यदि न होती नारी तो पुरुष रहता अनाड़ी

SubratoND
एक कंपनी में एक विभाग के सदस्य न तो नियमों का पालन करते थे, न सलीके से कपड़े पहनते थे और न ही आपसी बातचीत में शालीन भाषा का प्रयोग करते थे। उनकी टेबलों पर सामान बिखरा रहता था। इस कारण किसी भी अतिथि को उस विभाग में नहीं लाया जाता था।

जब उन्हें मैनेजर चेतावनी देता तो हफ्ते-दस दिन तो सब कुछ ठीक चलता, लेकिन फिर वही ढर्रा चालू हो जाता। सहकर्मियों के रवैये से मैनेजर बहुत तनाव में रहता था, क्योंकि अपनी टीम के सभी सदस्यों के काम और व्यवहार की जिम्मेदारी उसी की थी। इसके लिए उसे आए दिन अपने बॉस की नाराजी भी झेलना पड़ती थी।

लेकिन अच्छी बात यह थी कि उसकी टीम के सभी सदस्य अनुभवी, मेहनती और कार्यकुशल थे। एक दिन जब वह मुँह लटकाकर घर लौटा तो पत्नी ने उदासी का कारण पूछा। वह अपनी परेशानी का कारण बताते हुए बोला- तुम्हीं बताओ, अब ऐसी स्थिति में मैं क्या करूँ? कहीं किसी दिन मुझे अपनी नौकरी से ही हाथ न धोना पड़े।
  एक कंपनी में एक विभाग के सदस्य न तो नियमों का पालन करते थे, न सलीके से कपड़े पहनते थे और न ही आपसी बातचीत में शालीन भाषा का प्रयोग करते थे। उनकी टेबलों पर सामान बिखरा रहता था। इस कारण किसी भी अतिथि को उस विभाग में नहीं लाया जाता था।      


इस पर वह मुस्कराते हुए बोली- तुम इतनी जल्दी हार कैसे मान सकते हो? इसका एक आसान-सा उपाय है। पहले तो यह बताओ कि तुम्हारी टीम में कितने लड़के और कितनी लड़कियाँ हैं। वह बोला- मेरे विभाग में लड़कियाँ हैं ही कहाँ, सभी तो लड़के हैं। पत्नी बोली- यही तो तुम्हारी समस्या का कारण है। तुम अपनी टीम में लड़कियों को शामिल करो और फिर देखो अंतर।

पत्नी की बात में उसे उम्मीद की किरण दिखाई दी। अगले ही दिन उसने अपने अधिकारी से अनुमति लेकर दो लड़कियों को अपनी टीम में शामिल कर लिया। उसके बाद तो कुछ ही समय में उसके विभाग का कायाकल्प हो गया। हर चीज व्यवस्थित नजर आने लगी। सभी सहकर्मियों की भाषा संयमित हो गई और उनका गेटअप भी सुधर गया। अब उनका विभाग भी साफ-सुथरा और अनुशासित हो गया। जल्द ही कंपनी में उस विभाग की मिसाल दी जाने लगी।

मनीष शर्मा|
दोस्तो, कहते हैं कि पुरुष को व्यवस्थित रखने में नारी से बढ़कर किसी का योगदान नहीं हो सकता। यह बात यहाँ चरितार्थ होती दिखाई देती है। यदि नारी नहीं होती तो आदमी अनाड़ी रहता, जंगली की तरह व्यवहार करता। नारी ही उसे जीवन जीने का सलीका सिखाती है। फिर वह चाहे माँ के रूप में हो, बहन के, पत्नी के, भाभी के या फिर सहकर्मी के रूप में ही क्यों न हो।



और भी पढ़ें :