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सिख धर्म के 5वें गुरु, गुरु अर्जन देव का बलिदान दिवस

सोमवार,जून 14, 2021
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सिखों के तीसरे गुरु, गुरु अमर दास जी का जन्म वैशाख शुक्ल 14वीं, 1479 ई. में अमृतसर के 'बासर के' गांव में पिता तेजभान एवं माता लखमीजी के घर हुआ था। गुरु अमर दास जी बड़े आध्यात्मिक चिंतक थे।
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गुरु अंगद साहिब यानी लहणा जी का जन्म तिथि के अनुसार वैसाख वदी 1 को पंजाब के फिरोजपुर में हरीके नामक गांव में हुआ था। उनके पिता श्री फेरू जी एक व्यापारी
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सिख धर्म के दस गुरुओं की कड़ी में प्रथम हैं गुरु नानकदेवजी। भारतीय संस्कृति में गुरु का महत्व आदिकाल से ही रहा है। कबीर साहब जी ने कहा था कि गुरु बिन ज्ञान न होए साधु बाबा। तब फिर ज्यादा सोचने-विचारने की आवश्यकता नहीं है बस गुरु के प्रति समर्पण कर ...
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गुरु अर्जुन देव जी की निर्मल प्रवृत्ति, सहृदयता, कर्तव्यनिष्ठता तथा धार्मिक एवं मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पण भावना को देखते हुए गुरु रामदासजी ने 1581 में पांचवें गुरु के रूप में उन्हें गुरु गद्दी पर सुशोभित किया।
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गुरु तेग बहादुर सिंह एक क्रांतिकारी युग पुरुष थे। विश्व इतिहास में धर्म एवं मानवीय मूल्यों, आदर्शों एवं सिद्धांत की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वालों में गुरु तेग बहादुर साहब का स्थान अद्वितीय है।
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गुरु तेग बहादुर सिंह का जीवन समस्त मानवीय सांस्कृतिक विरासत की खातिर बलिदान था। धर्म उनके लिए सांस्कृतिक मूल्यों और जीवन विधान का नाम था।
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आध्यात्मिक महापुरुष गुरु हर राय जी सिख धर्म के सातवें गुरु थे। उनका जन्म 16 जनवरी, 1630 को हुआ था। वे एक महान योद्धा भी थे।
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गुरु गोविंद सिंहजी एक आध्यात्मिक गुरु थे, जिन्होंने मानवता को शांति, प्रेम, एकता, समानता एवं समृद्धि का रास्ता दिखाया।
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सिख धर्म के 10वें गुरु गुरु गोविंद सिंह ने धर्म की रक्षा के लिए जो कार्य किया उसे कोई भी नहीं भूला सकता है। गुरु गोविंद सिंह जी ने इसके अलावा सिख धर्म को एक स्थापित संगत बनाया और संपूर्ण देश में गुरुओं की परंपरा को आगे बढ़ाया। आओ जानते हैं उनके ...
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श्री गुरु गो‍बिंद सिंह जी का जन्म पौष सुदी 7वीं सन् 1666 को पटना में माता गुजरी जी तथा पिता श्री गुरु तेगबहादुर जी के घर हुआ।
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आपके जीवन के बारे में लिखते समय यह समझ में नहीं आता है कि आपका जीवन किस पक्ष में लिखा जाए। अगर आपको एक पुत्र के रूप में देखा जाए तो
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गुरु गोविंद सिंह जी के दरबार में भाई घनैया जी सेवा करते थे। भाई घनैया जी बहुत निर्मल स्वभाव के थे और गुरु घर में बहुत ही प्यार से सेवा करते थे।
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बिहार राज्य की राजधानी पटना में गुरु गोविंद सिंह जी का जन्म हुआ था। सिख धर्म के नौवें गुरु तेग बहादुर साहब की इकलौती संतान के रूप में जन्मे गोविंद सिंह की माता का नाम गुजरी था।
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गुरु गोविंद सिंह जी द्वारा सचाई के रास्ते पर चलकर जीवन जीने के लिए दिए गए उपदेश आज भी प्रासंगिक है। गुरु गोविंद सिंह 11 ऐसी बातें जिन्हें जानकर आपकी जिंदगी बेहतर हो सकती है।
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गुरु हरराय (Guru Har Rai) का जन्म 16 या 31 जनवरी 1630 को पंजाब के कीरतपुर साहिब में हुआ था। उनके पिता का नाम बाबा गुरदिता जी था जो सिखों के छठे गुरु के पुत्र थे। गुरु हरराय की माता का नाम निहाल कौरजी था। गुरु हरराय उनके पिता के छोटे बेटे थे और उनके ...
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पंजाब का परंपरागत त्योहार लोहड़ी केवल फसल पकने और घर में नए मेहमान के स्वागत का पर्व ही नहीं, यह जीवन में उल्लास बिखेरने वाला उत्सव है।
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लोहड़ी को दुल्ला भट्टी की एक कहानी से भी जोड़ा जाता है। लोहड़ी के सभी गाने दुल्ला भट्टी से ही जुड़े हैं तथा यह भी कह सकते हैं कि लोहड़ी के गानों का केंद्रबिंदु दुल्ला भट्टी को ही बनाया जाता है।
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इतिहास में गुरु गोविंद सिंह एक विलक्षण क्रांतिकारी संत व्यक्तित्व है। गुरु गोविंद सिंह जी सिखों के दसवें गुरु हैं। गुरु नानक देव की ज्योति इनमें प्रकाशित हुई, इसलिए इन्हें दसवीं ज्योति भी कहा जाता है।
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गुरु नानक देव के व्यक्तित्व में दार्शनिक, योगी, गृहस्थ, धर्म सुधारक, समाज सुधारक, कवि, देशभक्त और विश्वबंधु के समस्त गुण मिलते हैं। गुरु नानक देव का जन्म 15वीं सदी में 15 अप्रैल 1469 को उत्तरी पंजाब के
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