गद्दाफी अब भी सत्ता में कैसे बने हुए हैं?

- फ्रैंक गार्डनर (रक्षा संवाददाता)

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मध्य पूर्व में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच, जहाँ लीबिया के कर्नल गद्दाफी के दो पड़ोसी देशों के शासक सत्ता छोड़ भाग गए हैं, वहीं गद्दाफी की सत्ता किस आधार पर टिकी हुई है। वास्तव में मिस्र और ट्यूनिशिया से अलग, लीबिया में सत्ता का संतुलन सेना तय नहीं करती है।

इसकी जगह कई अर्धसैनिक ब्रिगेड्स का नेटवर्क और कर्नल गद्दाफी के समर्थकों की 'रेवोल्युश्नरी सिमतियाँ,' कबाइली नेता और विदेशों से लाए गए भाड़े के सैनिक तय करते हैं की सत्ता किसके हाथ में रहेगी।

असल में लीबियाई सेना तो प्रतीकात्मक ही है और लगभग 40 हजार की ये फौज न तो आधुनिक हथियारों से लेस है और न ही इसे अच्छा प्रशिक्षण हासिल है।
ऐसा इसलिए है क्योंकि कर्नल गद्दाफी दर्घकालिक रणनीतिक के तहत सेना की ओर से तख्तापलट की किसी भी संभावना को खत्म कर देना चाहते हैं। वे वर्ष 1969 में ऐसे ही सैन्य तख्तापलट के जरिए सत्ता में आए थे।

इसलिए बेनगाजी में सेना के कुछ लोगों के प्रदर्शनकारियों का साथ देने से कर्नल गद्दाफी ज्यादा विचलित नहीं होंगे। इसीलिए पूर्वी लीबिया में इनकी छावनियों पर हवाई हमले भी हुए हैं।
सुरक्षातंत्र का फैलाव, खौफ : इस क्षेत्र के कई अन्य देशों की तरह लीबिया में भी व्यापक फैलाव वाला, खासे संसाधनों वाला और काफी क्रूर माना जाने वाला आंतरिक सुरक्षा तंत्र है।

इसकी तुलना वर्ष 1989 से पूर्व रोमानिया या पूर्वी जर्मनी के आंतरिक सुरक्षा तंत्र से की जा सकती है, जब सार्वजनिक तौर पर लोग कुछ बोलने से डरते थे कि कहीं खुफिया पुलिस तक कोई जानकारी न पहुँचा दे।
मैं इससे पहले जब भी लीबिया में गया तो मैंने पाया कि आम लोग खुलकर कुछ भी बोलने से डरते थे क्योंकि सरकार के एजेंट सदा नजर रखते थे और कौन क्या कहता था, उसकी खबर भी रखते थे।

कर्नल गद्दाफी के कुछ पुत्रों ने आंतरिक सुरक्षा के विभाग में काम किया है, लेकिन आज आंतरिक और बाहरी सुरक्षा में अहम व्यक्ति गद्दाफी के दामाद अब्दुल्ला सेनुसी हैं।
वे कट्टरपंथी हैं जिनकी एक छवि एक बाहुबली के समान है। जब तक वे गद्दाफी के सलाहकार रहते हैं और उन्हें कड़े कदम उठाने की सलाह देते रहते हैं तब तक उनकी सत्ता से हटने की संभावना कम है।

गद्दाफी की वफादार रेवोल्यूश्नरी समितियाँ : लीबिया में कई विशेष ब्रिगेड्स हैं जिनकी जवाबदेही सेना को नहीं बल्कि गद्दाफी की रेवोल्यूश्नीर समितियों को है।
इनमें से एक ब्रिगेड की कमान गद्दाफी के बेटे हानीबल के हाथ में हैं। इन पर हाल में होटल कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप लगने के बाद, इनकी स्विट्जरलैंड की पुलिस के साथ हाथापाई हुई थी।

जन-सेना के नाम से जाने जाते ये अर्धसैनिक बल अब तक तो गद्दाफी के वफादार रहे हैं। यदि ये अर्धसैनिक बल गद्दाफी का साथ छोड़ देते हैं और प्रदर्शनकारियों के साथ हो जाते हैं तो गद्दाफी के सत्ता में बने रहने की संभावना बहुत क्षीण हो जाएगी।
लीबियाई संघर्ष का सबसे खतरनाक और गंभीर पहलू है भाड़े के सैनिक। ऐसी रिपोर्टें लगातार आ रही है कि गद्दाफी प्रशासन अफ्रीका, विशेष तौर पर चाड और निजेर से भाड़े के सैनिकों का व्यापक इस्तेमाल कर रहा है। ये निशस्त्र आम नागरिकों के खिलाफ दमनकारी नीतियाँ अपना रहे हैं।

लीबियाई प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया है कि ये लोग छतों से प्रदर्शनकारियों की भीड़ पर गोलियाँ चला रहे हैं। इस तरह से वे उन आदेशों का पालन कर रहे हैं जिन्हें लीबियाई सैनिकों ने मानने से इनकार कर दिया है।
कर्नल गद्दाफी के कई अफ्रीकी देशों के साथ घनिष्ठ संबंध हैं क्योंकि अरब देशों से वो काफी समय से दूर रहे हैं। साठ लाख की जनसंख्या वाले लीबिया में लगभग पाँच लाख लोग बाहर से आए हैं।

गद्दाफी के समर्थन वाले भाड़े के सैनिकों की संख्या कम है, लेकिन उनकी वफादारी पर कोई सवाल नहीं है और ऐसी रिपोर्टें है कि हाल के दिनों में अतिरिक्त उड़ानों के जरिए और ऐसे लोगों को लाने का प्रबंध किया गया है।
क्या कबायलियों को उतारेंगे गद्दाफी?
यमन और इराक की तरह लीबिया ऐसा देश हैं जहाँ आपका कबीला क्या है, ये तय कर सकता है कि आपकी वफादारी किस ओर होगी। लेकिन वर्ष 1969 के बाद से लेकर अब तक कबायली पहचान उतनी मजबूत नहीं रही है।

कर्नल गद्दाफी कधाथ्था कबीले के हैं। अपने 41 साल के शासनकाल में उन्होंने अपने कबीले के कई लोगों को अपनी निजी सुरक्षा समेत कई अहम पदों पर नियुक्त किया है।
इराक में सद्दाम हुसैन और यमन में राष्ट्रपति सलेह की तरह, कर्नल गद्दाफी ने भी काफी कुशलता के साथ एक कबीले को दूसरे कबीले के खिलाफ खड़ा किया है ताकि उनकी सत्ता को कोई खतरा न रहे।

लीबिया पर नजर रखने वालों की निगाहें अब इस पर टिकी हैं कि क्या लीबियाई सरकार की अपनी भी भविष्यवाणी को साकार करते हुए, पूर्वी लीबिया में, वफादार कबायली नेताओं को हथियारों से लैस कर प्रदर्शनकारियों के विद्रोह को कुचलती है या नहीं।

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