हैप्‍पी रिपब्‍लिक डे: गणतंत्र दिवस की तीन कविताएं

पुनः संशोधित मंगलवार, 21 जनवरी 2020 (18:32 IST)
का मौका पूरे देश के लिए गर्व और गौरव का विषय है। इस अवसर पर पूरे देश में पूरी गरिमा के साथ आयोजन किए जाते हैं। आईये इस अवसर पर हम आपको पढवाते हैं कुछ कविताएं जो खासतौर से गणतंत्र दिवस को ध्‍यान में रखकर लिखी गई हैं।

(1)
हमारा अभिमान
गणतंत्र हमारा अभिमान है
तिरंगा हमारी शान है
पहले अपना देश बचाया
अंग्रेजों को वापस भगाया
तब जाकर अपना संविधान बनाया
हमारा संविधान हमारी आन है
तिरंगा हमारी शान है
सीने पर गोली खाते हैं
अपनी जान गंवाते हैं
इस तरह शहीद अपना देश बचाते हैं
देश के आगे छोटी हमारी जान है
तिरंगा हमारी शान है
यहां पावन गंगा बहती है
सोने की चिड़िया रहती है
लेकिन आजादी से जीने की बात कहती है
आजादी से जीने का स्वाभिमान है
तिरंगा हमारी शान है
गणतंत्र हमारा अभिमान है
तिरंगा हमारी शान है

(2)
अपना वतन जान से प्‍यारा
अपना वतन जान से प्यारा
झंडा ऊंचा रहे हमारा
गंगा यमुना सरस्वती जैसी
पावन नदियों की बहती धारा
झंडा ऊंचा रहे हमारा
सबसे बड़ा लोकतंत्र कहा जाता
जिसके गुण गाता है संसार सारा
झंडा ऊंचा रहे हमारा
सब आजाद रहे सबको अधिकार मिले
यही हमारे संविधान का नारा
झंडा ऊंचा रहे हमारा
अपना वतन जान से प्यारा
झंडा ऊंचा रहे हमारा


(3)
देखो दिवस गणतंत्र आया है
संविधान बनने याद दिलाया है
देखो दिवस गणतंत्र आया है
विश्व में सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश कहलाया है
देखो दिवस गणतंत्र आया है
हमारा संविधान पूरी दुनिया को भाया है
देखो दिवस गणतंत्र आया है
अध्यात्म से भरपूर ये देश सुख शांति की छाया है
देखो दिवस गणतंत्र आया है
अपने आयुर्वेद विज्ञान से इस देश ने नाम कमाया है
देखो दिवस गणतंत्र आया है


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