पुणे में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया नीरज चोपड़ा के नाम पर स्टेडियम का उद्घाटन

Last Updated: शुक्रवार, 27 अगस्त 2021 (21:42 IST)

नई दिल्ली: रक्षा मंत्री ने शुक्रवार को कहा कि सरकार देश में खेलों और खिलाड़ियों को आगे बढाने की दिशा में अनेक कदम उठा रही है और उनका सपना है कि भारत खेल प्रधान देश बने और ओलंपिक का आयोजन करे।

रक्षा मंत्री ने टोक्यो ओलंपिक में भाला फेंक स्पर्धा में देश को स्वर्ण पदक दिलाने वाले सेना के सूबेदार नीरज चोपड़ा के नाम पर स्टेडियम का उद्धाटन करने के बाद कहा कि सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में खेलों में गुणवत्ता बढ़ाने का प्रयास किया है। “ मैं समझता हूँ ये केवल सरकारी स्कीम नहीं, बल्कि एक आंदोलन है, जिसे हमें और आगे लेकर जाना है। हमें अभी इन प्रयासों से सफलता के और नए आयाम हासिल करने हैं। ”
उन्होंने कहा कि इन प्रयासों का परिणाम पिछले कुछ वर्षों से दिखना शुरू हो चुका है। वर्ष 2014 तथा 2018 के राष्ट्रमंडल खेलों में देश ने क्रमशः 64 और 66 पदकों के साथ 5 वां और तीसरा स्थान हासिल किया।

सूबेदार नीरज चोपड़ा की उपलब्धि का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “ किसी भी एथलीट के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण क्षण वो होता है जब वह तिरंगा पकड़ता है। मैं समझता हूँ कि जब सूबेदार नीरज चोपड़ा को स्वर्ण पदक देते समय जब टोक्यो में राष्ट्र गान बजा, तब एक-एक भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा और आँखें ख़ुशी से नम हो गई थी। ”
उन्होंने कहा कि सरकार खेलों और खिलाड़ियों को आगे बढाने के लिए अनेक कदम उठा रही है। उन्होंने कहा, “ यह हमारे लिए भी गर्व का विषय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी स्वयं खेल में रूचि लेते हैं । यह उनके नेतृत्व में हमारी सरकार का खेल और हमारे खिलाड़ियों के प्रति स्नेह और प्रतिबद्धता दर्शाता है। मेरा यह स्वप्न है कि हम एक खेल प्रधान देश बने जो ओलंपिक में शीर्ष देशों की श्रेणी में आए। मैं उम्मीद करता हूं कि आप सब इसमें मेरा साथ अवश्य देंगे। मैं उस पल के लिए भी स्वप्न देख रहा हूँ, जब भारत को ओलंपिक का आयोजन करने का मौका मिलेगा। ”
श्री सिंह ने कहा कि रक्षा विशेष रूप से सशस्त्र सेनाओं और खेलों के संबंध का उल्लेख करते हुए कहा , “ यह खेल ही था जिसने एक शिवा नाम के बच्चे को छत्रपति शिवाजी महाराज बना दिया। गुरु रामदास, दादोजी कोंड देव और माता जीजाबाई ने बचपन से ही खेल-खेल में ऐसी शिक्षाएँ उन्हें दीं, जिसने उन्हें एक राष्ट्र-नायक में बदल दिय। खेल इंसान को केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक, व्यावहारिक भावनात्मक और मानसिक रूप से भी सुदृढ़ बनाता है। इसलिए मेरा मानना है, कि एक सैनिक में सच्चा खिलाड़ी, और सच्चे खिलाड़ी में एक सैनिक हमेशा मौजूद होता है। ”
उन्होंने कहा कि भारतीय सेना उसी परंपरा को बखूबी आगे बढ़ा रही है। यह गर्व की बात है कि भारतीय खेल के इतिहास में मेजर ध्यानचंद, कैप्टन मिल्खा सिंह, कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौर और कैप्टन विजय कुमार की परंपरा में अब सूबेदार नीरज चोपड़ा ने भी अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में जोड़ लिया है। साथ ही उन्होंने मुक्केबाज सूबेदार मेजर सतीश ,नायब सूबेदार अविनाश सेबल, नायब सूबेदार दीपक पुनिया, सूबेदार अरोकिया राजीव,नायब सूबेदार विष्णु सरवन्नन , नायब सूबेदार अरुणलाल जाट और नायब सूबेदार अरविंद सिंह के शानदार प्रदर्शन का भी उल्लेख किया।
श्री सिंह ने कहा कि सेना खेल संस्थान विश्व स्तरीय है और इसने अब तक 34 ओलंपियन, राष्ट्रमंडल खेलों के 22 पदक विजेता, एशियाई खेलों के 21 पदक विजेता, युवा ओलंपिक खेलों के 6 पदक विजेता और 13 अर्जुन पुरस्कार विजेता दिए हैं। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि सभी खेलों को समान महत्व दिया जाये।
महिला खिलाड़ियों के टोक्यो ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा , “ हमारे देश की महिलाएं भी लगातार खेल में बेहतर प्रदर्शन कर रही है। आप महिला हाकी टीम और ओलंपिक में पदक जीतने वाली हमारी 3 महिला-खिलाड़ियों का ही उदाहरण ले लीजिये। ”
बाद में उन्होंने ट्वीट कर नीरज चोपड़ा सहित सशस्त्र सेनाओं के सभी ओलंपिक खिलाड़ियों को सम्मानित भी किया और उन्हें शुभकामनाएं भी दी।(वार्ता)



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