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काली मुद्रा से बुढ़ापा भागेगा दूर और पाचन रहेगा दुरुस्त

शनिवार,जून 20, 2020
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योग में प्रमुखत: छह क्रियाएं होती है:-1. त्राटक 2. नेती. 3. कपालभाती 4. धौती 5. बस्ती 6. नौली। यहां प्रस्तुत है नेती के बारे में जानकारी। इसे तीन तरह से किया जाता है:- 1.सूत नेती 2.जल नेती और 3.कपाल नेती।
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शाम्भवी मुद्रा को शिव मुद्रा या भैरवी मुद्रा भी कहते हैं। शाम्भवी मुद्रा करना बहुत कठिन और बहुत सरल है। इसे यदि सही तरीके से नहीं किया जा रहा है तो यह कठिन है और सही ‍तरीके से किया जा रहा है तो यह बहुत सरल है।
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उम्र का असर सबसे पहले चेहरे पर आता है। उम्र बढ़ने के साथ चेहरे पर झुरियां, आंखों के नीचे कालापन और कपाल पर सिलवटें पड़ जाती हैं। हमारा चेहरा भी कुछ कुछ बदलने लगता है। वर्तमान में प्रदूषण और गलत खानपान के कारण यह और भी तेजी से होने लगा है। ऐसे में ...
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उम्र का असर सबसे पहले चेहरे पर आता है। अधिक उम्र नहीं हुई है फिर भी शहरी प्रदूषण के कारण चेहरा मुरझा-सा गया है। योग के अंग संचालन या सूक्ष्म व्यायाम में ऐसी कई मुद्राएं बतायी गई है जिसे करने से चेहरे की झुर्रियां मिटाकर उसे दमकता हुआ बनाए रखा जा ...
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यदि आप कोई बात या चीजें भूल जाते हैं। कई बार पढ़ने के बाद भी कोई पाठ याद नहीं होता है तो योग की यह भूचरी या भोचरी मुद्रा आपके लिए जादु जैसा काम करेगी।
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नभ का अर्थ होता है 'आकाश'। इस मुद्रा में जीभ को तालु की ओर लगाते हैं, इसीलिए इसे नभोमुद्रा कहते हैं। नभोमुद्रा करना सरल नहीं है। इसे किसी योग शिक्षक से सीखकर ही करना चाहिए। यह मुद्रा बहुत से रोगों में लाभदायक सिद्ध हुई है। इस बारे में एक श्लोक भी
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योग अनुसार आसन और प्राणायाम की स्थिति को मुद्रा कहा जाता है। बंध, क्रिया और मुद्रा में आसन और प्राणायाम दोनों का ही कार्य होता है। योग में मुद्राओं को आसन और प्राणायाम से भी बढ़कर माना जाता है। आसन से शरीर की हडि्डयां लचीली और मजबूत होती है जबकि ...
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खुली आंखों से कैसे नींद ले सकते हैं यह तो बहुत ही आश्चर्य वाली बात है। आपने अक्सर देख या सुना होगा कि नींद में चलने वालों की आंखों खुली होते है लेकिन वे सोए रहते हैं। खुली आंखों से वे देखते भी रहते हैं और सोए भी रहते हैं। यह बहुत ही अजीब है, लेकिन ...
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वर्तमान युग में खान-पान के प्रति लोग सजग नहीं रहते हैं जिसके चलते वे कई तरह के पेट संबंधी रोग और कई गंभीर रोग से भी पीड़ित होकर अस्पताल में भर्ती तक हो जाते हैं। हजारों लोग हैं और हजारों तरह के रोग हैं, लेकिन यह कोई नहीं समझता कि उपयोगी सिर्फ योग ...
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मुद्राओं में पृथ्वी मुद्रा का बहुत महत्व है। यह हमारे भीतर के पृथ्वी तत्व को जागृत करती है। योगियों ने मनुष्य के शरीर में दो मुख्य नाड़ियां बतलाई हैं। एक सूर्य नाड़ी और दूसरी चन्द्र नाड़ी।
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बंध का शाब्दिक अर्थ है- 'गांठ', बंधन या ताला। इसके अभ्यास से प्राणों को शरीर के किसी एक भाग पर बांधा जाता है। इसके अभ्यास से योगी प्राणों को नियंत्रित कर सफलता पूर्वक कुंडलिनी जाग्रत करता है।
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मुद्राओं के अभ्यास से गंभीर से गंभीर रोग भी समाप्त हो सकता है। मुद्राओं से सभी तरह के रोग और शोक मिटकर जीवन में शांति मिलती है। हठयोग प्रदीपिका में 10 मुद्राओं का उल्लेख कर उनके अभ्यास पर जोर दिया गया है।
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मनुष्य की जीभ (जिह्वा) दो तरह की होती हैं- लंबी और छोटी। लंबी जीभ को सर्पजिह्वा कहते हैं। कुछ लोगों की जीभ लंबी होने से वे उसे आसानी से नासिकाग्र पर लगा सकते हैं और खेचरी-मुद्रा कर सकते हैं। मगर जिसकी जीभ छोटी होती है उसे तकलीफों का सामना करना पड़ता ...
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घेरंड ने 25 मुद्राओं एवं बंध का उपदेश दिया है और भी अनेक मुद्राओं का उल्लेख अन्य ग्रंथों में मिलता है। मुद्राओं के अभ्यास से गंभीर से गंभीर रोग भी समाप्त हो सकता है। मुद्राओं से सभी तरह के रोग और शोक मिटकर जीवन में शांति मिलती है।
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योग दुनिया का सर्वश्रेष्ठ धर्म है। यदि योग अनुसार जीवन शैली ढाली जाए तो कुछ भी संभव हो सकता है। योग का एक अंग हस्तमुद्रा योग है जो योग की सबसे सरलतम विद्या है। यहां प्रस्तुत है शक्तिपान मुद्रा की विधि और लाभ।
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पंच धारणा का अर्थ है पांच तरह की धारणा। योग में इन पांच धारणाओं का बहुत ही महत्व बताया गया है। इन धारणाओं को सिद्ध करने के लिए ध्यान का अभ्यास करना जरूरी है। इनके सिद्ध हो जाने से सभी कार्य सि‍द्ध होने लगते हैं।
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इस हस्तमुद्रा को करते समय हाथों की आकृति पान (betel leaf) के समान बन जाती है इसीलिए इसे पान मुद्रा कहते हैं।
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यदि आपके बाल झड़ रहे हैं या सफेद हो रहे हैं तो यह मुद्रा आपके लिए है। गंजेपन से निजात पाने के लिए योग शास्त्र में माण्डु की मुद्रा को सबसे श्रेष्ठ उपाय बताया गया है। इसका लगातार अभ्यास करने से बाल स्वस्थ और मजबूत बन जाते हैं।
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चित्त के तीन अर्थ है उल्टा, मनस और निश्चय। इस मुद्रा को बनाने के बाद हथेलियों को उल्टा भूमि की ओर कर देते हैं। यह मन को काबू में करने वाली मुद्रा है इसीलिए इसे चित्त हस्त मुद्रा योग कहते हैं।
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