योग का जन्म नेपाल में हुआ या भारत में?

Yoga positive thinkin
के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने यह दावा कर एक और विवाद खड़ा कर दिया कि का उद्भव में नहीं बल्कि उनके देश में हुआ था। उन्होंने दावा किया कि वास्तव में योग की उत्पत्ति उत्तराखंड से हुई थी और उस समय उत्तराखंड वर्तमान भारत में नहीं बल्कि नेपाल में था। भारत उस समय एक स्वतंत्र देश के रूप में पैदा भी नहीं हुआ था।

नेपाल के एक प्रमुख योग विशेषज्ञ योगाचार्य जीएन सरस्वती ने हालांकि कहा कि प्रधानमंत्री ओली का दावा पूर्ण सत्य पर आधारित नहीं है। उन्होंने कहा कि योग की उत्पत्ति में क्षेत्र से हुई जिसमें भारत, नेपाल, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, तिब्बत, श्रीलंका, बांग्लादेश आदि शामिल थे।
असल में योग कि उत्पत्ति कहां पर हुई थी?

1. ऋग्वेद रचा गया सरस्वती के तट पर : संसार की प्रथम पुस्तक ऋग्वेद में योग का उल्लेख मिलता है। यूनेस्को ने ऋग्वेद की 1800 से 1500 ई.पू. की 30 पांडुलिपियों को सांस्कृतिक धरोहरों की सूची में शामिल किया है। ऋग्वेद को सरस्वती नदी के तट पर बैठकर लिखा या कहा गया था। विद्वानों ने वेदों के रचनाकाल की शुरुआत 4500 ई.पू. से मानी है, जबकि इसकी वाचिक परंपरा कई हजार वर्ष पुरानी है। सरस्वती नदी उत्तराखंड में स्थित शिवालिक पहाड़ियों से थोड़ा-सा नीचे आदिबद्री नामक स्थान से निकलती थी और राजस्थान के क्षेत्र को पार करते हुए अरब सागर में लीन हो जाती थी।

2. सरस्वती थी सबसे प्राचीन नदी : सिंधु एवं सरस्वती के उद्गम से विलीन होने तक के क्षेत्र उस दौर में भारतखंड के ही हिस्से थे। भारत खंड में ही नाम का एक क्षेत्र होता था जहां पर वेद, उपनिषद और योग विद्या की उत्पत्ति हुई।



3. मनु स्वायंभुव : पुराणों के अनुसार आदिम मनु स्वायंभुव का निवास स्थल सरस्वती नदी के तट पर था। राजा मनु ने प्रजा को योग का उपदेश दिया था। मनु ने अपने क्षेत्र की राजधानी अयोध्या को बनाया था।

4. हिमवतवर्ष : राजा भरत से पहले ऋषभदेव के काल में भारत को कहे जाने के प्रमाण मिलते हैं। वायु पुराण अध्याय 35 श्लोक 28 के अनुसार पूर्व में यह भारत वर्ष हिमवान पर्वत के नाम पर हैमवतवर्ष (देश) के नाम से जाना जाता था। हिन्दू कुश से लेकर अरुणाचाल तक भारतखंड का विस्तार है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार हिमवान या हैमवत पर्वत क्षेत्र में राजा हिमवान का राज्य था जो प्राचीन नेपाल के राजा थे। हिमवान पर्वत को हिमालय के पर्वतों का राजा कहा जाता है।
5. भारत वर्ष की सीमा : भारतवर्ष, हैमवतवर्ष या अजनाभखंड का क्षेत्र विस्तार इस प्रकार था। जम्बूद्वीप वर्णन के अनुसार राजा अग्नीघ्र के पहले और सबसे बड़े पुत्र नाभि को भारत के क्षेत्र मिले। समुद्र के उत्तर तथा हिमालय के दक्षिण में भारतवर्ष स्थित है। इसका विस्तार 9 हजार योजन है। इसमें 7 कुल पर्वत हैं : महेन्द्र, मलय, सह्य, शुक्तिमान, ऋक्ष, विंध्य और पारियात्र।

भारतवर्ष के 9 खंड है- इन्द्रद्वीप, कसेरु, ताम्रपर्ण, गभस्तिमान, नागद्वीप, सौम्य, गन्धर्व और वारुण तथा यह समुद्र से घिरा हुआ द्वीप उनमें नौवां है। मुख्य नदियां- सिंधु, सरस्वती, शतद्रू, चंद्रभागा, वेद, स्मृति, नर्मदा, सुरसा, तापी, पयोष्णी, निर्विन्ध्या, गोदावरी, भीमरथी, कृष्णवेणी, कृतमाला, ताम्रपर्णी, त्रिसामा, आर्यकुल्या, ऋषिकुल्या, कुमारी आदि नदियां जिनकी सहस्रों शाखाएं और उपनदियां हैं। इस संपूर्ण क्षेत्र में हिमायल के सभी राज्य और देश समाहित है।
8. आर्यावर्त : बहुत से लोग भारतवर्ष को ही आर्यावर्त मानते हैं जबकि यह भारत का एक हिस्सा मात्र था। वेदों में उत्तरी भारत को आर्यावर्त कहा गया है। आर्यावर्त का अर्थ आर्यों का निवास स्थान। ऋग्वेद में आर्यों के निवास स्थान को 'सप्तसिंधु' प्रदेश कहा गया है। ऋग्वेद के नदीसूक्त (10/75) में आर्यनिवास में प्रवाहित होने वाली नदियों का वर्णन मिलता है, जो मुख्‍य हैं:- कुभा (काबुल नदी), क्रुगु (कुर्रम), गोमती (गोमल), सिंधु, परुष्णी (रावी), शुतुद्री (सतलज), वितस्ता (झेलम), सरस्वती, यमुना तथा गंगा। उक्त संपूर्ण नदियों के आसपास और इसके विस्तार क्षेत्र तक आर्य रहते थे और आर्यो ने से ही होता है।
9. तिब्बत था त्रिविष्टप : जब प्रलय का जल नीचे उतरा तो राजा वैवस्वत मनु अर्थात श्राद्धदेव की नौका त्रिविष्टप में उतरी। कैलाश पर्वत नहीं पर है। राजा मनु की नाव गोरी-शंकर के शिखर से होते हुए नीचे उतरी। गोरी-शंकर जिसे एवरेस्ट की चोटी कहा जाता है। तिब्बत में धीरे-धीरे जनसंख्या वृद्धि और वातावरण में तेजी से होते परिवर्तन के कारण वैवस्वत मनु की संतानों ने अलग-अलग भूमि की ओर रुख करना शुरू किया। जो हिमालय के इधर फैलते गए उन्होंने ही अखंड भारत की सम्पूर्ण भूमि को ब्रह्मावर्त, ब्रह्मार्षिदेश, मध्यदेश, आर्यावर्त एवं भारतवर्ष आदि नाम दिए। यही वेद लाए और यही लोग योग भी लाए। तिब्बत प्राचीन काल से ही योगियों और सिद्धों का घर माना जाता रहा है। यहीं पर 84 सिद्धों की परंपरा विद्यामान है। मनीपा पहले सिद्ध थे।

10. उत्तराखंड का विस्तार था नेपाल तक : जब नेपाल नाम का अस्तित्व भी नहीं था उसके हजारों वर्ष पूर्व से ही भारतखंड विद्यमान है जिसमें उत्तराखंड, लद्दाख, कश्मीर आदि कई हिमालयी क्षेत्र भारत के अंतर्गत ही आते थे। नेपाल पर कभी राजा हिमवान का शासन था तो बाद में उत्तराखंड के कुछ राजाओं का शासन था।

भारत में ऋषिकेश और हरिद्वार को योग की राजधानी माना जाता है।



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