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बल्लेबाजों के दम पर 'विश्वकप'

टीम इंडिया विश्वकप भारत सीमान्त सुवीर
- सीमान्त सुवीर

टीम इंडिया के उपमहाद्वीप में 19 फरवरी से शुरू होने जा रहे विश्वकप को जीतने की प्यास बढ़ती ही जा रही है, यह बात बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में चल रहे चार दिवसीय शिविर में खिलाड़ियों के जोश को देखकर आसानी से समझा जा सकता है। हर खिलाड़ी तनावमुक्त है और मस्ती के मूड में है। यही नहीं उनमें कुछ कर गुजरने का जज्बा पूरे शबाब पर है।
PTI

पिछले विश्वकप में भारत : 2007 के विश्वकप के पहले राउंड में भारतीय टीम बाहर हो गई थी और इसके साथ ही भारतीय क्रिकेटप्रेमियों के लिए वर्ल्डकप खत्म हो गया था। वेस्टइंडीज में क्या हो रहा था, कौन जीत रहा था और कौन बाहर हो रहा था, इससे कोई सरोकार नहीं था। हाँ, आज उन्हें सिर्फ ये याद है तो ये कि 2007 के क्रिकेट विश्वकप को ऑस्ट्रेलिया ने जीतकर 'हैट्रिक' बनाई थी। आज किसी से आप पूछें कि ऑस्ट्रेलिया ने फाइनल में किसे और कितने रनों से हराया था तो उसका उत्तर बहुत कम लोग दे पाएँगे।

1 लाख करोड़ रुपए का सट्‍टा : गुजरे हुए पलों को याद करने की बनिस्बत बेहतर होगा कि हम आने वाले वक्त के बारे में सकारात्मक सोच के साथ बात करें। पता चला है इस विश्वकप पर 1 लाख करोड़ रुपए का सट्‍टा लगने जा रहा है। सटोरियों की फेवरेट 'टीम इंडिया' है और यदि धोनी के धुरंधरों के हाथों में चमचमाती विश्वकप की ट्रॉफी हो तो आप आश्चर्य मत करियेगा।

सपाट विकेटों पर चलता है वीरू का बल्ला : दरअसल टीम इंडिया की बल्लेबाजी आज की तारीख में दीगर सभी टीमों पर भारी पड़ती है। सब जानते हैं कि भारत, श्रीलंका और बांग्लादेश के सपाट विकेटों पर वीरेन्द्र सहवाग का बल्ला कैसी आग उगलता है। युवराज और महेन्द्रसिंह धोनी अपने 'रंग' में आ जाएँ तो वे किसी भी गेंदबाज के हुनर को 'बदरंग' करने का माद्दा रखते हैं।

यूसुफ पठान में छक्के छुड़ाने का माद्दा : पिछले माह अफ्रीका की सरजमीं पर यूसुफ पठान ऑलराउंडर के रूप में चमके और वे धोनी की सेना के सबसे बड़े योद्धा के रूप में उभरकर सामने आए हैं। अपनी ताकतवर बल्लेबाजी से पठान अफ्रीका के गेंदबाजों के छक्के छुड़ाने का कारनामा कर चुके हैं और खुद धोनी भी मानते हैं कि विश्वकप में यूसुफ के बल्ले का चलना बहुत जरूरी है। आज पठान भारतीय टीम में फिनिशर की भूमिका बहुत जिम्मेदारी के साथ‍ निभा रहे हैं।

सचिन बने देश की धड़कन : इन सबसे इतर सचिन तेंडुलकर ने भी इस विश्वकप के लिए काफी तैयारियाँ की हैं। सचिन जानते हैं कि 'अभी नहीं तो कभी नहीं' का मामला है और जब अपने दर्शकों के सामने खेलने की बात हो तो वे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देने की कोशिश करते हैं। सचिन आज देश की धड़कन बन चुके हैं और उनकी खेल प्रतिभा को पूरा देश पलकों पर सजाकर रखता है। यदि सचिन अपने मूड़ में आ गए तो फिर सारे समीकरण बदल जाएँगे। कुल मिलाकर बात फकत इतनी है कि आज बल्ले के दम पर टीम इंडिया का विश्वकप जीतने का दावा सबसे प्रबल है।