क़ाबिज़ फिलिस्तीनी इलाक़े में यूएन मानवतावादी एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि यदि इसराइल ने सहायता आपूर्ति व्यवस्था से बाधाओं को तुरन्त दूर नहीं किया तो जीवनरक्षक राहत अभियान के लिए जोखिम पैदा हो सकता है। बताया गया है कि नए इसराइली अवरोधों से अन्तरराष्ट्रीय ग़ैर सरकारी संगठनों का कामकाज ठप हो जाने की आशंका है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अन्तरराष्ट्रीय ग़ैर-सरकारी संगठनों के लिए इस वर्ष एक नई पंजीकरण प्रणाली शुरू की गई थी, जो कि चिन्ता का विषय बन गई है। सहायता संगठनों का कहना है कि यह प्रक्रिया अस्पष्ट है, राजनीतिकरण का शिकार है और मानवीय सहायता सिद्धान्तों का उल्लंघन किए बिना इसे पूरा कर पाना असम्भव है।
यूएन मानवतावादी टीम ने अपने वक्तव्य में अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया है कि इसराइली प्रशासन पर इस क़दम को वापस लेने का दबाव डाला जाना होगा, चूंकि इसे मानवतावादी कार्यों में बाधाएं पेश आ रही हैं, विशेष रूप से ग़ाज़ा पट्टी में। वर्तमान नियमों के तहत दिसम्बर के अन्त तक बड़ी संख्या में संगठनों के पंजीकरण समाप्त होने का जोखिम है, जिसके कुछ ही हफ़्तों बाद उनका कामकाज ठप हो जाएगा।
वक्तव्य में आगाह किया गया है कि यदि इन संगठनों को बाहर निकाला गया, तो मानवीय सहायता अभियान नहीं बच पाएगा। अन्तरराष्ट्रीय ग़ैर-सरकारी संगठन, यूएन एजेंसियों और फ़लस्तीनी साझेदारों के साथ मिलकर इस क्षेत्र में, प्रति वर्ष 1 अरब डॉलर तक की सहायता मुहैया कराई जाती है।
लाखों डॉलर मूल्य की खाद्य सामग्री, दवा, स्वच्छता सामग्री व आश्रय के लिए सामान ग़ाज़ा के बाहर फंसा हुआ है और ज़रूरतमन्द परिवारों तक नहीं पहुंच पा रहा है। यूएन मानवतावादी टीम की यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब नाज़ुक युद्धविराम के बीच आम फिलिस्तीनी सर्दी के मौसम में कठिन हालात में जीवन गुज़ार कर रहे हैं।
अहम सेवाओं पर असर
सहायता संगठनों ने ज़ोर देकर कहा है कि अन्तरराष्ट्रीय ग़ैर सरकारी संगठनों को यदि अपना कामकाज रोकने के लिए मजबूर होना पड़ा, तो उसकी भरपाई यूएन या अन्य स्थानीय समूह नहीं कर पाएंगे। इसराइली प्रशासन ने पहले से ही फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए यूएन एजेंसी (UNRWA) के कामकाज को सीमित कर दिया है।
ग़ाज़ा में बुनियादी ढांचे को बनाए रखने के लिए इन संगठनों का समर्थन बहुत आवश्यक है, जो फ़ील्ड अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य क्लीनिक को संचालित करते हैं, स्वच्छ जल व साफ़-सफ़ाई सेवाओं को सुनिश्चित करते हैं, आपात आश्रय के लिए सामान वितरित करते हैं और गम्भीर कुपोषण का शिकार बच्चों को उपचार मुहैया कराते हैं।
इन संगठनों के बंद होने की स्थिति में ग़ाज़ा में हर 3 में से 1 स्वास्थ्य केन्द्र के तुरन्त बंद हो जाने का जोखिम है, जिससे हज़ारों मरीज़ों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं समाप्त हो सकती हैं।
मानवीय सहायताकर्मियों ने इस विषय में इसराइली प्रशासन को अपनी चिन्ताओं से अवगत कराया है और इस समस्या का समाधान ढूंढने के प्रयास किए गए हैं, लेकिन फ़िलहाल कोई हल नहीं निकल पाया है और एनजीओ के कामकाज के ठप होने की आशंका गहरा रही है।