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Written By भाषा
पुनः संशोधित सोमवार, 8 जून 2009 (20:06 IST)

तमिलों की रक्षा करे श्रीलंका-कांग्रेस

केंद्र में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने श्रीलंका के राष्ट्रपति से तमिलों के हितों की रक्षा करने का वादा पूरा करने की माँग की है। पार्टी ने सोमवार को कहा कि पड़ोसी देश में शांति लाने के लिए तमिलों के साथ भेदभाव समाप्त किया जाना चाहिए।

राज्यसभा में आज राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा को आगे बढ़ाते हुए कांग्रेस की जयंती नटराजन ने कहा कि लिट्टे के साथ श्रीलंका सेना की लड़ाई के दौरान विस्थापित हुए तमिलों को तत्काल राहत दी जाए, ताकि वे अपने घरों को लौट सकें।

नटराजन ने युद्ध क्षेत्र से तत्काल बारूदी सुरंगें हटाने की माँग की। उन्होंने कहा कि युद्ध प्रभावितों के तत्काल पुनर्वास और उन्हें समुचित राहत प्रदान करने पर तथा घायलों को अविलंब इलाज मुहैया कराने पर जोर दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा हम राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्षे से उनके वादे के अनुरूप तमिलों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने तथा उनके साथ हो रहा भेदभाव समाप्त करने की माँग करते हैं।

नटराजन ने कहा कि लिट्टे के खिलाफ लड़ाई में कम से कम 20000 बेकसूर तमिल नागरिक मारे गए और अब समय आ गया है कि श्रीलंका के राष्ट्रपति वहाँ के तमिलों को समान अधिकार वाले नागरिक मानने का अपना वादा पूरा करें और इसे विश्व समुदाय देखे।

नटराजन ने जैसे ही श्रीलंका के तमिलों की हालत का जिक्र किया, अन्नाद्रमुक के के. मलयस्वामी, माकपा की वृंदा करात और भाकपा के डी. राजा ने उनका विरोध करते हुए कुछ कहना चाहा, लेकिन सभापति हामिद अंसारी ने इजाजत नहीं दी।

कांग्रेस नेत्री ने आरोप लगाया कि अन्नाद्रमुक, माकपा और भाकपा ने हाल ही में संपन्न चुनावों में श्रीलंका के तमिलों के मुद्दे को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश की, लेकिन अब खामोश हैं। उन्होंने कहा उन्होंने तमिलों की पीड़ा पर ध्यान देने के बजाय इसका राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश की।