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Sheetala puja 2026: शीतला सप्तमी और अष्टमी: जानें तिथि, महत्व, पूजा विधि और धार्मिक मान्यता

WD Feature Desk
सोमवार, 9 मार्च 2026 (10:15 IST)
Sheetala Saptami-Ashtami festival India: हिंदू धर्म में मान्यता है कि माता शीतला की पूजा करने से चेचक, त्वचा रोग और अन्य संक्रमणों से बचाव होता है। पुराने समय में जब चिकित्सा सुविधाएं सीमित थीं, तब लोग माता शीतला की आराधना कर अपने परिवार और बच्चों के स्वास्थ्य की कामना करते थे। इस बार शीतला सप्तमी का पर्व मंगलवार, मार्च 10, 2026 को तथा शीतला अष्टमी पर्व बुधवार, मार्च 11, 2026 को मनाया जा रहा है।ALSO READ: Sheetala Mata Puja 2026: कब है शीतला अष्टमी का त्योहार? जानिए तिथि, महत्व और पूजा विधि
 
 

शीतला पूजा का धार्मिक महत्व

शीतला सप्तमी और अष्टमी के दिन एक खास परंपरा निभाई जाती है जिसे बसोड़ा या बसोड़ा पूजा कहा जाता है। इस दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता और एक दिन पहले बनाया हुआ ठंडा भोजन माता को भोग लगाया जाता है। इसके बाद वही भोजन प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। यह पर्व खास तौर पर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश और हरियाणा में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। 
 
कई जगहों पर महिलाएं सुबह जल्दी उठकर मंदिर जाती हैं, माता शीतला की पूजा करती हैं और परिवार की सुख-समृद्धि तथा स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करती हैं। आज भी शीतला सप्तमी और अष्टमी का त्योहार हमें स्वच्छता, स्वास्थ्य और संतुलित जीवन का संदेश देता है।
 

शीतला सप्तमी और अष्टमी पर पूजन के शुभ मुहूर्त 2026

 

शीतला सप्तमी मंगलवार, 10 मार्च 2026 को

 
सप्तमी तिथि प्रारम्भ- 09 मार्च 2026 को 11:27 पी एम बजे
सप्तमी तिथि समाप्त- 11 मार्च 2026 को 01:54 ए एम बजे
 
शीतला सप्तमी पूजा मुहूर्त- 06:37 ए एम से 06:26 पी एम
अवधि- 11 घण्टे 50 मिनट्स
 

शीतला अष्टमी बुधवार, 11 मार्च 2026 को

 
अष्टमी तिथि प्रारम्भ- 11 मार्च, 2026 को 01:54 ए एम बजे
अष्टमी तिथि समाप्त- 12 मार्च 2026 को 04:19 ए एम बजे
 
शीतला अष्टमी पूजा मुहूर्त- 06:36 ए एम से 06:27 पी एम
अवधि- 11 घण्टे 51 मिनट्स।
 
 

शीतला सप्तमी और अष्टमी पूजा विधि

1. महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
 
2. माता शीतला की प्रतिमा या तस्वीर के सामने पूजा करें।
 
3. माता को पूरी, हलवा, दही, चावल, मीठा और ठंडा भोजन अर्पित करें।
 
4. धूप-दीप जलाकर आरती करें।
 
5. परिवार की सुख-शांति और स्वास्थ्य की कामना करें।
 

शीतला सप्तमी और शीतला अष्टमी का महत्व

 
1. स्वच्छता का महत्व
माता शीतला की पूजा से पहले घर और आसपास की सफाई की जाती है।
 
2. परिवार की सुख-समृद्धि
माता के भक्त इस दिन परिवार के स्वास्थ्य और खुशहाली के लिए प्रार्थना करते हैं।
 
3. रोगों से रक्षा की मान्यता
माता शीतला को रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है।
 
4. ठंडे भोजन की परंपरा
इस दिन एक दिन पहले बने भोजन को ही माता को भोग लगाया जाता है।
 

शीतला सप्तमी-अष्टमी पर क्या न करें

 
* इस दिन चूल्हा या गैस नहीं जलाते।
* गर्म भोजन नहीं बनाया जाता।
* कई लोग तला-भुना भोजन भी नहीं बनाते।
 

शीतला सप्तमी-अष्टमी-FAQs

 
1. शीतला सप्तमी पर माता को क्या भोग लगाया जाता है?
माता को पूरी, हलवा, दही, चावल, मिठाई और ठंडा भोजन का भोग लगाया जाता है।
 
2. शीतला सप्तमी-अष्टमी किन राज्यों में मनाई जाती है?
यह पर्व खासतौर पर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात में ज्यादा लोकप्रिय है।
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: शीतला अष्टमी पर क्यों खाया जाता है बासी खाना? जानिए इसके पीछे की धार्मिक मान्यता
 

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