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ट्रंप का Abraham Accord आखिर क्या है? पाकिस्तान में क्यों मचा सियासी तूफान

Updated: बुधवार, 27 मई 2026 (18:17 IST)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक हालिया बयान के कारण पाकिस्तान के सियासी और सैन्य गलियारों में खलबली मचा हुई है।  ट्रंप ने ईरान से जुड़ी शांति वार्ता को 'अब्राहम एकॉर्ड्स' (Abraham Accords) के विस्तार से जोड़ते हुए पाकिस्तान समेत कई प्रमुख मुस्लिम देशों से इजराइल के साथ राजनयिक संबंध सामान्य करने की अपील की है। इसके चलते पाक कट्टरपंथियों ने शाहबाज शरीफ और आसीफ मुनीर को धमकी दी है। चलिए जानते हैं कि यह अब्राहम अकॉर्ड है।
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1. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मिशन:

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक विस्तृत पोस्ट में दावा किया कि सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र और जॉर्डन जैसे देशों को अब्राहम एकॉर्ड्स का हिस्सा बनना चाहिए। ट्रंप की इस घोषणा के बाद पाकिस्तान के भीतर सक्रिय संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और उसकी राजनीतिक शाखाओं में हड़कंप मच गया है। लश्कर की तरफ से जारी एक बेहद आक्रामक और भड़काऊ बयान में जनरल आसिम मुनीर को सीधे तौर पर चेतावनी दी गई है।
 

2. अब्राहम अकॉर्ड (Abraham Accords): एक नजर में

क्या है: सितंबर 2020 में अमेरिका की मध्यस्थता से इज़राइल और अरब देशों के बीच हुआ एक ऐतिहासिक राजनयिक और शांति समझौता।
शामिल देश: शुरुआत इज़राइल, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और बहरीन से हुई; बाद में सूडान और मोरक्को भी शामिल हुए।
मुख्य उद्देश्य: दशकों पुराने तनाव को खत्म कर मध्य-पूर्व में शांति स्थापित करना और व्यापार, पर्यटन, सुरक्षा व सीधी हवाई सेवाएं शुरू करना।
नाम का कारण: इसका नाम पैगंबर इब्राहिम (अब्राहम) के नाम पर रखा गया है, जो यहूदी, ईसाई और इस्लाम- तीनों धर्मों में साझा और पूजनीय पूर्वज हैं।
महत्व: इसने कई अरब देशों द्वारा इज़राइल को मान्यता न देने के दशकों पुराने गतिरोध को तोड़कर मध्य-पूर्व की भू-राजनीति को बदल दिया।
 

3. मिडल ईस्ट में शांति के लिए 'अब्राहमी प्रोजेक्ट': विवाद और हकीकत

इतिहास और पृष्ठभूमि: अरब जगत में सबसे पहले यहूदी, फिर ईसाई और अंत में इस्लाम धर्म का उदय हुआ। इन तीनों ही धर्मों को 'इब्राहीमी धर्म' (Abrahamic Religions) कहा जाता है, क्योंकि ये तीनों पैगंबर हज़रत इब्राहिम (अब्राहम) को अपना संदेशवाहक और एक ही ईश्वर को मानते हैं। इसके बावजूद, तीर्थों और मान्यताओं को लेकर इनके बीच सदियों से जंग जारी है। इस जंग को रोकने के लिए ही 'अब्राहमी प्रोजेक्ट' लांच किया गया। 
 
अब्राहम समझौता (2020): इस टकराव को खत्म करने और आपसी संबंध सुधारने के लिए वर्ष 2020 में अमेरिका की मध्यस्थता से इसराइल और यूएई के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौता हुआ, जिसे 'द अब्राहम एकॉर्ड' कहा गया। इसके तहत इसराइल ने फिलिस्तीनी क्षेत्रों को अपने हिस्से में मिलाने की योजना को निलंबित कर दिया।
 
एक नया 'धार्मिक प्रोजेक्ट': इस समझौते के तहत तीनों धर्मों की समानताओं के आधार पर 'अब्राहमी धर्म' नाम से एक नए वैचारिक प्रोजेक्ट की चर्चा शुरू हुई। विशेषज्ञों के अनुसार, यह औपचारिक रूप से कोई नया धर्म नहीं है, बल्कि तीनों धर्मों के मतभेद मिटाकर शांति स्थापित करने का एक राजनीतिक-धार्मिक जरिया है।
 
मिस्र में तीखा विरोध: इस विचार का अरब देशों, विशेषकर मिस्र और पाकिस्तान में भारी विरोध हो रहा है। अल-अजहर के सर्वोच्च इमाम अहमद अल तैय्यब और कॉप्टिक पादरियों का मानना है कि सभी धर्मों को मिलाकर एक करना असंभव है। पाकिस्तीन कट्टरपंत्री और विरोधियों का आरोप है कि यह 'अब्राहमी धर्म' राजनीतिक फायदे, धोखे और इस्लामी पहचान को कमजोर करने का एक प्रयास है। इससे इजराइल को ही फायदा होगा।
 

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