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बिहार में एक बार फिर नीतीश सरकार, 7वीं बार लेंगे सीएम पद की शपथ

Updated: बुधवार, 11 नवंबर 2020 (08:53 IST)
पटना। बिहार (Bihar) में सत्ता विरोधी लहर और विपक्ष की कड़ी चुनौती को पार करते हुए नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के नेतृत्व वाले राजग ने बिहार में बहुमत का जादुई आंकड़ा हासिल हासिल कर लिया। नीतीश 7वीं बार सीएम पद की शपथ लेंगे।
 
नीतीश ने पहली बार 2000 में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद वे राजद के साथ मिलकर 2005 में मुख्यमंत्री बने थे। 2010 में तीसरी बार नीतीश सीएम बने थे। 22 फरवरी 2015 को वे चौथी बार सीएम बने। नीतीश ने भाजपा के साथ मिलकर एक दशक तक बिहार पर राज किया।
 
नीतीश कुमार ने राजद के साथ मिलकर 5वीं बार 20 नवंबर 2015 को शपथ ली। 2 साल बाद वे फिर भाजपा के साथ आ गए और 27 जुलाई 2017 को उन्होंने छठी बार सीएम पद की शपथ ली।
 
नीतीश बहुमत के साथ भले ही 2005 में सीएम बने लेकिन इससे पहले साल 2000 में भी वो सीएम पद की शपथ ले चुके थे। हालांकि कुछ ही समय बाद उनकी सरकार गिर गई थी।

भाजपा ‍निभाएगी वादा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा प्रमुख जे पी नड्डा समेत राजग पहले ही कुमार को मुख्यमंत्री पद का अपना उम्मीदवार घोषित कर चुका हैं। इसलिए भले ही कुमार की पार्टी का प्रदर्शन गिरा है, कुमार चौथी बार सरकार का नेतृत्व करेंगे।
 
जद(यू) को चिराग पासवान की लोकतांत्रिक जनता पार्टी (लोजपा) के कारण काफी नुकसान झेलना पड़ा है। लोजपा को एक सीट पर जीत मिली, लेकिन उसने कम से कम 30 सीटों पर जदयू को नुकसान पहुंचाया।
 
राज्य निर्वाचन कार्यालय के अनुसार, मतगणना की समाप्ति के बाद भाजपा को 74, जदयू को 43, हम और वीआईपी को 4-4 सीटें मिली हैं। इस तरह 243 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिए जरूरी ‘जादुई आंकड़ा’ 122 को पार करते हुए NDA ने 125 सीटें हासिल कर ली है।
 
इस तरह हुई नुकसान की भरपाई: जदयू को इस बार के विधानसभा चुनाव में 28 सीट का नुकसान उठाना पड़ा है। पिछले चुनाव में उसकी सीटों की संख्या 71 थी। चुनाव में भाजपा को 21, वीआईपी को चार और हम को तीन सीट का लाभ हुआ है। वहीं, तेजस्वी प्रसाद यादव की अगुवाई वाले महागठबंधन जो सुबह मतगणना के शुरुआती दौर में सरकार बनाते दिख रहा था उसे 110 सीट से ही संतोष करना पड़ा।
 
राजद सबसे बड़ा दल:  हालांकि महागठबंधन के मुख्य घटक राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के लिए संतोष की बात सिर्फ यही रही कि वह 75 सीट जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरा है। बावजूद इसके उसे वर्ष 2015 के पिछले विधानसभा में 80 सीट मिली थी। महागठबंधन के अन्य घटक कांग्रेस की भी इस बार पिछले चुनाव से आठ सीटें कम हुई है और उसे मात्र 19 सीट पर संतोष करना पड़ा।
 
महागठबंधन में शामिल हुए वामदलों को भी काफी लाभ मिला। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी-लेनिनवादी (भाकपा-माले) पिछले चुनाव की अपनी सीट संख्या तीन को बढ़ाकर 12 करने में कामयाब रही। वहीं, पिछले चुनाव में विधानसभा चुनाव में शून्य पर आउट हुई भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) दो-दो सीट जीत गईं।
 
इसी तरह ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने 5 सीट, बहुजन समाज पार्टी (BSP), लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) और निर्दलीय ने एक-एक सीट पर जीत हासिल की।

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