राजनेता माओवादियों के निशाने पर

नई दिल्ली| भाषा| पुनः संशोधित शनिवार, 26 जून 2010 (00:56 IST)
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सुरक्षाबलों पर लगातार हमलों के बाद माओवादी अब देश भर में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं का सफाया करने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित छोटे दस्ते तैयार कर रहे हैं।


भाकपा माओवादी की केन्द्रीय कमेटी ने हाल ही एक बैठक में तय किया कि वे अपने प्रभाव वाले हर राज्य में ‘एक्शन टीम’ बनाएँगे ताकि राजनेताओं और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा सके।

खुफिया खबरों के हवाले से गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि नक्सल पश्चिम बंगाल, झारखंड, उडीसा, छत्तीसगढ, आंध्रप्रदेश और महाराष्ट्र के ग्रामीण और अर्धशहरी इलाकों में हमले करने की योजना बना रहे हैं।

अधिकारी ने कहा कि खतरे की आशंका के कारण माओवादियों के प्रभाव वाले इलाकों में राजनीतिक दलों के नेताओं ने अपने अपने दलों से इस्तीफा देना शुरू कर दिया है। भाकपा माओवादी की निर्णय लेने वाली शीर्ष इकाई ने अपने कैडरों को यह निर्देश भी दिया है कि वे सुरक्षाबलों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले किसी भी वाहन को निशान बनाने से परहेज न करें भले ही उसमें आम लोग सफर क्यों न कर रहे हों।

सरकारी आकलन के मुताबिक देश में 34 ऐसे जिले हैं, जो माओवादी हिंसा से गंभीर रूप से प्रभावित हैं। अन्य 50 जिलों में माओवादियों की उपस्थिति है और देश के विभिन्न हिस्सों में माओवादियों का लगभग 40 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर प्रभाव है।

प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह माओवादियों को देश की आंतरिक सुरक्षा का सबसे बड़ा खतरा बता चुके हैं जबकि गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने कहा है कि माओवादियों के प्रभाव वाले राज्यों की स्थिति गंभीर चिन्ता का विषय बनी हुई है।
चिदंबरम ने कहा है कि 2009 में ऐसे राज्यों में माओवादियों ने 591 आम नागरिकों की हत्या की। इस दौरान उन्होंने 317 सुरक्षाकर्मियों की हत्या की और 217 उग्रवादी भी सुरक्षाबलों के हाथों मारे गए। इससे माओवादी खतरा बढ़ने का संकेत मिलता है। (भाषा)



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