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  4. What is the relationship between the 7 major religions of the world
Written By WD Feature Desk
Last Modified: बुधवार, 19 जून 2024 (13:10 IST)

Religion: दुनिया के 7 बड़े धर्मों में क्या है आपसी रिश्ता?

Religion and Spiritual path
Religion: वर्तमान में ईसाई, इस्लाम, बौद्ध, हिंदू, सिख और यहूदियों की संख्‍या अधिक है। सबसे प्राचीन धर्मों की बात करें तो हिंदू, जैन, पारसी, पैगन, मुशरिक, वुडू, यजीदी, माया, रोमन, ग्रीक, रशियन आदि धर्मों की बात की जाती है। कहते हैं कि इन्हीं सभी धर्मों से अन्य धर्मों की उत्पत्ति हुई थी। प्राचीन काल में तो बहुत सारे धर्म हुआ करते थे लेकिन ईसाई और इस्लाम धर्म के उदय के बाद हजारों धर्म लुप्त हो गए।ALSO READ: Religious : दुनिया के ये 6 धर्म विलुप्ति की कगार पर खड़े हैं?
 
फिर भी एक अनुमानित आंकड़ों के अनुसार दुनियाभर में धर्मों की संख्या लगभग 300 से ज्यादा होगी, लेकिन व्यापक रूप से 7 धर्म ही प्रचलित हैं हिन्दू, जैन, बौद्ध, सिख, ईसाई, इस्लाम, यहूदी और वुडू। इसके अलावा पारसी, यजीदी, जेन, शिंतो, पेगन, बहाई, ड्रूज़, मंदेंस, एलामितेस आदि धर्म को मानने वालों की संख्‍या बहुत कम है।ALSO READ: दुनिया के वे 10 प्राचीन धर्म जो अब हो गए हैं लुप्त
 
यहूदी, ईसाई और इस्लाम : इन तीनों धर्म की उत्पत्ति का स्थान अरब राष्ट्र है। इन तीन धर्मों को अब्राहमिक धर्म कहा जाता है क्योंकि इन सभी धर्मों की मूल उत्पत्ति ईशदूत अब्राहम के कारण हुई है जिन्हें इस्लाम में हजरत इब्राहीम कहा जाता है। तीनों धर्मों में कई बातों में समानता पाई जाती है। इतिहास के जानकार लोगों का कहना है कि उक्त तीनों धर्मों में एकेश्वरवादी सिद्धांत का मूल पारसी धर्म है। यह धर्म उस काल में ईरान सहित समूचे अरब का धर्म था। पारसी धर्म का संबंध यहूदी के साथ हिंदू धर्म से भी गहरा रहा है। इसी के साथ ही इन तीनों धर्मों के कुछ सिद्धांत माया, बेबिलोनियन और ईजिप्ट सभ्यता से मिलते-जुलते हैं।
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हिंदू, जैन, बौद्ध और सिख : इन चारों धर्मों की उत्पत्ति का स्थान भारत है। चारों धर्मों की उत्पत्ति का मूल ऋग्वेद और उपनिषदों को माना जाता है। हिन्दू और जैन दो शरीर लेकिन आत्मा एक है। यह भी कह सकते हैं कि एक ही कुल के दो धर्म हैं- हिन्दू और जैन। हालांकि दोनों का दर्शन भिन्न है लेकिन यह भिन्नता गहराई से देखने पर लुप्त हो जाती है। भगवान विष्णु ने ऋषभदेव के रूप में 8वां अवतार लिया। ऋषभदेव जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर थे। जैन धर्म के 21वें तीर्थंकर नमि के बारे में उल्लेख है कि वे मिथिला के राजा थे। इन्हें राजा जनक का पूर्वज माना जाता है। राजा जनक भगवान राम के श्‍वसुर थे। भगवान राम का जन्म इक्ष्वाकु कुल में हुआ था। इसी कुल में जैन तीर्थंकर शांतिनाथ का भी जन्म हुआ। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म यदुवंश में हुआ और इसी वंश में जैन तीर्थंकर नेमिनाथ का भी जन्म हुआ।ALSO READ: कजाकिस्तान में क्यों तेजी से फैल रहा सनातन हिंदू धर्म?
 
इसी तरह गौतम बुद्ध एक हिंदू थे और इतिहासकारों के अनुसार शाक्य वंश में जन्मे गौतम बुद्ध को श्रीराम का वंशज माना जाता है। श्रीमद्भागवत महापुराण और विष्णुपुराण में हमें शाक्यों की वंशावली के बारे में उल्लेख पढ़ने को मिलता है। बौद्ध और हिंदू धर्म के कई प्राचीन मंदिर संयुक्त रूप से बनाए गए थे। यहां पर भगवान विष्णु के साथ बुद्ध को दर्शाया गया है। दोनों ही धर्मों में कई तरह की समानताएं मिल जाएगी। दोनों धर्मों का आपसी संबंध मजबूत होने के कई कारण हैं। सिख धर्म की उत्पत्ति के कई कारणों में से एक देश और धर्म की रक्षा के लिए भी माना जाता है। हजारों सिखों ने हिंदु धर्म की रक्षार्थ अपने प्राणों को न्योछावर किया है। गुरु नानक से लेकर गुरु गोविंद सिंह जी सभी एक ही धर्म के थे। सिखों का एक उदासीन अखाड़ा कुंभ में शामिल होता है।
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