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विश्रामासन योग के 5 फायदे जानिए और तनाव से मुक्ति पाएं

शुक्रवार,नवंबर 27, 2020
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अनियमित और मसालेदार भोजन के अलावा आरामपूर्ण जीवनशैली के चलते तोंद एक वैश्विक समस्या बन गई है जिसके चलते डायबिटीज, हार्टअटैक, किडनी, मूत्राशय, रीढ़ की हड्डी, कमर दर्द जैसे आदि कई रोगों का खतरा बढ़ जाता है। कुछ भी नहीं है फिर भी तोंद के चलते व्यक्ति ...
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21 योग दिवस 2020 के अवसर पर हमने आपके लिए जुटाएं हैं योग के कुछ खास वीडियो जिसमें हर तरह के रोग और शोक को मिटाने के साथ ही आपको मिलेंगे सेहतमंद बने रहने के लिए कुछ खास टिप्स।
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ऑफिस या घर की डेस्क पर कार्य करते हुए मन और शरीर दोनों पर प्रभाव पड़ता है। मन तनाव से ‍घिर जाता है तो शरीर में गर्दन, रीढ़, कंधे और आंखें अकड़न और दर्द का शिकार हो जाती हैं। तनाव जहां हमें कुंठा से ग्रस्त कर हमारे स्नायुतंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव ...
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यहां योग के मात्र 5 ऐसे आसन दिए जा रहे हैं जिन्हें अच्‍छे से सीखकर यदि आप इन्हें प्राणायाम और इनके पूरक आसन के साथ नियमित करते रहेंगे तो शर्तिया आप जीवन में कभी शारीरिक और मानसिक रूप से बीमार नहीं होंगे।
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कोविड-19 या कोरोना वायरस से इस समय बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क और हैंड वॉश बहुत जरूरी है। इसके अलावा प्रिकॉशन के लिए आपको आयुर्वेदिक काड़ा और गरम पानी पीने के अलावा प्रतिदिन योगासन करना चाहिए जिससे आपकी इम्युनिटी बूस्ट होगी। देखा गया है कि ...
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अवसाद के कारण चिड़चिड़ापन, क्रोध और अनावश्यक तनाव बना रहता है। इसे निराशा, हताशा और संकोच के भाव भी निर्मित होते हैं। ऐसा होने से व्यक्ति के जीवन से शांति, सुख और सफलता चली जाती है। कुछ लोग इसे निजात माने के लिए नशा करने लगते हैं तो समस्या और गंभीर ...
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लॉकडाउन में घर से कहीं भी बाहर निकलना कहीं हो पा रहा है। घूमन फिरना या टहलना बंद हो गया है। यदि आप डायबिटीज के मरीज हैं तो आपकी परेशानी बढ़ गई होगी। नहीं हैं तो भी खाना पचने में समस्या हो रही है। बहुत ज्यादा आराम करने से भी शरीर जाम होकर अस्वस्थ हो ...
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संस्कृत शब्द त्रि अर्थात तीन और कोण अर्थात कोने या कार्नर। इस आसन को करने से व्यक्ति की आकृति त्रिकोण या त्रिभुज समान हो जाती है इसीलिए इसे त्रिकोणासन कहते हैं।
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योग के अंग संचालन को सूक्ष्म व्यायाम भी कहा जाता है। आजकल इसे योगा एक्सरसाइज कहते हैं। इसे आसनों की शुरुआत के पूर्व किया जाता है। इसे ही तोड़-मरोड़कर एरोबिक्स नाम से कराया जाता है। क्लास में जो पीटी कराई जाती है वह भी अंग संचालन का हिस्सा मात्र है। ...
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पूरे मनोयोग से कीजिए योग

गुरुवार,फ़रवरी 22, 2018
योग जीवन जीने की एक पद्धति है। स्वस्थ रहने के लिए योग नियमित किया जाना चाहिए। अक्सर लोग आधे अधूरे मन से योग की ओर आकृष्ट होते हैं और चाहते हैं कि लाभ पूरे हासिल हों। यह मुमकिन नहीं है।
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यदि आपकी तोंद निकली हुई है और बदन अकड़ा हुआ है तो यह आसन करना थोड़ा कठिन है। इस आसन को करने के पूर्व पहले सूर्य नमस्कार से शरीर को लचीला बनाएं। इस आसन को करने से आपकी छाती कबूतर के समान बाहर निकलकर चौड़ी हो जाती है।
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योग में ऐसे कई आसन हैं जिसको करने से आपकी कब्ज की समस्या जड़ से समाप्त होकर पेट की चर्बी हटकर पेट नरम हो सकता है। उन्हीं सबसे उत्तम आसनों में से एक है उदराकर्षण। इस योग को नियमित करने से आपकी कब्जियत और तोंद की समस्या समाप्त हो सकती है।
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योग आपको हर पल शरीर और मन से युवा बनाए रखने की ताकत रखता है, साथ ही यह यौन शक्ति को बढ़ाने में और वैवाहिक जीवन सुखी बनाने में मदद भी करता है। मगर इसके लिए सतत अभ्यास की आवश्यकता है। यहां प्रस्तुत हैं यौवन को बरकरार रखने एवं यौन शक्ति बढ़ाने के लिए ...
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योग आसनों की शुरुआत के पूर्व अंग संचालनों में पारंगत हुआ जाता है। अंग संचालनों के क्रम में ही एक अंग संचालन 'पूर्ण भुजा शक्ति विकासक क्रिया' है। जिन लोगों को कठिन आसन करने में दिक्कत होती है, वे इस अभ्यास से आसन और प्राणायाम के लाभ एकसाथ प्राप्त कर ...
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टेबल टॉप आसन (Table top yoga or Ardha Purvottanasana ) : अर्थ पूर्वोत्तनासन को अंग्रेजी लोग टेबल टॉप आसन कहने लगे हैं। इसी तरह के आसन सेतु बंध, चक्रासन और मार्जार आसन भी होते हैं।
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क्या है आसन : चित्त को स्थिर रखने वाले तथा सुख देने वाले बैठने के प्रकार को आसन कहते हैं। आसनों का मुख्य उद्देश्य शरीर के मल का नाश करना है। शरीर से मल या दूषित विकारों के नष्ट हो जाने से शरीर व मन में स्थिरता का अविर्भाव होता है। शांति और स्वास्थ्य ...
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मनुष्य को प्रकृति की ओर से संतुलित और सुडौल शरीर मिलता है, पर वह गलत रहन-सहन, बुरी आदत तथा खान-पान में अनियमितता के कारण इस शरीर को बेडौल बना लेता है। वैज्ञानिक रूप से मोटापा हम उसे कहते हैं जिसमें शरीर का वजन ऊंचाई के मान से अधिक होता है।
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तोंद को अंदर करना या पेट और कमर की चर्बी घटाना कोई मुश्किल काम नहीं। यह बहुत आसान है। लेकिन व्यक्ति के भीतर संकल्प और मन को काबू में करने की इच्छाशक्ति नहीं है इसलिए यह कार्य बहुत ही मुश्किल नजर आता है।
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आसन परिचय : इस आसन में हम दोनों हाथों से अपने पैर के अंगूठे को पकड़ते हैं, पैर के टखने भी पकड़े जाते हैं। चूंकि हाथों से पैरों को पकड़कर यह आसन किया जाता है इसलिए इसे पादहस्तासन कहा जाता है। यह आसन खड़े होकर किया जाता है।
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