देशप्रेम का बीज
कल (26 जनवरी) का क्या प्रोग्राम है? गणतंत्र दिवस है, क्यों न सपरिवार कहीं घूम आएं? सौरभ ने मित्रों के बीच अपनी बात रखी। सब हामी भर ही रहे थे कि पुष्पेंद्र ने इंकार कर दिया। शांत स्वर में वह बोला, भाइयों, गणतंत्र दिवस केवल छुट्टी या सैर का दिन नहीं है। यह आज़ादी के वीर सपूतों और सीमाओं पर तैनात सैनिकों को नमन करने का पर्व है। अपने अधिकारों को याद करने के साथ-साथ कर्तव्यों को निभाने और नए संकल्प लेने का दिन है।
क्षणभर को महफ़िल ठिठक गई। पुष्पेंद्र ने अपनी बात फिर बढ़ाई... मैं तो इस दिन बस्ती के बच्चों के साथ रहूंगा, तिरंगे के रंगों में उन्हें रंगूंगा, उनके मन में देशप्रेम का बीज बोने की कोशिश करूंगा।
मित्रों की आंखों में अब छुट्टी का नहीं, कर्तव्य का उत्साह उतर आया।