dharma sangrah

बाल गीत : संविधान में लिखी हुई है

Published: गुरुवार, 9 अप्रैल 2026 (14:50 IST)
वोट डालकर हमको चुनना,
है सरकार हमारी।
संविधान में लिखी हुई है,
यही व्यवस्था सारी।
 
मिली हमें आज़ादी थी तो,
नूतन पथ था चुनना।
संविधान को अपने ढंग से,
नए रूप में बुनना।
 
अंबेडकर जी ने लिखा,
लेकर जुम्मेवारी।
जनता के द्वारा चुनना थी,
जनता की सरकारें।
 
लिखा गया था -नियम कायदे,
सभी लोग स्वीकारें।
संविधान निर्माताओं के,
हम सब हैं आभारी।
 
छोटे, बड़े, गरीब सभी को,
सम अधिकार मिले थे।
नियम, कायदे, कानूनों के,
पथ पर सभी चले थे।
 
सर्वोत्तम है यही व्यवस्था,
जो अब तक है जारी।
प्रजातंत्र में सब धर्मों को,
मिली हुई हुई आज़ादी।
 
पेंट पहन लो, कुरता पहनों,
या टोपी या खादी|
पूजा पद्धतियों पर भी है,
रोक नहीं सरकारी।
 
गया पंथ निरपेक्ष शब्द था,
बहुत बाद में जोड़ा।
सरकारों से धर्म जुड़ा है,
इस भ्रम को था तोडा।
 
तीर्थ यात्री भी पा जाते,
मदद कभी सरकारी।
संसद में ही कार्यपालिका,
है कानून बनाती।
 
फिर विधायिका के द्वारा वह ,
उन पर अमल कराती।
न्याय पालिका का अंकुश इन,
पर होता है भारी।
 
तीन प्रमुख स्तम्भ यही हैं,
जिनसे शासन चलता।
इनसे ही हर भारतवासी,
कुशल क्षेम से रहता।
भोजन शिक्षा और स्वास्थ्य में,
सबकी हिस्सेदारी।
 
भेद भाव न धर्मों में हो,
रार न हो पंथों में।
मिल जुलकर रहना ही अच्छा,
लिखा धर्म ग्रंथों में।
बड़े, बुजुर्गों, बच्चों, सबकी,
है यह जुम्मेवारी।

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लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें

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