लोकसभा टीवी के CEO बर्खास्त, मीडिया में गुस्सा

नई दिल्ली| WD| पुनः संशोधित शनिवार, 31 मई 2014 (17:48 IST)
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नई दिल्ली। अपनी शालीन छवि के लिए मशहूर लोकसभा अध्यक्ष ने अपनी विदाई बेला में अपनी साख पर बट्‍टा लगा लिया। कुमार ने लोकसभा टीवी के सीईओ राजीव मिश्रा को बर्खास्त कर दिया। इस फैसले से स्तब्ध राजीव ने इस बात की ‍पुष्टि की है कि उन्हें लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय से बर्खास्तगी का आदेश मिला है।

दरअसल, मीरा कुमार लोकसभा टीवी पर अपनी हार की खबर आने से नाराज थीं। मीरा सासाराम से कांग्रेस की लोकसभा उम्मीदवार थीं। यह भी कहा जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस की हार को प्रमुखता से चैनल पर दिखाया था। मीरा कुमार के इस फैसले की मीडिया जगत में तीखी आलोचना हुई है।

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लोकसभा टीवी के सीईओ राजीव मिश्रा (अब पूर्व) ने कहा है कि यह घोर अन्याय है। कल रात 12 बजे अचानक लोकसभा टीवी के इन्फ्रानेट पर सूचना आई कि मेरी सेवाएं समाप्त की जा रही हैं। क्या तटस्थ होकर काम करना गुनाह है। हमें 16 मई को सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक मेहनत की। मीरा कुमार जी हारी हैं तो ये खबर पुष्टि करने के बाद ही दिखाई गई और इसमें क्या गलत है? मुझे न तो बुलाया गया और न ही कोई बात की गई। ये सीधे पत्रकारिता पर हमला है।
वरिष्ठ पत्रकार और लोखिका वर्तिका नंदा ने कहा है कि लोकसभा टीवी की पहली एक्जीक्यूटिव प्रोड्यसर होने के अपने अतीत के नाते मैं मीरा कुमार जी के इस बेहद गैर-जिम्मेदाराना कदम का कठोर शब्दों में विरोध करती हूं। लोकसभा टीवी स्पीकर की निजी संपत्ति नहीं है। एक सीईओ, जिसने लोकसभा टीवी को इस ऊंचाईं तक पहुंचाया, उसे आपने अपनी तुष्टि के लिए हटाकर आपने अपना कद बहुत घटा लिया है। जो हाल दूरदर्शन का रहा है, क्या वही लोकसभा का भी चाहती हैं आप? अपनी हार की जिम्मेदारी लीजिए और सीईओ या चैनल को उसके लिए कतई जिम्मेदार न ठहराइए। यह अलोकतांत्रिक है पूरी तरह से। कृपया अपना यह फैसला जल्द से जल्द वापिस लीजिए।
जनसत्ता के संपादक ओम थानवी ने भी मीरा कुमार के इस फैसले पर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि मीरा कुमार ने यह शर्मनाक काम किया है। नैतिक रूप से निहायत गलत। उनकी और उनकी पार्टी की हार के बाद जब अगली लोकसभा में नया स्पीकर चार रोज बाद ही चुना जाने वाला है, मीरा कुमार ने लोकसभा टीवी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को बर्खास्त कर दिया है। महीने भर का लाजिमी नोटिस तक दिए बगैर। वजह मीरा ने तो आदेश में नहीं बताई, पर पता चला है उन्हें कोफ्त थी कि लोकसभा टीवी पर उनकी हार की खबर और चैनलों की तरह शाया क्यों की गई।
उन्होंने कहा कि यही तो लोकसभा और राज्यसभा चैनलों की विशेषता है। वे पेशेवर शैली में काम करते हैं। सरकार से वे खौफ नहीं खाते, क्योंकि उन पर सरकार का नियंत्रण नहीं होता। हालाँकि राज्यसभा चैनल ज्यादा सक्रिय और व्यापक है। उनका बजट भी लोकसभा टीवी से ज्यादा है; पार्टी-पॉलिटिक्स से दूर उपराष्ट्रपति और राज्यसभा अध्यक्ष हामिद अंसारी चैनल के स्वतंत्र परिवेश के नियामक हैं। लेकिन मीरा कुमार ने अपने चैनल के साधन और कलेवर बढ़ाने में शायद ही कभी दिलचस्पी ली होगी। फिर भी लोग वहां कुछ अलग तरह का काम करते हैं। सीमित स्टाफ के बीच चुनाव के दौरान सीईओ राजीव मिश्र खुद भारी गरमी में रिपोर्टिंग करने निकले थे। ... जाते-जाते मीरा कुमार की खीज का यह इजहार मीडिया जगत में एक और बुरी खबर लाया है।



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