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Written By WD Feature Desk
Last Updated : मंगलवार, 9 दिसंबर 2025 (16:15 IST)

Gudi Padwa: 2026 नया हिंदू वर्ष 12 नहीं 13 माह का, दे रहा है खतरनाक संकेत

वर्ष 2026 का भविष्‍य
Hindu calendar and almanac 2083: वर्ष 2025 को सभी ने देखा है कि वह किस तरह से हादसों, युद्ध, प्राकृतिक आपदा और बुरी घटनाओं में गुजरा है क्योंकि उस वर्ष में आषाढ़ माह में 13 दिनों का अशुभ पक्ष था और वर्ष 2025 में शुरुआत से लेकर अंत तक कई अशुभ योग बने थे। यह वर्ष 2025 का कैलेंडर 1941, 1997, 2003, और 2014 के समान ही था। साल 2025 का कैलेंडर तो बिल्कुल 1941 जैसा ही है। इसी प्रकार वर्ष 2026 में भी कुछ नया होने वाला है। इस बार हिंदू पंचांग और कैलेंडर 2083 में 12 नहीं 13 माह होंगे। आमतौर पर हर साल 12 पूर्णिमा होती है लेकिन विक्रम संवत में जब अधिमास पड़ता है, उस वर्ष में 13 पूर्णिमा का विशेष संयोग बनता है। वर्ष 2018, 2021, 2023 में यह संयोग बन चुका है।
 
60 दिनों का ज्येष्ठ मास: विक्रम संवत 2083 में एक अतिरिक्त चंद्र मास जुड़ने से ज्येष्ठ मास लगभग 60 दिनों तक चलेगा। ज्येष्ठ माह 2 बार रहेगा। यह स्थिति चंद्रमा और सूर्य कैलेंडर में अंतर के कारण बनती है। हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2083 में कुल 13 महीने होंगे। अधिकमास का समय धार्मिक रूप से पवित्र माना जाता है।
 
वर्ष का राजा गुरु और मंत्री मंगल: 19 मार्च 2026 से रौद्र नाम संवत्सर प्रारंभ होगा। यानी विक्रम संवत 2083 से प्रारंभ होगा रौद्र संवत्सर। इस संवत्सर के राजा गुरु और मंत्री मंगल होंगे। गुरु धर्म, न्याय और शिक्षा में बड़े परिवर्तन करेंगे तो दूसरी ओर मंगल युद्धरत रहेंगे। हिंदू ज्योतिष में नववर्ष की प्रतिपदा तिथि के वार के आधार पर वर्षेश (राजा) का निर्धारण होता है। इस बार नववर्ष गुरुवार से शुरू हो रहा है, इसलिए इस वर्ष के राजा गुरु (बृहस्पति) होंगे। वहीं मंत्री पद ग्रहों की विशेष चालों और वार–तिथि संयोग से तय होता है। 2026 में मंगल वर्ष के मंत्री होंगे।
 
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 2026 परिवर्तन, उथल-पुथल और धार्मिक जागरण का मिश्रित वर्ष होगा। राजा और मंत्री दोनों ग्रहों की प्रवृत्ति एक-दूसरे से बिल्कुल भिन्न है गुरु शांत, सौम्य और विकासकारी, जबकि मंगल उग्र, साहसिक और संघर्षकारी। इसी बीच 13 माह में 13 पूर्णिमा रहेगी जो इस उथल-पुथल और भी ज्यादा बढ़ावा देगी।  
 
राजा गुरु का प्रभाव: बृहस्पति अतिचारी हैं जो देश और दुनिया के वातावरण और जलवायु में तेजी से बदलाव करेंगे। धार्मिक व्यवस्था और शिक्षा में बदलाव होंगे। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव संभव। आध्यात्मिक गतिविधियां अपने चरम पर होगी। सामाजिक सुधार व न्याय व्यवस्था में सुधार होगा। देश–दुनिया में नैतिकता, अध्यात्म और ज्ञान का प्रभाव मजबूत रहेगा। लोग सत्य और असत्य, नास्तिकता और अस्तिकता को लेकर विश्लेषण करेंगे। इसी बीच बड़े स्तर पर धार्मिक यात्राओं, पर्व–उत्सवों और आध्यात्मिक आयोजनों में बढ़ोतरी।
 
मंत्री मंगल के प्रभाव: मंगल एक अग्नि तत्व का ग्रह है जो ऊर्जा, साहस, सेना, युद्ध, राजनीति और भूमि का कारक है। मंत्री बनने पर इसकी उग्रता पूरे वर्ष में प्रमुख रूप से सक्रिय रहेगी। मंगल राजनीतिक उथल-पुथल, नेतृत्व परिवर्तन, जनविद्रोह, सीमा पर झड़प, उद्योग–व्यापार, पेट्रोलियम, ऊर्जा, लौह–उद्योग, रक्षा–सेना और निर्माण क्षेत्र में तेजी आएगी। सुरक्षा पर ज्यादा खर्च होगा। आतंकावदी घटनाओं में वृद्धि होगी। धार्मिक कट्टरता में बढ़ोतरी होगी। देशों के बीच तनाव व संघर्ष चरम पर होगा।