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7 अक्टूबर : सिखों के 10वें गुरु, गुरु गोविंद सिंह का शहीदी दिवस

मंगलवार,अक्टूबर 6, 2020
Guru Prophet
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सिखों के 10वें गुरु, गुरु गोविंद सिंह का जन्म पटना साहिब में हुआ था, जहां उनकी याद में एक खूबसूरत गुरुद्वारा भी निर्मित किया गया है। वे सिखों के अंतिम गुरु थे। गुरु गोविंद सिंह जी ने सन् 1699 में खालसा पंथ की स्थापना की थी।
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सिखों के छठवें गुरु हरगोविंद सिंह जी को जब इस बात का आभास हो गया कि अब उनका अंतिम समय निकट आने वाला है तो उन्होंने अपने पौत्र को गद्दी सौंप दी यानी अपने पोते हर राय जी को 'सप्तम्‌ नानक' के रूप में घोषित किया था। उस समय उनकी उम्र मात्र 14 वर्ष की थी।
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सिखों के दूसरे गुरु अंगद देवजी ने उनकी सेवा और समर्पण से प्रसन्न होकर एवं उन्हें सभी प्रकार से योग्य जानकर 'गुरु गद्दी' सौंप दी। इस प्रकार वे सिखों के तीसरे गुरु बन गए।
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अयोध्या कई धर्मों की पुण्य भूमि बन चुकी है। हिन्दू के अलावा जैन, बौद्ध और सिखों की यह पवित्र भूमि है। यहां उक्त चारों भारतीय धर्म से जुड़े पविस्त्र स्थल मौजूद हैं। आओ जानते हैं सिख धर्म के पव्सित्र स्थल ब्रह्मकुण्ड साहिब के बारे में संक्षिप्त ...
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गुरु अर्जन देव साहिब सिख धर्म के 5वें गुरु है। वे शिरोमणि, सर्वधर्म समभाव के प्रखर पैरोकार होने के साथ-साथ मानवीय आदर्शों को कायम रखने के लिए आत्म बलिदान करने वाले एक महान आत्मा थे।
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सिखों के छठवे गुरु, गुरु हर गोविंद सिंह जी का जन्म बडाली (अमृतसर, भारत) में हुआ था। इस वर्ष 6 जून 2020, शनिवार को श्री गुरु हर गोविंद सिंह महाराज का प्रकाश पर्व मनाया जाएगा।
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युद्ध के मैदान में मुगलों के छक्के छुड़ाने में पाइंदे खां की महत्वपूर्ण भूमिका रहती थी। गुरु हरगोविंद सिंह जी को अपने साथी पाइंदे खां पर खुद से ज्यादा भरोसा था।
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बैसाखी पर्व के दिन समस्त उत्तर भारत की पवित्र नदियों में स्नान करने का माहात्म्य माना जाता है अत: इस दिन प्रात:काल नदी में स्नान करना हमारा धर्म है।
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इस वर्ष बैसाखी का पर्व 13 अप्रैल 2020 को मनाया जा रहा है। बैसाखी नाम वैशाख से बना है। भारत त्योहारों का देश है, यहां कई धर्मों को मानने वाले लोग रहते है और सभी धर्मों के अपने-अपने त्योहार है। बैसाखी पंजाब और आसपास के प्रदेशों का सबसे बड़ा त्योहार
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वह ऐतिहासिक क्रांतिकारी दिन था जिस दिन गुरुजी ने धर्म एवं मानवीय मूल्यों की रक्षा, राष्ट्र की विराट धर्मनिरपेक्ष संस्कृति को अक्षुण्ण बनाने के लिए तथा शक्तिशाली अखंड राष्ट्र के निर्माण हेतु
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पूरे देश में श्रद्धालु गुरुद्वारों में अरदास के लिए इकट्ठे होते हैं। मुख्य समारोह आनंदपुर साहिब में होता है, जहां पंथ की नींव रखी गई थी।
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नानक शाही पंचांग के अनुसार वर्ष 2020 में सिखों के नौंवें गुरु, गुरु तेग बहादुर सिंह की जयंती 12 अप्रैल, रविवार को मनाई जा रही है। गुरु तेग बहादुर सिंह एक क्रांतिकारी युग पुरुष थे।
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गुरु तेग बहादुर सिंह का जीवन समस्त मानवीय सांस्कृतिक विरासत की खातिर बलिदान था। धर्म उनके लिए सांस्कृतिक मूल्यों और जीवन विधान का नाम था।
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सिखों के आठवें गुरु हर किशन सिंह जी का जन्म श्रावण मास, कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को सन् 1656 ई. में कीरतपुर साहिब में हुआ था।
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सिखों के छठवे गुरु, गुरु हर गोविंद सिंह जी का जन्म बडाली (अमृतसर, भारत) में हुआ था। वे सिखों के पांचवें गुरु अर्जुन सिंह के पुत्र थे। उनकी माता का नाम गंगा था।
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मंगलवार, 14 जनवरी 2020 को पंजाबी समुदाय का खास त्योहार लोहड़ी मनाया जाएगा। यह पर्व धार्मिक एवं सांस्कृतिक उत्सव का अद्भुत त्योहार है
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सिख धर्म के 10वें गुरु गुरु गोविंद सिंह ने धर्म की रक्षा के लिए जो कार्य किया उसे कोई भी नहीं भूला सकता है। गुरु गोविंद सिंह जी ने इसके अलाव सिख धर्म को एक स्थापित संगत बनाया और संपूर्ण देश में गुरुओं के परंपरा को आगे बढ़ाया। आओ जानते हैं उनके ...
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इतिहास में गुरु गोविंदसिंह एक विलक्षण क्रांतिकारी संत व्यक्तित्व है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार गुरु गोविंद सिंह का जन्म पौष माह की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को 1723 विक्रम संवत को हुआ था।
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गुरु तेगबहादुर सिंह का बचपन का नाम त्यागमल था। वे बाल्यावस्था से ही संत स्वरूप गहन विचारवान, उदार चित्त, बहादुर व निर्भीक स्वभाव के थे।
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