शम्मी कपूर का सफर था सुहाना, आमिर खान लेने जाते थे आशीर्वाद

समय ताम्रकर| पुनः संशोधित गुरुवार, 13 अगस्त 2020 (18:50 IST)
जिस तरह से दूसरा दिलीप कुमार, राज कपूर या अमिताभ बच्चन अब तक को नहीं मिल पाया है, उसी तरह के बाद हमें उनके जैसा कलाकार देखने को शायद ही मिले।
शम्मी कपूर की खासियत थी उनका डांस। पहले फिल्म इंडस्ट्री में इतने कोरियोग्राफर नहीं हुआ करते थे। क्लासिकल डांस की बात हो तभी कलाकार डांस सीखते थे। इसलिए शम्मी ने अपना डांस स्टाइल इजाद किया। बेहद तेजी से लटके-झटके खाते हुए वे कैमरे के सामने नृत्य करते थे।

कई बार उनकी हड्डियां टूटीं, लेकिन शम्मी को पता था कि उनका डांस ही उन्हें राज-दिलीप-देव की तिकड़ी से अलग करता है, इसलिए नई हीरोइनों के साथ उन्होंने ठुमके लगाते हुए कई म्यूजिकल हिट फिल्में दीं।
शम्मी की फिल्में देखते समय तनाव काफूर हो जाता है। हल्की-फुल्की कहानी, मधुर गाने, हीरो-हीरोइन की रोमांटिक छेड़छाड़, थोड़ा-सा हास्य और अंतिम रीलों में विलेन की पिटाई। इसलिए नसीरुद्दीन शाह और जैसे कलाकार भी शम्मी और उनकी फिल्मों के दीवाने हैं।

पृथ्वीराज कपूर जैसे कलाकार के यहां जन्म लेने से अभिनय के प्रति रुझान होना शम्मी के खून में था। भाई राज कपूर फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना चुके थे। पृथ्‍वीराज थिएटर्स में काम करते हुए शम्मी भी अभिनय की बारीकियां सीख चुके थे और फिल्म लाइन में उतरना चाहते थे।
पृथ्‍वीराज और भाई राज ने कहा कि अपना रास्ता खुद बनाओ। उस वक्त दिलीप कुमार, देव आनंद, राज कपूर की तिकड़ी का राज चलता था। तमाम दिग्गज निर्माता-निर्देशक इन्हीं के साथ फिल्म बनाना पसंद करते थे। युवा शम्मी को बी-ग्रेड के फिल्मकारों ने साइन किया।

रेल का डिब्बा (1953), चोर बाजार (1954), तांगे वाली (1955), डाकू (1955), मिस कोका कोला (1955) जैसी फिल्मों में उन्हें काम मिला। ये सभी फिल्में लाइन से पिटी। पतली-सी पेंसिल मूंछ और अजीब सी हेअर स्टाइल वाले शम्मी को समझ में आ गया कि वे राज कपूर की राह पर चलते हुए कामयाबी हासिल नहीं कर सकते। कुछ अलग करना होगा।
चार-पांच वर्षों में ढेर सारी फ्लॉप फिल्म करने के बाद 1957 में तुमसा नहीं देखा (1957) रिलीज हुई। इस फिल्म में शम्मी ने अभिनय की अलग स्टाइल अपनाई। नृत्यों पर विशेष जोर दिया। जिससे उन्हें रिबेल स्टार कहा जाने लगा।

नासिर हुसैन द्वारा निर्देशित इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा दी। इस फिल्म के बाद नासिर और शम्मी की जोड़ी बन गई और दोनों मिलकर कुछ यादगार फिल्में दी।

नासिर हुसैन फिल्म अभिनेता आमिर खान के अंकल थे और उनके परिवार में शम्मी का नाम इज्जत से लिया जाता है। यही वजह है कि आमिर अपनी फिल्म का मुहूर्त करना हो या म्यूजिक रिलीज, शम्मी कपूर का आशीर्वाद लेने जरूर जाते थे।

तुमसा नहीं देखा के बाद शम्मी की गाड़ी सरपट चल पड़ी। और 1960 से 1970 के बीच उन्होंने अनेक सफल फिल्में दी। जंगली (1961), प्रोफेसर (1962), दिल तेरा दीवाना (1962), चाइना टाउन (1962), ब्लफ मास्टर (1963), कश्मीर की कली (1964), राजकुमार (1964), जानवर (1965), बदतमीज (1966), तीसरी मंजिल (1966), लाट साहेब (1967), एन इवनिंग इन पेरिस (1967), ब्रह्मचारी (1968), प्रिंस (1969), तुमसे अच्छा कौन है (1969) जैसी फिल्में ना केवल सफल रही बल्कि इन फिल्मों में शम्मी का अभिनय और डांस देख लोग उनके दीवाने हो गए। इन फिल्मों के सभी गाने हिट हुए और आज भी सुने जाते हैं।
शम्मी के गानों के सफल होने में गायक मोहम्मद रफी का भी योगदान है। उन्होंने शम्मी के लिए अलग स्टाइल में मौज-मस्ती के साथ गाने गाए हैं। तभी तो 50 वर्ष पहले का याहू आज भी युवा लगता है।

जब शम्मी की उम्र हावी होने लगी। नए सितारों का उदय होने लगा तो उन्होंने गरिमा के साथ चरित्र भूमिका निभाना शुरू कर दी। चरित्र अभिनेता के रूप में भी उन्होंने कई फिल्मों में अपने अभिनय की छाप छोड़ी जिनमें जमीर, मामा भांजा, शालीमार, मीरा, रॉकी, देश प्रेमी, प्रेम रोग, बेताब, हीरो प्रमुख हैं।
जब शम्मी की तबियत खराब रहने लगी तो उन्होंने अभिनय से दूरी बना ली। उन्हें लगभग हर दूसरे दिन अस्पताल में चार-पांच घंटे गुजारना पड़ते थे, लेकिन इसका असर उनकी जिंदादिली पर नहीं पड़ा। 21 अक्टोबर 1931 को जन्मे शम्मी का सफर 14 अगस्त 2011 को थमा, कहा जा सकता है कि उनकी जिंदगी का ये सफर सुहाना था।



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