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इस बार 'भड़ली-नवमी' पर नहीं होंगे विवाह, अभी जान लीजिए कारण

Updated: बुधवार, 25 जून 2025 (15:20 IST)
हमारे सनातन धर्म में कई बातें देश-काल-परिस्थिति एवं लोकाचार के आधार पर प्रचलित होती हैं, जैसे भड़ली नवमी (भडरिया नवमी) पर अंतिम विवाह मुहूर्त का होना। सामान्यत: देश के अधिकांश भाग में भड़ली नवमी को विवाह हेतु अंतिम मुहूर्त माना जाता है।ALSO READ: विष्णुशयन एकादशी विशेष: क्यों प्रभु कभी नहीं सोते, पढ़ें रोचक जानकारी
 
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि भड़ली नवमी के ठीक बाद 'देवशयनी एकादशी' आती है और देवशयन होकर चातुर्मास प्रारंभ हो जाता है। शास्त्रानुसार देवशयन में हिन्दू धर्मावलम्बियों का विवाह वर्जित है, किंतु इस बार भड़ली नवमी पर विवाह नहीं होंगे क्योंकि विगत 1 माह से गुरु का तारा अस्त स्वरूप में है, गुरु के अस्तोदय स्वरूप में होने के कारण विवाह मुहूर्त नहीं बनेगा। 
 
ध्यान देने योग्य बात यह है कि स्त्री जातकों के विवाह में त्रिबल शुद्धि हेतु गुरुबल का होना विशेष महत्त्व रखता है। शास्त्रानुसार त्रिबल शुद्धि में गुरु के 'अपूज्य' स्थिति में होने पर स्त्री जातक का विवाह वर्जित माना गया है। वहीं 'पूज्य' स्थानों में होने पर गुरु की शांति के उपरांत ही स्त्री जातक का विवाह करने का निर्देश है। जिसे प्रचलित भाषा में 'पीली पूजा' कहा जाता है।ALSO READ: गुरु ग्रह अस्त, 4 राशियों को रहना होगा 9 जुलाई तक संभलकर
 
कुछ विद्वान अत्यंत आवश्यक होने पर देश-काल-परिस्थिति अनुसार 'अपूज्य' स्थानों में होने पर भी 'पीली पूजा' अर्थात् गुरु का शांति अनुष्ठान कर विवाह करने का परामर्श दे देते हैं, किंतु यह शास्त्रोचित नहीं है। 
 
04 जुलाई को है भड़ली नवमी : इस वर्ष भड़ली नवमी 04 जुलाई 2025 दिन शुक्रवार को है, जबकि गुरु का उदय 05 जुलाई 2025 होगा। अत: भड़ली नवमी पर गुरु अस्तोदय रूप में रहेंगे इसलिए भड़ली नवमी पर इस बार विवाह नहीं होंगे। कुछ विद्वान भड़ली नवमी को विवाह हेतु अबूझ मुहूर्त की मान्यता प्रदान करते हैं जो कि शास्त्रानुसार अनुचित है।
 
-ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया
प्रारब्ध ज्योतिष परामर्श केन्द्र
सम्पर्क: astropoint_hbd@yahoo.com
 
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लेखक के बारे में
पं. हेमन्त रिछारिया
ज्योतिर्विद पं. हेमन्त रिछारिया ज्योतिष प्रभाकर उपाधि से सम्मानित हैं। विगत 12 वर्षों से ज्योतिष संबंधी अनुसंधान एवं ज्योतिष से जुड़ी गलत धारणाओं का खंडन कर वास्तविक ज्योतिष के प्रचार-प्रसार में योगदान दे रहे हैं। कई ज्योतिष आधारित पुस्तकों का लेखन।.... और पढ़ें

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