अनुष्ठान में शामिल ज्योतिषी बोले- अयोध्या में भव्य मंदिर बनेगा, मुहूर्त पर साधी चुप्पी

Author संदीप श्रीवास्तव| पुनः संशोधित शनिवार, 1 अगस्त 2020 (20:50 IST)
अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जन्मभूमि के शिलान्यास की शुभ घड़ी आ ही गई, जिसका भूमि पूजन करने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं 5 अगस्त को आ रहे हैं। राम मंदिर के इस भूमि पूजन को निर्विघ्न सनातन वैदिक अनुष्ठान के साथ संपन्न कराने के लिए राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित व बीएचयूके ज्योतिष विभाग के विभागाध्यक्ष अपने 2 अन्य विद्वानों के साथ आ रहे हैं।
प्रो.पांडेय ने 'वेबदुनिया' से बात करते हुए बताया कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या में आगामी 5 अगस्त को प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण हेतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के करकमलों द्वारा शिलापूजन एवं मंदिर का मुहूर्त सुनिश्चित है। सारी विधियां सनातन और वैदिक परंपरा के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान के अनुसार संपन्न कराई जानी है, विधिवत नियमानुसार सारी प्रक्रियाएं संपन्न होंगी।

उन्होंने कहा कि आयोजन समिति द्वारा काशी विधृत परिषद से हमें सूचित किया गया था कि आप सभी के निर्देशन व मार्गदर्शन में यह विधियां संपन्न हों, इसके लिए काशी विधृत परिषद ने तीन सदस्यीय दल को वहां भेजने का निर्णय लिया, जिसमें प्रमुख रूप से प्रो. रामचंद्र पांडेय व काशी विधृत परिषद के मंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी को नियुक्त किया गया हैं।

उन्होंने कहा कि समिति की इच्छा है कि यह सारे आयोजन विधि व अनुष्ठान काशी विधृत परिषद के मार्गदर्शन में संपन्न होंगे और यथाशीघ्र भव्य दिव्य राम मंदिर बनकर तैयार होगा। जो हमारे राष्ट्र व समग्र विश्व के लिए कल्याण व्रत सिद्ध होगा। यह अनुष्ठान विधिवत वैदिक ब्राह्मणों के द्वारा संपन्न कराया जाएगा और निश्चित ही दुख निवृत्ति का बहुत बड़ा मार्गदर्शन बनेगा।

जब मुहूर्त पर उठ रहे सवाल पर इनकी राय जाननी चाही तो उन्होंने कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया! भूमि पूजन लगभग तीन घंटे तक होगा साथ ही मुहूर्त का समय गोपनीय रखा गया है। प्रो. विनय ने बताया कि पूजन कार्यक्रम तीन घंटे तक निर्बाध चलेगा। प्रो. विनय को मिले ऐतिहासिक महत्व के इस दायित्व से गांव में हर्ष का माहौल है। परिवार व विश्वविद्यालय में हर्ष है।

प्रो. विनय पांडेय वर्ष 2015 में राष्ट्रपति के द्वारा सम्मानित भी हो चुके हैं, वर्तमान में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के ज्योतिष शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष हैं। साथ ही काशी विद्वत परिषद के संगठन मंत्री भी है। संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी पर समान रूप से अधिकार रखने वाले प्रो. विनय की ज्योतिष, वास्तु व कर्मकांड पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 14 व राष्ट्रीय स्तर पर 40 शोध पत्र व सात पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। साथ ही कई स्वर्ण पदक भी प्राप्त कर चुके हैं, पूर्व में भी वे प्रधानमंत्री के महत्वपूर्ण अनुष्ठान पूजन के कार्यक्रमों में शरीक होते रहे हैं।

कुशीनगर जिले के पडरौना ब्लाक के विशुनपुरा गांव में किसान रामदेव पांडेय के घर 20 नवंबर 1979 को जन्मे प्रो. पांडेय चार भाइयों में ज्येष्ठ हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव के शासकीय प्राथमिक विद्यालय में हुई। पूर्व माध्यमिक की शिक्षा कठकुइया के सरस्वती शिशु मंदिर में प्राप्त करने के बाद हाईस्कूल व इंटरमीडियट की परीक्षा गोरक्षनाथ संस्कृत विद्यालय गोरखपुर में हुई।उन्‍होंने उच्च अध्ययन के लिए बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में दाखिला लिया।

प्रो. पांडेय के उद्गार : श्रीराम की अनुकंपा से मिला रामजन्मभूमि का यह दायित्व राष्ट्रीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय महत्व का विषय है। भगवान राम सनातन संस्कृति के आराध्य हैं। उनकी जन्मभूमि अयोध्या सनातन संस्कृति की धरोहर है। जन्मभूमि पर श्रीराम मंदिर की स्थापना के पूर्व प्रधानमंत्री जी के हाथों शिलान्यास पूजन कर लौकिक, पारलौकिक जीवन धन्य हो जाएगा। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की अनुकंपा से ही मुझे यह सौभाग्य मिल रहा है।



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