25 साल की फरारी खत्म! चारा घोटाले का सबसे शातिर आरोपी लखनऊ रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार
Fodder Scam Accused Arrested Lucknow: चर्चित चारा घोटाले (Fodder Scam) में पिछले 25 वर्षों से कानून की आँखों में धूल झोंक रहे एक मुख्य आरोपी को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने धर दबोचा है। तकनीकी और खुफिया निगरानी के दम पर सीबीआई ने आरोपी सत्येंद्र कुमार को उत्तर प्रदेश के लखनऊ चारबाग रेलवे स्टेशन पर उस वक्त दबोच लिया, जब वह ट्रेन से उतर रहा था। गिरफ्तारी के बाद एजेंसी उसे ट्रांजिट रिमांड पर रांची लेकर रवाना हो गई है, जहाँ उसे विशेष सीबीआई अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा।
फर्जी कागजों पर खड़ी की थी कंपनी
जांच के अनुसार, आरोपी सत्येंद्र कुमार और उसके सहयोगी दिनेश राय ने रांची के प्रसिद्ध संस्थान बीआईटी मेसरा (BIT Mesra) से बी-फार्मा की पढ़ाई की थी। इसके बाद दोनों ने मिलकर कागजों पर एक फर्जी दवा निर्माण कंपनी बनाई।
आरोप है कि इसी फर्जी फर्म के माध्यम से उन्होंने बिहार के पशुपालन विभाग को 10 करोड़ रुपए से अधिक की दवाओं की फर्जी आपूर्ति दिखाई और बिना एक भी गोली सप्लाई किए सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये डकार लिए। इस मामले में 2001 में ही चार्जशीट दाखिल कर दी गई थी, तभी से सत्येंद्र कानून की पकड़ से दूर था।
नेपाल में छिपकर बनाया नया ठिकाना, ऐसे बिछाया गया जाल
- नेपाल कनेक्शन : गिरफ्तारी से बचने के लिए सत्येंद्र ने पटना स्थित अपना पुराना घर हमेशा के लिए छोड़ दिया था। लंबी फरारी के दौरान उसने नेपाल में शरण ली और वहीं रहकर दवा का नया कारोबार शुरू कर दिया था।
- इंटेलिजेंस इनपुट : सीबीआई की भ्रष्टाचार निवारण शाखा (एसीबी), रांची की टीम को पुख्ता सूचना मिली थी कि आरोपी मध्य प्रदेश के गुना से ट्रेन में सवार होकर उत्तर प्रदेश की ओर आ रहा है।
- फिल्मों जैसा ऑपरेशन : इनपुट मिलते ही सीबीआई की टीम हरकत में आ गई। लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-3 पर सादे कपड़ों में सीबीआई के अधिकारी पहले से ही मुस्तैद थे। जैसे ही ट्रेन रुकी, अधिकारियों ने बोगी के अंदर ही आरोपी को पहचान लिया और दबोच लिया।
क्या था बहुचर्चित चारा घोटाला?
यह घोटाला एकीकृत बिहार के समय पशुपालन विभाग से जुड़ा है, जो 1990 के दशक में सामने आया था। वर्ष 1996 में सीबीआई ने इसकी औपचारिक जाँच शुरू की थी। इस बहुचर्चित घोटाले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव सहित कई बड़े राजनेता, कई वरिष्ठ अधिकारी और सप्लायर पहले ही दोषी ठहराए जा चुके हैं और सजा काट रहे हैं। 25 साल लंबी लुका-छिपी के बाद आखिरकार सत्येंद्र कुमार कानून शिकंजे में आ ही गया। अब उसे रांची की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।

