसे ज़्यादा मायने रखती है।
उन्होंने लिखा, 'सुपर मिक' (मैनेजर मिकेल अर्टेटा) की इस युवा गनर्स (Gunners) टीम ने क्या शानदार और ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। खेल के इतिहास का एक कभी न भूलने वाला अध्याय। आर्सेनल हमेशा अमर रहे। #COYG”
एक ऐसे समय में जब रणवीर सिंह देश के सबसे बड़े सुपरस्टार के रूप में मजबूती से खड़े हैं, खासकर 'धुरंधर' की बंपर सफलता और हर तरफ छा जाने वाले क्रेज के बाद, इस एक्टर के शब्द अनजाने में ही सही, उनकी अपनी जिंदगी के फलसफे (सोच) को बयां करते हैं। उनका यह मैसेज सिर्फ आर्सेनल की जीत के बारे में नहीं है, यह मुश्किलों से लड़कर डटे रहने के बारे में है।
जो बात इस नोट को सबसे ज़्यादा दमदार और खास बनाती है, वो है उनकी लिखी यह लाइन जहाँ वो फुटबॉल को "जिंदगी का एक सबक" बताते हैं। कई मायनों में, यह एक सेंटेंस रणवीर सिंह को किसी भी इंटरव्यू से कहीं बेहतर तरीके से समझाता है। जिन वैल्यूज पर उन्होंने यहाँ जोर दिया है, वो अचानक उनकी अपनी जिंदगी की कहानी जैसी लगने लगती हैं।