फूड टेक्नोलॉजी एवं प्रोसेसिंग में कैरियर संभावनाएं

जयंतीलाल भंडारी

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वर्तमान के भागदौड़ वाले जीवन में वक्त के अभाव एवं भोजन की बदलती आदतों के कारण डिब्बाबंद प्रसंस्कृत भोजन एवं पेय पदार्थों का प्रचलन हमारे देश में दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। वर्तमान में भोजन की समग्र अवधारणा ही पूर्णतः बदल गई है। दिन-प्रतिदिन आबादी विद्युत गति से बढ़ती जा रही है तथा खेती की भूमि निरंतर कम होती जा रही है। इससे उत्पादन एवं उपभोग के बीच अंतर बढ़ता जा रहा है।

यह अंतर का इस्तेमाल कर कम किया जा सकता है। फूड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर बहुत बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री की प्रोसेसिंग कर उन्हें खराब होने से बचाया जा सकता है तथा बेहतर गुणवत्ता और पोषक तत्वों से युक्त भोज्य सामग्री बाजार में उपभोग हेतु उपलब्ध कराई जा सकती है। इससे रोजगार के अवसरों में भी भारी वृद्धि होगी।
विकसित देशों की तुलना में भारत में फूड टेक्नोलॉजी एवं प्रोसेसिंग उद्योग तुलनात्मक रूप से पिछड़ा हुआ है। यूं तो हमारे देश में प्राचीनकाल से ही महिलाएं घरों में अचार-मुरब्बा, अमचूर आदि का निर्माण करती रही हैं परंतु यह अब भी कुटीर उद्योग ही है। परंतु अब आधुनिक तकनीक वाली फूड टेक्नोलॉजी एवं प्रोसेसिंग इकाइयां हमारे देश में लगाई जा रही हैं। इन इकाइयों से उत्पादित उत्पादों की गुणवत्ता विश्व कोटि की होती है।
मूल्य संवर्धित वनस्पतियों, सब्जियों, फलों, मवेशी उत्पादों के प्रसंस्कृत स्वरूप के निर्यात की भारत में बहुत संभावनाएं हैं। डेयरी उत्पाद, मांस, पोल्ट्री उत्पाद तथा समुद्री उत्पादों की भी विदेशों में बहुत भारी मांग है। दुग्ध उत्पादन में तो भारत का विश्व में प्रथम स्थान है। सब्जियों के उत्पादन में भी भारत का विश्व में पहला और फलों के उत्पादन में दूसरा स्थान है। विश्व के आम उत्पादन का पचास प्रतिशत भारत में होता है। यदि फूड टेक्नोलॉजी एवं प्रोसेसिंग का समुचित प्रयोग किया जाए तो भारत इसमें विश्व का सिरमौर बनने की क्षमता रखता है।
किसी भी फूड टेक्नोलॉजी कार्यक्रम के लिए प्रशिक्षित फूड टेक्नोलॉजिस्ट का होना जरूरी है। फूड टेक्नोलॉजिस्ट कम लागत पर उच्च गुणवत्तायुक्त उत्पाद तैयार करते हैं। फूड टेक्नोलॉजिस्ट को उत्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण, विपणन और खरीद जैसे भिन्न-भिन्न कार्य करने होते हैं।

भारत में प्रतिवर्ष बड़ी भारी संख्या में अंतरराष्ट्रीय स्तर के फूड टेक्नोलॉजिस्ट तैयार हो रहे हैं। सीएफटीआरआई, मैसूर खाद्य अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में देश में अग्रणी संस्थान है। देश के प्रमुख कृषि विश्वविद्यालयों एवं सामान्य विश्वविद्यालयों द्वारा भी खाद्य उद्योग की जरूरतें पूरी करने के लिए बी.टेक/बी.एससी./एम. टेक./एम.एससी. और पीएच.डी. इन फूड टेक्नोलॉजी एंड प्रोसेसिंग पाठ्यक्रम संचलित किए जा रहे हैं।
विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा फूड टेक्नोलॉजी एंड प्रोसेसिंग पाठ्यक्रमों में प्रवेश, प्रवेश परीक्षा के आधार पर प्रदान किया जाता है। सीएफटीआरआई, मैसूर अपनी स्वयं की प्रवेश परीक्षा का आयोजन करता है। राज्यों के कृषि विश्वविद्यालयों में स्नातकोत्तर उपाधि की पच्चीस प्रतिशत सीटें अखिल भारतीय प्रवेश परीक्षा के आधार पर भरी जाती हैं।
बी.टेक/बी.एससी. पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु विज्ञान (फिजिक्स, केमेस्ट्री, मैथ्स/बॉयोलॉजी) में बारहवीं परीक्षा उत्तीर्ण होना जरूरी है। एम. टेक. पाठ्यक्रम के लिए खाद्य प्रौद्योगिकी/कृषि/रसायन इंजीनियरी में बी.टेक. तथा एम. एससी. फूड टेक्नोलॉजी के लिए फिजिक्स, केमेस्ट्री, मैथ्स/लाइफ साइंस में बी.एससी./कृषि/फूड टेक्नोलॉजी में बी.एससी. परीक्षा उत्तीर्ण होनी चाहिए।
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फूड टेक्नोलॉजिस्टों हेतु करियर की काफी उजली संभावनाएं व्याप्त हैं। फूड टेक्नोलॉजिस्टों को विभिन्न संगठनों में अच्छा रोजगार दिया जाता है। इनमें सरकारी, सहकारी तथा विभिन्न बहुराष्ट्रीय कंपनियां शामिल हैं। फूड टेक्नोलॉजिस्टों को बीआईएस-एग्मार्क इंस्पेक्टरों, खाद्य इंस्पेक्टर आदि के रूप में भी नियुक्त किया जा रहा है। प्राइवेट और बहुराष्ट्रीय कंपनियों में रोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं।
यहां से करें कोर्स
- शहीद राजगुरु कॉलेज ऑफ एप्लाइड साइंस फॉर वूमैन, दिल्ली

- आई.आई.टी., खड़गपुर, पश्चिम बंगाल

- सीसीएसएचयूए, हिसार, हरियाणा

- सीएफटीआरआई, मैसूर (कर्नाटक)

- जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर

 

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