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  4. When is Gudi Padwa, what is its significance
Written By WD Feature Desk
Last Updated : बुधवार, 18 मार्च 2026 (16:07 IST)

Gudi padwa 2026: गुड़ी पड़वा कब है, क्या महत्व है इसका?

gudi padwa 2026
Gudi padwa 2026: हिंदू नववर्ष को महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा और हिंदी भाषी क्षेत्रों में नव संवत्सर कहते हैं। इस दिन से विक्रम संवत 2083 प्रारंभ होगा। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से हिंदू कैलेंडर के नए साल की शुरुआत होती है। इस बार अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार गुड़ी पड़वा का पर्व 19 मार्च 2026 गुरुवार को मनाया जाएगा।
 

गुड़ी पड़वा का महत्व:

जीव सृष्‍टि रचना की शुरुआत का दिन मान्यता है कि इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने जीव सृष्टि की रचना की थी।
 
बुराई पर अच्छाई की जीत: पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान राम ने बाली के अत्याचारों से दक्षिण की प्रजा को मुक्ति दिलाई थी। विजय के प्रतीक के रूप में लोगों ने ऊंचे स्थानों पर 'गुड़ी' (विजय पताका) फहराई थी। यह महाराष्ट्र और गोवा में पारंपरिक हिंदू नव वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। 
 
छत्रपति शिवाजी महाराज की विजय: ऐतिहासिक रूप से, गुड़ी पड़वा महान मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा युद्ध जीतने के बाद अपनी प्रजा के साथ विजय उत्सव मनाने की परंपरा से भी जुड़ा है।
 
ऋतु परिवर्तन: यह त्योहार वसंत ऋतु के आगमन और नई फसल की कटाई के समय का भी प्रतीक है, जो प्रकृति में नए जीवन का संचार करता है। यह वसंत ऋतु की शुरुआत का प्रतीक है, जो नई शुरुआत और विकास का समय है।
 

कैसे मनाया जाता है?

गुड़ी फहराना: घर के बाहर एक बांस की लकड़ी पर सुंदर वस्त्र, चांदी या तांबे का कलश, नीम की पत्तियां और शक्कर की माला (गाठी) बांधकर 'गुड़ी' लगाई जाती है। इसे सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
 
प्रसाद: इस दिन नीम की पत्तियों और गुड़ का विशेष मिश्रण प्रसाद के रूप में खाया जाता है। नीम कड़वाहट (दुख) और गुड़ मिठास (सुख) का प्रतीक है, जो सिखाता है कि जीवन में सुख-दुख दोनों का समान महत्व है।
 
पकवान: घरों में विशेष रूप से पूरन पोली और श्रीखंड बनाए जाते हैं।

Edited by Anirudh Joshi