क़दमों की आहट

WD| पुनः संशोधित बुधवार, 4 सितम्बर 2013 (11:03 IST)
FILE
बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैं,
तुझे ऐ ज़िंदगी हम दूर से पहचान लेते हैं
तुझे घाटा न होने देंगे कारोबार-ए-उल्‍फ़त में,
हम अपने सर तेरा ऐ दोस्‍त हर इल्‍ज़ाम लेते हैं।

-फ़िराक़ गोरखपुरी


और भी पढ़ें :