पेशे से अधिवक्ता विजय सिंह चौहान विधि एवं साहित्य जगत से संबद्ध संवेदनशील रचनाकार हैं। एमकॉम, एलएलबी एवं बीजे कॉम (पत्रकारिता) की शैक्षणिक योग्यता से समृद्ध चौहान विधि के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने साहित्य को मानवीय संवेदनाओं, जीवन के अनुभवों और सामाजिक सरोकारों की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बनाया है। विशेष रूप से लघुकथा लेखन के क्षेत्र में उनकी सक्रियता उल्लेखनीय है। उनकी रचनाएं जीवन के विविध रंगों, मानवीय संबंधों, सामाजिक विसंगतियों और मनुष्य के अंतर्मन में उठते भावों को अभिव्यक्ति प्रदान करती हैं।
चौहान की प्रमुख कृतियों में संवेदनाओं का आचमन (लघुकथा संग्रह), पत्थर पर बुवाई (लघुकथा संग्रह) और गैरी गैरी छाँव (लघुकथाओं का मालवी अनुवाद) मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी से पुरस्कृत कृति है। चौहान की रचनाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में सतत प्रकाशित होती रहती हैं। आकाशवाणी से वार्ता एवं लघुकथा का प्रसारण। लघुकथाओं का मालवी, निमाड़ी, उड़िया, अंग्रेज़ी, मराठी एवं बांग्ला भाषाओं में अनुवाद एवं प्रकाशन। विधि विषय पर भी सतत लेखन।
पुरस्कार एवं सम्मान : डॉ. एस.एन. तिवारी स्मृति पुरस्कार, इंदौर। लघुकथा श्री, लघुकथा शोध केंद्र, भोपाल (संवेदनाओं का आचमन पर), स्व. सतीश राज पुष्करणा स्मृति सम्मान, संस्था क्षितिज, 2022। साहित्य साधक सम्मान, संस्कृति एवं साहित्य शोध समिति, बालाघाट, 2023। कृति सम्मान, कथा दर्पण साहित्य मंच, इंदौर, 2023। जयपुर साहित्य सम्मान, 2024। क्षितिज लघुकथा रत्न सम्मान, 2025। क्षितिज कृति सम्मान, 2025 — पत्थर पर बुवाई के लिए। शब्द निष्ठा पुरस्कार, अजमेर, 2025।