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त्रिकोणासन से कमर को बनाएं छरहरा और कब्ज को भगाएं

मंगलवार,मार्च 5, 2019
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योग के अंग संचालन को सूक्ष्म व्यायाम भी कहा जाता है। आजकल इसे योगा एक्सरसाइज कहते हैं। इसे आसनों की शुरुआत के पूर्व किया जाता है। इसे ही तोड़-मरोड़कर एरोबिक्स नाम से कराया जाता है। क्लास में जो पीटी कराई जाती है वह भी अंग संचालन का हिस्सा मात्र है। ...
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पूरे मनोयोग से कीजिए योग

गुरुवार,फ़रवरी 22, 2018
योग जीवन जीने की एक पद्धति है। स्वस्थ रहने के लिए योग नियमित किया जाना चाहिए। अक्सर लोग आधे अधूरे मन से योग की ओर आकृष्ट होते हैं और चाहते हैं कि लाभ पूरे हासिल हों। यह मुमकिन नहीं है।
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यदि आपकी तोंद निकली हुई है और बदन अकड़ा हुआ है तो यह आसन करना थोड़ा कठिन है। इस आसन को करने के पूर्व पहले सूर्य नमस्कार से शरीर को लचीला बनाएं। इस आसन को करने से आपकी छाती कबूतर के समान बाहर निकलकर चौड़ी हो जाती है।
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योग में ऐसे कई आसन हैं जिसको करने से आपकी कब्ज की समस्या जड़ से समाप्त होकर पेट की चर्बी हटकर पेट नरम हो सकता है। उन्हीं सबसे उत्तम आसनों में से एक है उदराकर्षण। इस योग को नियमित करने से आपकी कब्जियत और तोंद की समस्या समाप्त हो सकती है।
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योग आपको हर पल शरीर और मन से युवा बनाए रखने की ताकत रखता है, साथ ही यह यौन शक्ति को बढ़ाने में और वैवाहिक जीवन सुखी बनाने में मदद भी करता है। मगर इसके लिए सतत अभ्यास की आवश्यकता है। यहां प्रस्तुत हैं यौवन को बरकरार रखने एवं यौन शक्ति बढ़ाने के लिए ...
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योग आसनों की शुरुआत के पूर्व अंग संचालनों में पारंगत हुआ जाता है। अंग संचालनों के क्रम में ही एक अंग संचालन 'पूर्ण भुजा शक्ति विकासक क्रिया' है। जिन लोगों को कठिन आसन करने में दिक्कत होती है, वे इस अभ्यास से आसन और प्राणायाम के लाभ एकसाथ प्राप्त कर ...
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टेबल टॉप आसन (Table top yoga or Ardha Purvottanasana ) : अर्थ पूर्वोत्तनासन को अंग्रेजी लोग टेबल टॉप आसन कहने लगे हैं। इसी तरह के आसन सेतु बंध, चक्रासन और मार्जार आसन भी होते हैं।
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क्या है आसन : चित्त को स्थिर रखने वाले तथा सुख देने वाले बैठने के प्रकार को आसन कहते हैं। आसनों का मुख्य उद्देश्य शरीर के मल का नाश करना है। शरीर से मल या दूषित विकारों के नष्ट हो जाने से शरीर व मन में स्थिरता का अविर्भाव होता है। शांति और स्वास्थ्य ...
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मनुष्य को प्रकृति की ओर से संतुलित और सुडौल शरीर मिलता है, पर वह गलत रहन-सहन, बुरी आदत तथा खान-पान में अनियमितता के कारण इस शरीर को बेडौल बना लेता है। वैज्ञानिक रूप से मोटापा हम उसे कहते हैं जिसमें शरीर का वजन ऊंचाई के मान से अधिक होता है।
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तोंद को अंदर करना या पेट और कमर की चर्बी घटाना कोई मुश्किल काम नहीं। यह बहुत आसान है। लेकिन व्यक्ति के भीतर संकल्प और मन को काबू में करने की इच्छाशक्ति नहीं है इसलिए यह कार्य बहुत ही मुश्किल नजर आता है।
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आसन परिचय : इस आसन में हम दोनों हाथों से अपने पैर के अंगूठे को पकड़ते हैं, पैर के टखने भी पकड़े जाते हैं। चूंकि हाथों से पैरों को पकड़कर यह आसन किया जाता है इसलिए इसे पादहस्तासन कहा जाता है। यह आसन खड़े होकर किया जाता है।
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आसन परिचय : इस आसन में शरीर का आकार खेत में चलाए जाने वाले हल के समान हो जाता है। इसीलिए इस आसन को हलासन कहा जाता हैं।
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आसन परिचय : मंडूक का अर्थ है मेंढक अर्थात इस आसन को करते वक्त मेंढक के आकार जैसी स्थिति प्रतीत होती इसीलिए इसे मंडूकासन कहते हैं। यह आसन भी कई तरह से किया जाता हैं। यहां प्रस्तुत है प्रचलित तरीका।
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आसन परिचय : जानुशिरासन को महामुद्रा भी कह सकते हैं। इसमें कोई खास फर्क नहीं। जानु का अर्थ है 'घुटना' इस आसन में अपने सिर को अपने घुटने से सटाया जाता है इसलिए इस आसन का नाम 'जानुशिरासन' (Janushirasana) है।
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आसन परिचय : संस्कृत शब्द धनुष का अर्थ है घुमावदार या मुड़ा हुआ? इस आसन को करने से शरीर की आकृति खींचे हुए धनुष के समान हो जाती है, इसीलिए इसको धनुरासन कहते हैं।
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आसन परिचय : सेतु का अर्थ होता है पूल। सेतुबन्धासन से पहले अर्धसेतुबन्धासन करते हैं। इसमें व्यक्ति की आकृति एक सेतु के समान हो जाती है इसीलिए इसके नाम में सेतु जुड़ा हुआ है।
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आसन परिचय : संस्कृत शब्द नाग का अर्थ है सर्प या भुजंग। अंग्रेजी में इसे कोबरा कहते हैं। इस आसन में शरीर की आकृति फन उठाए हुए नाग के समान हो जाती है इसीलिए इसको नाग आसन, भुजंगासन या सर्पासन कहा जाता है।
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आसन परिचय : इस आसन की अंतिम अवस्था में हमारे शरीर की आकृति नौका समान दिखाई देती है, इसी कारण इसे नौकासन कहते हैं।
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सुप्त का अर्थ होता है सोया हुआ अर्थात वज्रासन की स्थिति में सोया हुआ। इस आसन में पीठ के बल लेटना पड़ता है इसिलिए इस आसन को सुप्तवज्रासन कहते हैं।
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