Hanuman Chalisa
✕

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में इस वर्ष 618 किसानों ने की आत्महत्या

Updated: बुधवार, 12 सितम्बर 2018 (16:55 IST)
औरंगाबाद (महाराष्ट्र)। महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में इस वर्ष एक जनवरी से नौ सितंबर तक फसल की बर्बादी और कर्ज से परेशान 618 किसानों ने आत्महत्या कर ली।


मंडलायुक्त के कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, सूखा प्रभावित बीड जिले में सबसे अधिक 125 किसानों ने आत्महत्या की। सबसे कम हिंगोली जिले में 42 किसानों ने खुदकुशी की है। उस्मानाबाद जिले में 100, औरंगाबाद में 87, परभणी में 85 तथा नांदेड और जालना जिले में 62-62 किसानों ने आत्महत्या की।

आत्महत्या के पीछे कर्ज, बारिश की कमी और फसल के खराब होने के साथ ही अन्य कारण बताए गए हैं। कुल 618 आत्महत्या के मामलों में 368 को सरकारी सहायता के योग्य पाया गया है, जबकि 166 मामलों को जांच के बाद खारिज कर दिया गया। 84 मामले अभी जांच के लिए लंबित हैं।

मराठवाड़ा में बारिश की कमी के कारण सूखे जैसी स्थिति है। इस महीने के अंत तक मानसून लगभग समाप्त हो जाएगा और वहां अब तक 39 प्रतिशत बारिश कम हुई है। क्षेत्र की कई सिंचाई परियोजनाओं में औसतन 34 प्रतिशत जल बचा है। (वार्ता)

Show comments

Harley-Davidson की सस्ती बाइक भारत में होगी लॉन्च, मचेगा तहलका

Royal Enfield Himalayan 750 : नए एडवेंचर टूरर से उठा पर्दा, पहली बार मिलेगा क्रूज कंट्रोल, जानिए इंजन और फीचर्स की पूरी जानकारी

हवाई यात्रा मत कीजिए, सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कहा, याचिका पर तत्काल सुनवाई से इंकार

लद्दाख में शराब कारोबारियों ने सोनम वांगचुक के खिलाफ खोला मोर्चा, एप्पल वाइन के व्यापार पर उठाए सवाल

PF खाते में पैसा आया या नहीं? घर बैठे ऐसे चेक करें अपना बैलेंस और पासबुक, मोबाइल से मिनटों में मिलेगा पूरा हिसाब

सभी देखें

त्रिपुरा में तस्करों ने BSF जवानों पर लाठी-डंडों से हमला कर छीनी राइफल, 8 गिरफ्तार (वीडियो)

पीएम मोदी ने पुणे मेट्रो को दिखाई हरी झंडी़, कहा- भारत सबसे तेजी से गरीबी घटाने वाला और विकास करने वाला देश

Manipur Violence: 24 घंटे में 5 कुकी युवकों की हत्या से फिर सुलगा मणिपुर, बंद और तनाव के बीच सुरक्षा बल हाई अलर्ट

बाबा के बयान पर बाबाओं में भोकाल, यादवों ने फूंका पर्चीबाज धीरेंद्र शास्‍त्री का पुतला, राम-कृष्‍ण पर बनाया था मजाक

'चावल का कटोरा' कहे जाने वाले कुलगाम में तेजी से बदल रही तस्वीर, धान के खेतों की जगह ले रहे सेब के बाग

अगला लेख