शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2026
  1. समाचार
  2. मुख्य ख़बरें
  3. UN News
  4. Severe weather in Gaza
Written By UN
Last Modified: शुक्रवार, 2 जनवरी 2026 (18:38 IST)

ग़ाज़ा में विकट मौसम, अमानवीय परिस्थितियों के बीच एक और बच्चे की मौत

Severe weather in Gaza
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) के अनुसार, ग़ाज़ा में इस महीने एक और बच्चे की मौत हुई है, जिससे दिसम्बर में मृत बच्चों की संख्या बढ़कर 6 हो गई है। यहां ठंड, बारिश और इसराइल-हमास युद्ध के कारण उपजी अमानवीय परिस्थितियां, मासूम बच्चों की ज़िन्दगियों को निगल रही हैं। इन हालात के बीच, ग़ाज़ा में मानवीय सहायता एजेंसियों ने इसराइली प्रशासन से अपील की है कि राहत कार्य में जुटे अन्तरराष्ट्रीय ग़ैर-सरकारी संगठनों के लाइसेंस 1 जनवरी से रद्द होने के निर्णय पर पुनर्विचार किया जाना होगा। 
 
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ़) के अनुसार, 27 दिसम्बर को पश्चिमोत्तर ग़ाज़ा सिटी के सुदानियेह इलाक़े में 7 वर्षीय अता माई की भीषण बाढ़ के दौरान डूबने से मौत हो गई, जहां वह आन्तरिक रूप से विस्थापित लोगों के एक अस्थाई शिविर में रह रहा था।
मध्य पूर्व और उत्तरी अफ़्रीका देशों के लिए क्षेत्रीय निदेशक एडुअर्ड बेग़बेडर ने कहा कि अता उन बच्चों में है, जो कठोर सर्दी और सुरक्षित आश्रयों की भारी कमी” के कारण जान गंवा रहे हैं। उन्होंने बताया कि विस्थापन शिविरों का दौरा करने वाली टीमों ने ऐसी भयावह स्थितियां देखीं, जिन्हें किसी भी बच्चे द्वारा नहीं झेला जाना चाहिए। यहां अनेक तम्बू या तो उड़ चुके हैं या पूरी तरह टूट चुके हैं।
 
यूनीसेफ़ ने बताया कि अता के सभी भाई-बहन 10 वर्ष से कम उम्र के हैं और युद्ध के दौरान अपनी मां को पहले ही खो चुके हैं। यूएन एजेंसी द्वारा परिवार को कम्बल, तिरपाल और मनो-सामाजिक सहायता सहित ज़रूरी राहत सामग्री मुहैया कराया जा रहा है और और उनकी अन्य ज़रूरतों का आकलन हो रहा है। अता के अलावा, इस महीने कम से कम 5 अन्य बच्चों की भी इसी तरह की कठोर परिस्थितियों के कारण मौत हो चुकी है।
 
बिगड़ती आश्रय स्थिति
ग़ाज़ा में आश्रय स्थलों की स्थिति बेहद गम्भीर बनी हुई है, जहां 19 लाख से अधिक लोग विस्थापित हैं और आश्रय सामग्री की आपूर्ति बेहद सीमित है। यहां जर्जर तम्बुओं या अस्थाई ढांचों में रह रहे परिवारों को लगातार बारिश, तेज़ हवाओं और जमा देने वाली ठंड का सामना करना पड़ रहा है।
संयुक्त राष्ट्र के मानवीय समन्वय कार्यालय (OCHA) ने मंगलवार को बताया कि हालिया बारिश के कारण अचानक बाढ़ आई है, जिससे निचले इलाक़ों, तटीय क्षेत्रों और कमज़ोर ढांचों में रह रहे लोग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। साथ ही ख़ान युनिस के अल-मवासी क्षेत्र में समुद्री पानी फिर से विस्थापित परिवारों के तम्बुओं में घुस गया है, जिससे कई आश्रय स्थल रहने लायक नहीं बचे हैं।
 
लगातार हो रही बारिश के कारण, युद्ध के कारण पहले ही विस्थापित हो चुके अनेक परिवारों को अपने सामान के भीग जाने के बाद ऊंचे इलाक़ों की ओर शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है। OCHA ने बताया कि इस क्षेत्र में तेज़ हवाओं ने हालात और बिगाड़ दिए हैं, जहां अनेक तम्बू और अस्थाई ढांचे या तो पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं या गम्भीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। ग़ाज़ा पट्टी में बारिश की वजह से अस्थाई शरण स्थलों में रह रहे विस्थापितों के लिए नई चुनौतियां उपजी हैं।
 
कठिन मौसम के बीच राहत प्रयास 
दिसम्बर की शुरुआत से अब तक 18 आवासीय इमारतें पूरी तरह ढह चुकी हैं, जबकि 110 से अधिक इमारतें आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त होने की वजह से हज़ारों लोगों के जीवन के लिए ख़तरा बनी हुई हैं। यूनीसेफ़ ने कहा कि यह त्रासदी ग़ाज़ा के सबसे अधिक प्रभावित इलाक़ों में बच्चों के लिए अत्यधिक असुरक्षा को उजागर करती है, जहां घरों और जल-निकासी व्यवस्था का लगभग पूर्ण विनाश हो चुका है और परिवार खुले मौसम की मार झेलने को मजबूर हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब बीते एक सप्ताह से हो रही मूसलाधार बारिश, तेज़ हवाओं और कड़ाके की ठंड ने लगभग एक लाख परिवारों को प्रभावित किया है। वहीं मौसम विभाग द्वारा और बारिश तथा तापमान में और गिरावट की चेतावनी दिए जाने के साथ हालात बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।
 
यूनीसेफ़ और उसके मानवीय सहायता साझेदार संगठन, हज़ारों प्रभावित परिवारों को जीवनरक्षक सहायता प्रदान कर रहे हैं। इसमें अस्थाई पानी की पाइपलाइन लगाना, स्वच्छता सामग्री, तिरपाल, कम्बल और गरिमा किट वितरित करना, शौचालयों तक पहुंच सुनिश्चित करना और सीवर लाइनों की सफ़ाई व पुनर्बहाली जैसे कार्य शामिल हैं।
 
यूनीसेफ़ के अनुसार, भारी बारिश से हालात इसलिए और बिगड़ रहे हैं क्योंकि सीवेज पम्प और जल निकासी व्यवस्था को बनाए रखने के लिए कहीं अधिक मात्रा में ईंधन की आवश्यकता पड़ रही है।  उदाहरण के तौर पर शेख़ रदवान लैगून में पानी का स्तर 1.8 मीटर से बढ़कर 2.2 मीटर हो गया है और इस बढ़ते स्तर को रोकने के लिए, हर दिन 7 हज़ार लीटर ईंधन की आवश्यकता पड़ रही है।
 
सहायता संगठनों पर संकट
इस बीच, अगले वर्ष 1 जनवरी से, ग़ाज़ा में कार्यरत 37 अन्तरराष्ट्रीय ग़ैर-सरकारी संगठनों (INGOs) के लाइसेंस रद्द होने का ख़तरा है। इनमें नॉर्वेजियन शरणार्थी परिषद समेत अनेक प्रमुख यूएन मानवीय सहायता साझेदार भी शामिल हैं, जो गम्भीर कुपोषण से जूझ रहे बच्चों के लिए पोषण केन्द्र चला रहे हैं।
 
संयुक्त राष्ट्र और मानवीय सहायता साझेदारों ने आगाह किया है कि यदि इन संगठनों को काम बन्द करना पड़ा, तो ग़ाज़ा की हर 3 में से एक स्वास्थ्य सुविधा बन्द हो जाएगी। उनके मुताबिक़, नई पंजीकरण व्यवस्था मानवीय कार्यों को गम्भीर रूप से ख़तरे में डालती है।  
सहायता एजेंसियों ने बताया कि नई प्रणाली अस्पष्ट, मनमाने और अत्यधिक राजनैतिक मानदंडों पर आधारित है। ये ऐसी शर्तें थोपती हैं, जिन्हें मानवीय संगठन बिना अन्तरराष्ट्रीय क़ानूनी दायित्वों का उल्लंघन किए या मूल मानवीय सिद्धान्तों से समझौता किए पूरा नहीं कर सकते।
 
मानवतावादी संगठनों ने आगाह किया है कि यदि इसराइल ने अपने इस फ़ैसले पर पुनर्विचार नहीं किया तो अनेक संगठनों को पंजीकरण से वंचित कर दिया जाएगा और 60 दिनों के भीतर उनके राहत कार्य बन्द हो सकते हैं।
ये भी पढ़ें
Pakistan-चीन की नजदीकियां, जयशंकर को बलोच नेता का खत, किस बात को लेकर किया आगाह