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  4. In which state is the hindu new year ugadi and yugadi celebrated
Written By WD Feature Desk
Last Updated : गुरुवार, 12 मार्च 2026 (16:50 IST)

हिंदू नववर्ष उगादि और युगादि किस प्रदेश में मनाया जाता है?

Pictured is a family celebrating a Hindu festival, with fruit and sweets on a plate.
हिंदू कैलेंडर मुख्य रूप से दो पद्धतियों पर आधारित है: सौर (Solar) और चंद्र-सौर (Luni-Solar)। सौर कैलेंडर में सूर्य की स्थिति के आधार पर नववर्ष मनाया जाता है, जिसे पंजाब में वैसाखी, असम में बिहू, तमिलनाडु में पुथन्डु, उड़ीसा में पणा संक्रांति और पश्चिम बंगाल में नब बरस कहा जाता है।
 
दूसरी ओर, चंद्र गणना के आधार पर नववर्ष की शुरुआत चैत्र प्रतिपदा से होती है, जो पूरे भारत में सर्वाधिक प्रचलित है। इसी चैत्र प्रतिपदा के नववर्ष को दक्षिण भारत के राज्यों, जैसे कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में 'उगादि' या 'युगादि' के नाम से हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। महाराष्ट्र में इसे गुड़ी पड़वा कहते हैं। संक्षेप में, भले ही गणना की पद्धतियां और क्षेत्रीय नाम अलग हों, लेकिन यह पर्व पूरे भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है।
 

दक्षिण भारत का नव-विहान: उगादी और युगादी

जब प्रकृति अपनी पुरानी केंचुल छोड़ नए पत्तों से सजती है, तब दक्षिण भारत के आंगन 'उगादी' और 'युगादी' की खुशबू से महक उठते हैं। यह केवल कैलेंडर की तारीख बदलना नहीं, बल्कि 60 वर्षों के एक भव्य चक्र 'संवत्सर' के नए अध्याय की शुरुआत है।
 

आंध्र और तेलंगाना की अनोखी छटा

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में इसे 'उगादी' के रूप में बड़े चाव से मनाया जाता है। यहाँ के श्री सत्यसाईं जिले का मेडापुरम गाँव अपनी विशिष्ट परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ उत्सव की शुरुआत पूर्व रात्रि में ही हो जाती है, जब गुफा से मंदिर तक देवताओं की भव्य शोभायात्रा निकलती है। इस परंपरा में समावेशिता की सुंदर झलक मिलती है, जहाँ मडिगा समुदाय और अनुसूचित जाति के आठ संरक्षक परिवार मंदिर के प्रतिनिधि बनकर उत्सव की कमान संभालते हैं।
 
अगले दिन सजे-धजे रथ और पारंपरिक बैलगाड़ियाँ गाँव की गलियों में उत्सव का रंग बिखेरती हैं। दोपहर में होने वाली 'पंजु सेवा' भक्ति का अनूठा उदाहरण है, जिसमें भक्त उस मार्ग को स्वच्छ और शुद्ध करते हैं जहाँ से रात में शोभायात्रा गुजरी थी। आरती के साथ इस भक्तिमय अनुष्ठान का समापन होता है।
 

कर्नाटक का 'युगादी' और जीवन का स्वाद

कर्नाटक में इसे 'युगादी' पुकारा जाता है। यहाँ घरों के द्वारों पर 'मुग्गुलु' (रंगोली) और आम के पत्तों के तोरण नए साल का स्वागत करते हैं। इस दिन की सबसे बड़ी विशेषता है 'पचड़ी' नामक व्यंजन। यह केवल एक पकवान नहीं, बल्कि जीवन का दर्शन है। इसमें मीठा, खट्टा, नमकीन, कड़वा, कसैला और तीखा- ये छह स्वाद मिलाए जाते हैं, जो हमें सिखाते हैं कि आने वाला साल सुख-दुख और हर परिस्थिति का मिश्रण होगा।
 

परंपराओं का संगम

चाहे कर्नाटक हो या आंध्र, दिन की शुरुआत पवित्र तेल-स्नान (Abhyangam) और प्रार्थना से होती है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन तेल-स्नान और नीम के पत्तों का सेवन स्वास्थ्य और शुद्धि के लिए अनिवार्य माना गया है।
 
रोचक बात यह है कि जहाँ दक्षिण में उत्सव की धूम होती है, वहीं उत्तर भारत में इसी दिन से चैत्र नवरात्रि का पवित्र अनुष्ठान शुरू होता है। यहाँ भी परंपरा का धागा एक ही है- प्रथम दिन मिश्री के साथ नीम का सेवन करना, जो हमें हमारी जड़ों और स्वास्थ्य के प्रति सचेत करता है।
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