सुरीला करियर संगीत का

पात्रता तथा कोर्स
शैक्षणिक : संगीत के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए वैसे तो किसी विशेष शैक्षणिक योग्यता का होना जरूरी नहीं है। फिर भी इस क्षेत्र में उपलब्ध कोर्स में प्रवेश के लिए बुनियादी आवश्यकता 10+2 है। संगीत के क्षेत्र में सर्टिफिकेट कोर्स, बैचलर कोर्स, डिप्लोमा कोर्स तथा पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स उपलब्ध है। जहाँ सर्टिफिकेट कोर्स की अवधि एक वर्ष है, वहीं बैचलर कोर्स की अवधि तीन तथा डिप्लोमा और पोस्ट ग्रेजुएट कोर्सों की अवधि दो वर्ष है।


संगीत के क्षेत्र में प्रशिक्षण कई स्कूलों और संस्थानों में दिया जाता है। इनमें चेन्नाई स्थित कलाक्षेत्र तथा भारतीय कला केन्द्र दिल्ली के नाम प्रमुख हैं। इनके कोर्स में सैद्धांतिक संगीत, संगीत की व्याख्याएँ, संगीत का इतिहास, संगीत कम्पोजिंग तथा वाइस इंस्ट्रक्शन प्रमुख है।
व्यक्तिगत गुण :
संगीत के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए जिन व्यक्तिगत गुणों का होना आवश्यक है, उनमें सबसे पहला और अच्छा गुण है अच्छी आवाज का होना। अन्य गुणों में आंतरिक प्रतिभा। समर्पण, दृढ निर्णय तथा परिश्रम, सृजनशीलता तथा ग्राह्यता, टीम वर्क, आलोचनाओं को सही भावना में स्वीकार करने की क्षमता, आत्म विश्वास तथा महत्वाकांक्षा प्रमुख है।

करियर विकल्प
जिस तरह से आज संगीत एक बड़ा व्यवसाय बन गया है, संगीत उद्योग में कई तरह के करियर विकल्प उपलब्ध हैं, जिन्हें चुनकर युवा वर्ग अपना करियर बना सकता है। जीटीवी और स्टार तथा सोनी चैनल पर आयोजित सारेगामा तथा इण्डियन आयडल जैसे कार्यक्रमों ने इश्मित (अब हमारे बीच नहीं), देवोजीत, राहुल और अभिजीत सावंत जैसे गायकों को रातों-रात सितारा बना दिया।
इस क्षेत्र में गायक और वादक बनने के अलावा संगीत शिक्षक को भी सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। इस क्षेत्र में कम्पोजर, गीत लेखक, म्यूजिक पब्लिशर, म्यूजिक जर्नलिस्ट, डिस्क जौकी, वीडियो जोकी, म्यूजिक थेरेपिस्ट, आर्टिस्ट मैनेजर/पीआर जैसे कई विकल्प उपलब्ध हैं।

म्यूजिक कम्पोजर/गीतकार जिनकी लेखन में दिलचस्पी है तथा संगीत के प्रति जन्मजात प्रतिभा है, वे म्यूजिक कम्पोजर के रूप में अपना करियर बना सकते हैं। कम्पोजर संगीत का सृजन करता है तथा नोट्स लिखता है। संगीत के नोटेशन लिखना अपने आप में एक विशिष्ट कला है। इस क्षेत्र में संगीतकार केवल संगीत की रचना करते हैं या गीतकार गीत लिखते हैं। या दोनों कला एकसाथ कर पूरे संगीतज्ञ बन जाते हैं।
कम्पोजर ध्वनि के बारे में अपने ज्ञान के आधार पर संगीत के नोटेशन लिखते हैं। इसके लिए उन्हें संगीत की विभिन्ना शैलियों का ज्ञान होना जरूरी है। इसके साथ ही सफल संगीतकार या कम्पोजर बनने के लिए श्रोताओं के टेस्ट का पता भी होना चाहिए। वन टू का फोर के जमाने में प्रीतम आन मिलो जैसा संगीत नहीं चल सकता है, इसलिए संगीतज्ञ को जमाने के साथ चलते आना चाहिए।
स्त्रोत : नईदुनिया अवसर



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