लघुकथा: वेलेंटाइन डे
सुमन...
'कहां जा रही हो?'
माधुरी ने पूछा तो सुमन ने आईने में खुद को निहारा।
'मॉल… फिर पार्लर,' वह बोली, 'मैनिक्योर, पेडिक्योर, कलर और नेल आर्ट, इस बार डार्क ब्राउन।'
'किसी शादी में?' माधुरी मुस्कराई।
'नहीं,' सुमन हंसी,
'बस फाल्गुन है, बसंती बयार है… और वेलेंटाइन डे भी।'
'तो कौन है वो ख़ास?'
माधुरी की चुटकी में शरारत छुपी थी।
सुमन ने झूलती लट को कान के पीछे खोंसा। आईने में अब वह किसी और को नहीं, खुद को देख रही थी।
कई रिश्ते, कई समझौते, इंतजार… सब पीछे छूट चुके थे।
Edited BY: Raajshri Kasliwal