गुलाबी नगरी का इतिहास

राजा जयसिंह को भी जयपुर की सुरक्षा की चिंता थी

गुलाबी नगरी जयपुर के संस्थापक राजपूत राजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने यह शहर बसाने से पहले इसकी सुरक्षा की काफी चिंता की थी और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ही सात मजबूत दरवाजों के साथ किलाबंदी की गई थी।


जयसिंह ने हालाँकि मराठों के हमलों की चिंता से अपनी राजधानी की सुरक्षा के लिए चारदीवारी बनवाई थी, लेकिन उन्हें शायद मौजूदा समय की सुरक्षा समस्याओं का भान नहीं था। तमाम प्रयासों के बावजूद देश के विभिन्न हिस्सों में आतंकवादी विस्फोट होते रहे हैं और आज संभवत: पहली बार जयपुर भी राष्ट्रविरोधी तत्वों का निशाना बन गया।

पिछले साल 11 अक्टूबर को अजमेर में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के अहाते के निकट विस्फोट किया गया था जिसमें तीन नागरिक मारे गए थे, जबकि 17 लोग घायल हुए थे।

इतिहास की पुस्तकों में जयपुर के इतिहास के अनुसार यह देश का पहला पूरी योजना से बनाया गया शहर था। इस शहर की स्थापना का विचार तत्कालीन राजा जयसिंह ने अपनी राजधानी आमेर में बढ़ती आबादी और पानी की समस्या को ध्यान में रखकर किया था।


जयपुर शहर के निर्माण का काम 1727 में शुरू हुआ और प्रमुख स्थानों के बनने में करीब चार साल लगे। यह शहर नौ खंडों में विभाजित किया गया था, जिसमें दो खंडों में राजकीय इमारतें और राजमहलों को बसाया गया। राजा को शिल्पशास्त्र के आधार पर यह नगर बसाने की राय एक बंगाली ब्राह्मण ने दी थी।
यह शहर पहले गुलाबी नगरी नहीं था बल्कि अन्य नगरों की ही तरह था, लेकिन 1853 में जब वेल्स के राजकुमार आए तो पूरे शहर को गुलाबी रंग से पेंट कर दिया गया ताकि शहर को जादुई आकर्षण प्रदान किया जा सके। उसी के बाद से यह शहर गुलाबी नगरी के नाम से प्रसिद्ध हो गया, जहाँ बनी इमारतों का वास्तुशिल्प देखते ही बनता है।

दो सौ वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्रफल में फैले जयपुर में जलमहल, जंतर-मंतर, आमेर महल, नाहरगढ़ का किला, हवामहल और आमेर का किला राजपूतों के वास्तुशिल्प के बेजोड़ नमूने हैं। (भाषा)गुलाबी नगरी रक्तरंजित, 65 मरे



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