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क्यों और कैसे मनाते हैं लोहड़ी पर्व, पढ़ें रोचक जानकारी

शनिवार,जनवरी 11, 2020
lohri 2020
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सिख धर्म के 10वें गुरु गुरु गोविंद सिंह ने धर्म की रक्षा के लिए जो कार्य किया उसे कोई भी नहीं भूला सकता है। गुरु गोविंद सिंह जी ने इसके अलाव सिख धर्म को एक स्थापित संगत बनाया और संपूर्ण देश में गुरुओं के परंपरा को आगे बढ़ाया। आओ जानते हैं उनके ...
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इतिहास में गुरु गोविंदसिंह एक विलक्षण क्रांतिकारी संत व्यक्तित्व है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार गुरु गोविंद सिंह का जन्म पौष माह की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को 1723 विक्रम संवत को हुआ था।
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गुरु तेगबहादुर सिंह का बचपन का नाम त्यागमल था। वे बाल्यावस्था से ही संत स्वरूप गहन विचारवान, उदार चित्त, बहादुर व निर्भीक स्वभाव के थे।
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गुरु तेग बहादुर सिंह जी के 18 अनमोल विचार- किसी के द्वारा प्रगाढ़ता से प्रेम किया जाना आपको शक्ति देता है
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पंज को हिन्दी में पांच कहते हैं अर्थात 'पांच प्यारे।' सिख धर्म में पंज प्यारे कौन थे यह बहुत कम लोग नहीं जानते होंगे। जो नहीं जानते है उनके लिए जानना जरूरी है। कहते हैं कि 'पंज प्यारे' बहुत ही बहादुर पांच लोग होते हैं। आओ जानते हैं कि 'पंज प्यारे' ...
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12 नवंबर 2019 को कार्तिक पूर्णिमा के दिन श्री गुरु नानक देव साहिब का प्रकाशोत्‍सव मनाया जाएगा। गुरु नानक देव का प्रकाशोत्‍सव पर्व पवित्र भावनाओं के साथ मनाया जाने वाला उत्‍सव है।
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लंगर के कई अर्थ है। जहाज, नाव आदि में सफर करने वाले लोग अक्सर लंगर डालकर भोजन आदि कर विश्राम करते थे। दरअसल, लंगर लोहे का वह बहुत बड़ा कांटा जिसे नदी या समुद्र में गिरा देने पर नाव या जहाज एक ही स्थान पर ठहरा रहता है। संभवत: यही से यह शब्द प्रेरित ...
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सिख धर्म के प्रथम गुरु गुरुनानक देवी जी के चार शिष्य थे। यह चारों ही हमेशा बाबाजी के साथ रहा करते थे। बाबाजी ने अपनी लगभग सभी उदासियां अपने इन चार साथियों के साथ पूरी की थी। इन चारों के नाम हैं- मरदाना, लहना, बाला और रामदास के साथ पुरी की थी।
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भादों की अमावस की धुप अंधेरी रात में बादलों की डरावनी गड़गड़ाहट, बिजली की कौंध और वर्षा के झोंके के बीच जबकि पूरा गांव नींद में निमग्न था,
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12 नवंबर को श्री गुरुनानक देवजी का 550वां प्रकाश पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। सिख संप्रदाय में इस पर्व को मनाने की तैयारियां जोर-शोर से चल रही है। इस बार श्री गुरुनानक देवजी के प्रकाश पर्व को देखते हुए पूरे उत्साह के साथ समाज, संगत के लोग भव्य ...
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सिख धर्म के प्रथम गुरु गुरुनानक देवी जी अपने चार साथी मरदाना, लहना, बाला और रामदास के साथ तीर्थयात्रा पर निकल पड़े। ये चारों ओर घूमकर उपदेश देने लगे। कहते हैं कि 1500 से 1524 तक इन्होंने पांच यात्रा चक्र पूरे किए, जिनमें भारत, अफगानिस्तान, फारस और ...
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सिख धर्म के 10 गुरु हुए हैं प्रथम गुरु गुरुनानक देवजी और अंतिम गुरु गुरु गोविंद सिंह जी थे। सिख धर्म ने देश और धर्म की रक्षार्थ अपने प्राणों की आहुति देकर इस देख की आक्रांताओं से रक्षा की है। इसी क्रम ने उन्होंने पांच तख्तों को स्थापित किया था। आओ ...
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अयोध्या में मौजूद गुरुद्वारा ब्रह्मकुंड साहिब के दर्शन करने के लिए देश और दुनिया के कोने-कोने से सिख श्रद्धालु आते हैं। कहते हैं कि सिख समुदाय के पहले गुरु नानकदेव, 9वें गुरु तेग बहादुर और 10वें गुरु गोविंद सिंह ने यहां गुरद्वारा ब्रह्मकुंड में ...
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सिख धर्म के संस्थापक, महान दार्शनिक गुरु, गुरु नानक देव जी से आप सभी परिचित है। आइए जानते हैं उनके 10 खास सिद्धांत...
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गुरु हर राय सिंह जी का जीवन परिचय। गुरु हर राय जी का जन्म पंजाब में हुआ था।
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सिखों के चौथे गुरु श्री गुरु रामदास साहेबजी का जन्‍म कार्तिक वदी 2 को लाहौर की चूना मंडी में हुआ था।
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18 जून 2019, मंगलवार को श्री गुरु हर गोविंद सिंह महाराज का प्रकाश पर्व मनाया जाएगा। इस अवसर पर गुरुद्वारा में कीर्तन दरबार, अखंड पाठ के साथ-साथ अटूट लंगर का आयोजन भी किया जाता है।
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गुरु अर्जन देव का जन्म सिख धर्म के चौथे गुरु, गुरु रामदासजी व माता भानीजी के घर वैशाख वदी 7 को गोइंदवाल (अमृतसर) में हुआ था।
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सिखों के तीसरे गुरु, गुरु अमर दास जी का जन्म अमृतसर के 'बासर के' गांव में पिता तेजभान एवं माता लखमीजी के घर हुआ था।
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