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यूएन अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अमेरिका के हटने के बावजूद अपना दायित्व निभाने के लिए प्रतिबद्ध

Written By UN
Updated: शुक्रवार, 9 जनवरी 2026 (19:41 IST)
United States : शीर्षतम यूएन अधिकारी एंतोनियो गुटेरेश ने संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा संयुक्त राष्ट्र की अनेक संस्थाओं व निकायों से अपनी भागेदारी वापिस लिए जाने के निर्णय पर खेद व्यक्त किया है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा है कि यूएन प्रणाली अपने सभी तयशुदा अधिदेशों (Mandates) के दायित्व का निर्वहन करती रहेगी।
 
यूएन प्रमुख के प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने गुरुवार को एक वक्तव्य जारी किया है, जिसमें ध्यान दिलाया गया है कि संयुक्त राष्ट्र के नियमित व शान्ति रक्षा बजट के लिए निर्धारित योगदान, यूएन चार्टर के तहत सभी सदस्य देशों के लिए एक क़ानूनी दायित्व है, जिनमें संयुक्त राज्य अमेरिका भी है। इन योगदानों को यूएन महासभा द्वारा स्वीकृति प्रदान की जाती है। 
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रम्प ने बुधवार रात को कार्यकारी विभागों व एजेंसियों को बड़ी संख्या में अन्तरराष्ट्रीय संगठनों, सन्धियों व समझौतों से बाहर निकलने के लिए तत्काल क़दम उठाने का आदेश जारी किया था। अमेरिकी सरकार ने ऐसी संस्थाओं में अमेरिकी भागेदारी को देश के हितों के विपरीत क़रार दिया है। 
 
ज्ञापन के अनुसार, इस निर्णय का संयुक्त राष्ट्र की 31 एजेंसियों व संस्थाओं पर असर होगा :
यूएन जनसंख्या कोष (UNFPA)- यह एजेंसी मातृत्व व बाल स्वास्थ्य प्रयासों को समर्थन देने के साथ-साथ यौन व लिंग-आधारित हिंसा से निपटने के लिए प्रयासरत है।
 
जलवायु परिवर्तन पर यूएन फ़्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC)- जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने पर लक्षित सन्धि। यूएन लोकतंत्र कोष- इसके ज़रिए लोकतंत्र के प्रसार के लिए नागरिक समाज की अगुवाई में परियोजनाओं को समर्थन दिया जाता है।
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न्यूयॉर्क मुख्यालय व अन्य स्थानों पर यूएन सचिवालय के अन्य कार्यालयों पर भी इस निर्णय का असर होगा, जैसे कि सशस्त्र टकरावों में बच्चों की रक्षा, यौन हिंसा का युद्ध के औज़ार के रूप में इस्तेमाल के अन्त के लिए समर्पित कार्यालय।
 
अमेरिकी सरकार द्वारा जारी की गई सूची में 5 में से 4 क्षेत्रीय आयोगों से हटने का भी उल्लेख किया है, जिन्हें बहुपक्षीय सहयोग के लिए अहम माना जाता है : एशिया-प्रशान्त, पश्चिमी एशिया, अफ़्रीका, और लातिन अमेरिका व कैरीबियाई क्षेत्र के लिए आयोग।
 
ज्ञापन में कहा गया है कि यूएन संस्थाओं से बाहर निकलने का अर्थ है, उनमें भागेदारी और उस हद तक वित्तीय योगदान पर विराम, जितना क़ानून में अनुमति दी गई हो।
 
कामकाज जारी रहेगा : महासचिव
यूएन महासचिव ने ज़ोर देकर कहा है कि अमेरिका की इस घोषणा के बावजूद, इस विश्व संगठन का कामकाज जारी रहेगा। संयुक्त राष्ट्र की सभी संस्थाएं, सदस्य देशों द्वारा प्रदत्त उनके अधिदेशों को लागू करने के लिए काम जारी रखेंगी। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र उन सभी लोगों के लिए उत्तरदायी है, जो हम पर निर्भर हैं। हम संकल्प के साथ अपने अधिदेशों का पालन करना जारी रखेंगे।
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यूएन चार्टर के तहत, संगठन के नियमित व शान्तिरक्षा बजट को यूएन महासभा से स्वीकृत करती है और इन्हें सभी सदस्य देशों के लिए क़ानूनी रूप से बाध्यकारी माना जाता है। ग़ौरतलब है कि यूएन महासभा में, संयुक्त राष्ट्र के सभी 193 सदस्य देशों को समान दर्जा हासिल है।
 
वर्ष 2026 में, यूएन महासभा ने 3.45 अरब डॉलर के नियमित बजट को मज़ूरी दी है, जो कि अतीत के वर्षों की तुलना में एक बड़ी कटौती को दर्शाता है। इस बजट में वित्तीय संसाधनों में 15 प्रतिशत और कर्मचारियों में 19 फ़ीसदी की कटौती की गई है।
 
जलवायु सहयोग को झटका
जलवायु परिवर्तन मामलों के लिए यूएन संस्था (UNFCCC) के कार्यकारी सचिव साइमन स्टील ने अमेरिका द्वारा इस कन्वेंशन से पीछे हटने की घोषणा के बाद अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि यह निर्णय वैश्विक जलवायु सहयोग से एक क़दम पीछे खींचने जैसा है।
 
उन्होंने अलग से जारी किए गए अपने वक्तव्य में कहा कि जलवायु परिवर्तन पर यूएन फ़्रेमवर्क कन्वेंशन और पेरिस समझौते को आकार देने में संयुक्त राज्य अमेरिका ने अहम भूमिका निभाई, चूंकि ये दोनों ही पूर्ण रूप से उसके राष्ट्रीय हितों में हैं।
 
UNFCCC प्रमुख के अनुसार, जब अन्य सभी देश आगे एक साथ आगे बढ़ रहे हैं, वैश्विक नेतृत्व, जलवायु सहयोग और विज्ञान से पीछे हटने के लिए उठाया गया यह क़दम, केवल अमेरिकी अर्थव्यवस्था, रोज़गारों, जीवन मानकों को ही नुक़सान पहुंचाएगा।
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साइमन स्टील ने आगाह किया कि वनों में आग, बाढ़, शक्तिशाली तूफ़ान, सूखे, समेत अन्य चरम मौसम घटनाएं गहन होती जा रही हैं और ऐसे में इस निर्णय से अमेरिका कम सुरक्षित व कम समृद्ध हो जाएगा।
 
UNFCCC कार्यकारी सचिव ने कहा कि उनका संगठन अपने अथक प्रयास जारी रखेगा और भविष्य में इस कन्वेंशन में फिर से शामिल होने के दरवाज़े, अमेरिका के लिए खुले हैं, जैसा कि पहले पेरिस समझौते के साथ हुआ था।

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