हिमालय की वादियों में हैं पांच कैलाश पर्वत- पंच कैलाश

हिमालय की वादियों में स्थित के बारे में तो सभी जानते हैं। यहां पर भगवान शंकर का मुख्य निवास स्थान हैं। इसी के पास कैलाश स्थित है। परंतु आप शायद ही जानते होंगे कि हिमालय की गोद में कैलाश पर्वत को मिलाकर चार और ऐसे स्थान हैं जिन्हें मिलकर इन्हें तीर्थ कहते हैं।

1. श्री कैलाश मानसरोवर (तिब्बत चीन) : कैलाश पर्वत समुद्र सतह से 22068 फुट ऊंचा है तथा हिमालय से उत्तरी क्षेत्र में तिब्बत में स्थित है। चूंकि तिब्बत चीन के अधीन है, अतः कैलाश चीन में आता है। मानसरोवर झील से घिरा होना कैलाश पर्वत की धार्मिक महत्ता को और अधिक बढ़ाता है। कैलाश पर्वत दुनिया के 4 मुख्य धर्मों- हिन्दू, जैन, बौद्ध और सिख धर्म का धार्मिक केंद्र है।

2. (हिमाचल भारत) : किन्नर कैलाश हिमाचल के किन्नौर जिले में स्थित है। बर्फिले पहाड़ों की चोटियों पर स्थित यहां का प्राकृतिक शिवलिंग 79 फिट ऊंचा है। किन्नर कैलाश का शिवलिंग त्रिशूल जैसा नजर आता है। यह एक बड़ी सी चट्टान है उसी तरह की जिस तरह की शनि शिंगणापुर में शनि महाराज की मूर्ति है। यहां के शिवलिंग की विशेषता यह है कि यह बार बार रंग बदलता है। किन्नर कैलाश पार्वती कुंड के काफी नजदीक है। मान्यता अनुसार इस कुंड को देवी पार्वती ने खुदवाया था।

3. (हिमाचल भारत) : यहां पहुंचना अमरनाथ ही दुर्गम है। यह स्थान हिमाचल के शिमला के आनी उममंडल के निरमंड खंड में स्थित बर्फीली पहाड़ी की 18570 फीट की ऊंचाई पर श्रीखंड की चोटीपर स्थित है। 35 किलोमीटर की जोखिम भरी यात्रा के बाद ही यहां पहुंचते हैं। स्थानीय मान्यता अनुसार यहीं पर भगवान विष्णु ने शिवजी से वरदान प्राप्त भस्मासुर को नृत्य के लिए राजी किया था। नृत्य करते करते उसने अपना हाथ अपने ही सिर पर रख लिया और वह भस्म हो गया था। मान्यता है कि इसी कारण आज भी यहां की मिट्टी और पानी दूर से ही लाल दिखाई देते हैं।
4. मणि महेश कैलाश (हिमाचल भारत) : यह स्थान हिमाचल प्रदेश में बुद्धिल घाटी में भरमौर से 21 किलोमीटर दूर स्थित है। हिमाचल की पीर पंजाल की पहाड़ियों के पूर्वी हिस्से में तहसील भरमौर में स्थित है यह प्रसिद्ध तीर्थ हिमाचल के चंबा शहर से करीब 82 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मणिमहेश में भगवान शिव मणि के रूप में दर्शन देते हैं। इसी कारण इसे मणिमहेश कहा जाता है। धौलाधार, पांगी व जांस्कर पर्वत श्रृंखलाओं से घिरा यह कैलाश पर्वत के नाम से भी जाना जाता है। यहां पर भी मानसरोवर की तरह एक झील है जिसे मणिमहेश झील कहा जाता है। झील कैलाश पीक (18,564 फीट) के नीचे13,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। शिवजी ने इस पर्वत क्षेत्र में वर्षों तक तपस्या की थी।

5. (उत्तरखण्ड भारत) : कैलाश पर्वत के बाद आदि कैलाश को सबसे अधिक पवित्र माना जाता है। इसे छोटा कैलाश भी कहते हैं। मान्यता अनुसार शिवजी जब बरात ले जा रहे थे तो रास्ते में यहां पर उन्होंने पड़ाव डाला था। उत्तराखंड राज्य की तिब्बत सीमा पर स्थित यह स्थान कैलाश मानसरोवर की यात्रा की तरह ही दुर्गम है। 150 किलोमीटर तक पैदल यात्रा करना होती है। यहां मानसरोवर की तरह ही पार्वती नामक सरोवर है। सरोवर के किनारे ही शिव और पार्वती माता का मंदिर है। इस क्षेत्र को ज्योतिलिंगकॉन्ग ने नाम से भी जाना जाता है।



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